॥ व्रत और त्योहार ॥

24 व्रत: विधि, नियम और कथा

सप्ताह के सात वार से लेकर एकादशी, नवरात्रि, शिवरात्रि, गणगौर और श्राद्ध तक। हर व्रत की पूरी विधि, क्या खाएँ और क्या नहीं, व्रत-कथा और उद्यापन।

व्रत क्या है, और इसके सामान्य नियम

व्रत का अर्थ

‘व्रत’ शब्द का अर्थ है संकल्प, प्रण, एक पक्का निश्चय। व्रत केवल भूखा रहने का नाम नहीं है। व्रत का अर्थ है एक दिन के लिए अपने मन, अपनी वाणी और अपने व्यवहार को अनुशासन में रखने का वचन भगवान को देना। भोजन का संयम उसका एक हिस्सा है, पूरा व्रत नहीं।

हमारे ऋषियों ने व्रत को जीवन सुधारने का अभ्यास माना। जो व्यक्ति एक दिन के लिए भी क्रोध, झूठ और लालच को रोक लेता है, वह धीरे-धीरे पूरे जीवन को सँवार लेता है। इसीलिए वेद में व्रत लेते समय सबसे पहले सत्य को अपनाने का संकल्प किया गया है।

अग्ने व्रतपते व्रतं चरिष्यामि तच्छकेयं तन्मे राध्यताम्। इदमहमनृतात्सत्यमुपैमि॥

शुक्ल यजुर्वेद 1.5

अर्थ:हे व्रतों के स्वामी अग्निदेव! मैं व्रत का पालन करूँगा। मुझे शक्ति दो कि मैं इसे निभा सकूँ, और मेरा यह व्रत सफल हो। आज से मैं असत्य को छोड़कर सत्य को अपनाता हूँ।

उपवास और व्रत में अंतर

‘उपवास’ दो शब्दों से बना है: उप (पास) और वास (रहना), यानी भगवान के पास रहना। भोजन कम करने से शरीर हल्का रहता है और मन पूजा में लगता है, इसलिए उपवास व्रत का साथी है। पर व्रत उससे बड़ा है। उसमें संकल्प, पूजा, कथा, दान, सेवा और अच्छा आचरण, सब शामिल हैं। जो व्यक्ति स्वास्थ्य के कारण भोजन नहीं छोड़ सकता, वह भी सत्य, संयम और पूजा के नियम निभाकर पूरा व्रत कर सकता है।

हर व्रत के सामान्य नियम

  • सत्य बोलें, किसी की निंदा या चुगली न करें।
  • क्रोध, झगड़े और कटु वचन से दूर रहें। व्रत का सबसे बड़ा नियम यही है।
  • सात्त्विक भोजन लें। प्याज़, लहसुन, मांस, मदिरा और हर तरह के नशे से दूर रहें।
  • मन और शरीर का संयम रखें, दिन में बहुत देर तक न सोएँ।
  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा-स्थान साफ़ रखें।
  • जितना हो सके, किसी ज़रूरतमंद की सहायता करें, दान दें।
  • उतना ही नियम लें जितना निभा सकें। छोटा पर पक्का संकल्प, बड़े पर अधूरे संकल्प से अच्छा है।

संकल्प कैसे लें

  1. सुबह स्नान करके पूजा-स्थान पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
  2. दाहिने हाथ में थोड़ा जल, कुछ अक्षत (साबुत चावल), एक फूल और हो सके तो एक सिक्का लें।
  3. अपने इष्टदेव का स्मरण करें। फिर अपना नाम, गोत्र, स्थान और दिन लेकर कहें: “मैं आज भगवान … की प्रसन्नता के लिए … व्रत रखूँगा/रखूँगी।” कोई कामना हो तो वह भी मन में कहें।
  4. अंत में हाथ का जल धीरे से धरती पर या किसी पात्र में छोड़ दें।
  5. संस्कृत न आए तो चिंता न करें। सच्चे मन से अपनी भाषा में लिया गया संकल्प भी पूरा संकल्प है।

पारण: व्रत कैसे खोलें

व्रत खोलने को ‘पारण’ कहते हैं। हर व्रत का पारण अलग समय पर होता है। एकादशी का पारण अगले दिन द्वादशी को निश्चित समय में होता है, संकष्टी चतुर्थी और करवा चौथ का चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद, और अधिकतर साप्ताहिक व्रतों का शाम की पूजा के बाद। पारण पूजा के प्रसाद से करें और पहला भोजन हल्का रखें। लंबे उपवास के बाद तुरंत भारी, तला हुआ भोजन पेट को कष्ट देता है।

फलाहार में क्या लें

  • फल, दूध, दही, छाछ, मेवे, मखाना
  • साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े या राजगिरा का आटा, समा के चावल
  • आलू, शकरकंद, अरबी, कच्चा केला, लौकी
  • सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, मूँगफली
  • हर व्रत के अपने नियम हैं, जैसे एकादशी में चावल नहीं और संतोषी माता के व्रत में खटाई नहीं। उस व्रत के पृष्ठ पर लिखे नियम देखें।

स्वास्थ्य पहले, यह भी धर्म है

शरीर भगवान का दिया मंदिर है। बीमार व्यक्ति, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताएँ, बुज़ुर्ग, बच्चे, और डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर या किसी भी नियमित दवा वाले लोग निर्जला या कठोर व्रत न रखें। वे फलाहार, एक समय भोजन या केवल पूजा-पाठ से व्रत करें और डॉक्टर की सलाह लें। दवा कभी न छोड़ें। शास्त्रों में भी रोगी, वृद्ध और असमर्थ लोगों के लिए छूट का विधान है।

अगर व्रत में कोई भूल हो जाए, जैसे अनजाने में कुछ खा लिया, पूजा छूट गई या कोई नियम टूट गया, तो डरिए मत। भगवान से क्षमा-प्रार्थना करें और अगली बार ध्यान रखें। भगवान भूख से नहीं, भाव से प्रसन्न होते हैं।

किस वार कौन-सा व्रत

सप्ताह के सात वार के व्रत
वारव्रतपूजनीयग्रह
रविवाररविवार व्रतसूर्य नारायणसूर्य
सोमवारसोमवार व्रतभगवान शिवचंद्र
मंगलवारमंगलवार व्रतहनुमान जी (सालासर बालाजी)मंगल
बुधवारबुधवार व्रतश्री गणेशबुध
गुरुवारगुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रतभगवान विष्णुगुरु (बृहस्पति)
शुक्रवारशुक्रवार व्रत (संतोषी माता)माँ लक्ष्मी, संतोषी माताशुक्र
शनिवारशनिवार व्रतशनिदेव, हनुमान जीशनि

साप्ताहिक व्रत

7 व्रत

सप्ताह के सात वार, सात ग्रह और उनके देवता। मन से एक वार चुनिए और नियम से निभाइए।

भगवान सूर्य (सूर्य नारायण)

रविवार व्रत

प्रत्यक्ष देवता सूर्य नारायण का व्रत, अच्छे स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, मान-सम्मान और पिता के आशीर्वाद के लिए। सुबह अर्घ्य और दिन में एक बार बिना नमक का भोजन।

विधि और कथा
भगवान शिव और माता पार्वती

सोमवार व्रत

भोलेनाथ का सबसे प्रिय व्रत: मन की शांति, सुखी दांपत्य, अच्छे जीवनसाथी और संकटों से रक्षा के लिए। जल, दूध और बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक।

विधि और कथा
श्री हनुमान जी (और मंगल देव)

मंगलवार व्रत

संकटमोचन हनुमान जी का व्रत: साहस, बल-बुद्धि, संकटों और रोगों से रक्षा, और मंगल ग्रह की शांति के लिए। दिन में एक बार गेहूँ-गुड़ का भोजन।

विधि और कथा
बुध देव और भगवान श्री गणेश

बुधवार व्रत

बुद्धि, वाणी, व्यापार और विद्या के लिए बुध देव और विघ्नहर्ता गणेश जी का व्रत। हरे रंग, दूर्वा और मूँग का विशेष महत्व।

विधि और कथा
भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति

गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत

ज्ञान, धर्म, सुख-समृद्धि, संतान और विवाह-सुख के लिए भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का व्रत। पीला रंग, चने की दाल, गुड़ और केले के पेड़ की पूजा।

विधि और कथा
संतोषी माता (और माता लक्ष्मी)

शुक्रवार व्रत (संतोषी माता)

संतोष, परिवार की सुख-शांति और मनोकामना-पूर्ति के लिए संतोषी माता का व्रत। गुड़-चने का प्रसाद, और पूरे दिन खटाई से परहेज़।

विधि और कथा
शनिदेव और श्री हनुमान जी

शनिवार व्रत

कर्मों के न्यायाधीश शनिदेव और संकटमोचन हनुमान जी का व्रत: साढ़ेसाती-ढैया में धैर्य, परिश्रम का फल और जीवन में अनुशासन के लिए। सरसों का तेल, काले तिल और पीपल की पूजा।

विधि और कथा

मासिक व्रत

5 व्रत

हर महीने आने वाली तिथियों के व्रत: एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा, संकष्टी चतुर्थी और अमावस्या।

भगवान श्री विष्णु

एकादशी व्रत

सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाने वाला भगवान विष्णु का व्रत: मन की शुद्धि, इंद्रियों पर संयम और भक्ति के लिए। चावल वर्जित, और द्वादशी को समय पर पारण।

विधि और कथा
भगवान शिव और माता पार्वती

प्रदोष व्रत

संध्या के प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का व्रत: संकट, रोग, कर्ज़ और दरिद्रता से मुक्ति और सुखी परिवार के लिए। वार के अनुसार अलग-अलग फल।

विधि और कथा
भगवान श्री सत्यनारायण (श्री विष्णु) और चंद्रदेव

पूर्णिमा व्रत और सत्यनारायण पूजा

पूर्ण चंद्रमा की रात का व्रत: भगवान सत्यनारायण की पूजा-कथा, स्नान-दान और चंद्रमा को अर्घ्य। घर में सुख-समृद्धि और मन की शांति के लिए।

विधि और कथा
भगवान श्री गणेश

संकष्टी चतुर्थी व्रत

संकटों को हरने वाले गणेश जी का मासिक व्रत: परिवार और संतान की रक्षा, विघ्नों से मुक्ति और सुख-शांति के लिए। रात को चंद्र-दर्शन और अर्घ्य के बाद पारण।

विधि और कथा
पितृ देव (पूर्वज), भगवान विष्णु और पीपल वृक्ष

अमावस्या व्रत और पितृ-पूजन

पूर्वजों को याद करने और उनका आशीर्वाद पाने का दिन: स्नान, तर्पण, पीपल पूजा, दीपदान और दान। मन को शांत करने वाली मासिक साधना।

विधि और कथा

वार्षिक व्रत और पर्व

12 व्रत

साल में एक बार आने वाले बड़े व्रत-पर्व, राजस्थान की गणगौर और शीतला अष्टमी सहित।

माँ दुर्गा (नवदुर्गा)

नवरात्रि

नौ दिन, माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना — घटस्थापना से कन्या पूजन तक। शक्ति, संयम और भीतर के अंधकार पर विजय का पर्व।

विधि और कथा
भगवान शिव (माता पार्वती सहित)

महाशिवरात्रि

शिव और शक्ति के मिलन की महान रात्रि — फलाहार व्रत, रात भर चार प्रहर की पूजा, बेलपत्र और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप।

विधि और कथा
भगवान श्रीकृष्ण (बालरूप लड्डू गोपाल)

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव — दिन भर का व्रत, आधी रात को लड्डू गोपाल का अभिषेक, झूला और माखन-मिश्री का भोग।

विधि और कथा
भगवान श्रीराम (राम दरबार सहित)

श्री राम नवमी

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्म का पर्व — मध्याह्न में जन्मोत्सव, रामचरितमानस का पाठ और पूरे परिवार के साथ राम-नाम का कीर्तन।

विधि और कथा
श्री हनुमान जी (बालाजी)

हनुमान जयंती (हनुमान जन्मोत्सव)

पवनपुत्र हनुमान जी के प्राकट्य का उत्सव — सिंदूर-चोला, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा और सालासर बालाजी का विशाल मेला।

विधि और कथा
माता पार्वती (चौथ माता/करवा माता), शिव जी, गणेश जी और चंद्रदेव

करवा चौथ

पति की लंबी आयु और दांपत्य के प्रेम के लिए सुहागिनों का व्रत — सरगी से शुरुआत, करवा पूजन, वीरावती की कथा और चाँद को अर्घ्य।

विधि और कथा
सावित्री-सत्यवान, वट (बरगद) वृक्ष में त्रिदेव, यमराज

वट सावित्री व्रत

सावित्री के अटूट प्रेम और बुद्धिमानी का व्रत — वट (बरगद) वृक्ष की पूजा, कच्चे सूत से परिक्रमा और सावित्री-सत्यवान की कथा।

विधि और कथा
भगवान शिव और माता पार्वती

हरतालिका तीज

माता पार्वती की तपस्या की स्मृति में निर्जला व्रत — बालू या मिट्टी के शिव-पार्वती का पूजन, रात्रि-जागरण और अखंड सौभाग्य की कामना।

विधि और कथा
अहोई माता (माता पार्वती का एक रूप) और स्याहु माता

अहोई अष्टमी

संतान की लंबी आयु और मंगल के लिए माताओं का व्रत — अहोई माता का पूजन, स्याहु माला और शाम को तारों को अर्घ्य।

विधि और कथा
ईसर जी (भगवान शिव) और गौर (माता पार्वती)

गणगौर

राजस्थान का प्रिय पर्व — होली के अगले दिन से 16-18 दिन ईसर-गौर (शिव-पार्वती) का पूजन, गीत, सिंजारा और चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर की विदाई।

विधि और कथा
शीतला माता

शीतला अष्टमी (बासोड़ा)

राजस्थान का बासोड़ा — एक दिन पहले बना ठंडा भोजन, शीतला माता का पूजन और ऋतु बदलते समय स्वच्छता व स्वास्थ्य का संदेश।

विधि और कथा
पितृ देव (पूर्वज); अर्यमा पितरों के स्वामी माने जाते हैं

श्राद्ध (पितृ पक्ष)

पूर्वजों को श्रद्धा से याद करने के 16 दिन — तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और पंचबलि से पितरों का आशीर्वाद।

विधि और कथा