बुध देव की स्तुति
प्रियङ्गुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥
नवग्रह स्तोत्र — महर्षि वेदव्यास
अर्थ:प्रियंगु की कली जैसे श्याम-हरित वर्ण वाले, अनुपम रूप वाले, सौम्य और सौम्य गुणों से भरे बुध देव को मैं प्रणाम करता हूँ।
तारा, चंद्रमा और बुद्धिमान बालक
देवगुरु बृहस्पति की पत्नी तारा अत्यंत सुंदर और विदुषी थीं। एक समय चंद्रमा ने बड़ा यज्ञ किया और तीनों लोकों में उनका यश फैल गया। यश के साथ उनमें अहंकार भी आ गया। पुराणों में कथा आती है कि तारा चंद्रमा के साथ चली गईं।
बृहस्पति ने बार-बार तारा को लौटाने का आग्रह किया, पर चंद्रमा नहीं माने। बात इतनी बढ़ी कि देवता बृहस्पति के पक्ष में खड़े हो गए, और बृहस्पति से बैर रखने वाले दैत्य-गुरु शुक्राचार्य चंद्रमा के साथ हो गए। एक स्त्री के कारण देवताओं और दैत्यों में भयंकर युद्ध छिड़ गया, जिसे ‘तारकामय संग्राम’ कहा गया।
सृष्टि को संकट में देखकर ब्रह्मा जी बीच में आए। उन्होंने युद्ध रुकवाया और तारा को बृहस्पति के पास लौटाया। पर तब तक तारा गर्भवती थीं। समय पर उन्होंने ऐसे सुंदर और तेजस्वी बालक को जन्म दिया कि उसे देखकर देवता भी चकित रह गए।
अब बृहस्पति और चंद्रमा, दोनों उसे अपना पुत्र कहने लगे। तारा लज्जा के मारे चुप रहीं। कहते हैं, नवजात बालक ने स्वयं माँ से कहा कि सच बताइए, ताकि यह विवाद समाप्त हो। अंत में ब्रह्मा जी ने तारा से एकांत में प्रेम से पूछा। तारा ने धीमे स्वर में बताया — यह चंद्रमा का पुत्र है।
ब्रह्मा जी बालक की गहरी समझ और तीक्ष्ण बुद्धि से बहुत प्रसन्न हुए और उसका नाम रखा — ‘बुध’, यानी बुद्धिमान। चंद्रमा ने पुत्र को स्नेह से अपनाया। आगे चलकर बुध का विवाह इला से हुआ और उनके पुत्र पुरूरवा से चंद्रवंश चला — उसी वंश में आगे यदु और पुरु हुए, और उसी परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण और पांडव।
इस कथा का भाव ज्योतिष में भी दिखता है। ग्रहों की मैत्री में चंद्रमा बुध को मित्र मानते हैं — जैसे पिता का स्नेह — पर बुध चंद्रमा को शत्रु भाव से देखते हैं, मानो जन्म की उलझन की याद बाक़ी हो।
सीख यह है कि बुद्धि का जन्म भले उलझन भरी परिस्थिति में हुआ, पर उलझनें बुद्धि से ही सुलझती हैं। सच बोलने का साहस — जो नवजात बुध ने माँ से माँगा — ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।
जीवन और कुंडली में बुध
- बुध किन बातों का कारक है
- बुद्धि, वाणी, लेखन, गणित और हिसाब-किताब, व्यापार, संचार, हास्य-विनोद, सीखने की क्षमता, मित्र, त्वचा, नसें
- धातु
- कांसा
- रत्न
- पन्ना
बुध बुद्धि, तर्क और वाणी का ग्रह है। पढ़ाई, लेखन, गणित, हिसाब-किताब, अकाउंट्स, व्यापार, मार्केटिंग, मीडिया, कंप्यूटर और संचार से जुड़े सारे काम बुध से देखे जाते हैं। शरीर में त्वचा और नसें बुध से जुड़ी मानी जाती हैं।
बुध को ‘कुमार’ ग्रह कहा गया है — हमेशा युवा, जिज्ञासु और हँसमुख। ज्योतिष का एक प्रसिद्ध नियम है कि बुध जिस ग्रह के साथ बैठता है, उसी जैसा फल देने लगता है। इसलिए बुध की परख हमेशा उसके साथियों को देखकर होती है।
बलवान बुध वाला व्यक्ति जल्दी सीखता है, मीठा और असरदार बोलता है, हिसाब में पक्का होता है और व्यापार में सूझ-बूझ दिखाता है। ऐसे लोग अच्छे शिक्षक, लेखक, वक्ता और व्यापारी बनते हैं।
कमज़ोर या पीड़ित बुध के संकेत
परंपरा में माना जाता है कि जब कुंडली में बुध कमज़ोर या पीड़ित हो, तो ये बातें अधिक देखने में आती हैं:
- पढ़ाई में मन न लगना, पढ़ा हुआ याद न रहना
- बोलते समय अटकना, या ग़लत बात मुँह से निकल जाना
- हिसाब-किताब में गड़बड़, व्यापार में ग़लत निर्णय
- त्वचा से जुड़ी समस्याएँ
- बहुत ज़्यादा सोचना, छोटी बात में उलझ जाना
- दोस्तों से ग़लतफ़हमी
- काग़ज़ी कामों और दस्तावेज़ों में अड़चन
पढ़ाई में कमज़ोरी के पीछे नींद की कमी, मोबाइल, पढ़ने का तरीका या आँखों की कमज़ोरी जैसे सीधे कारण भी हो सकते हैं — उन्हें पहले देखें। बुध का सही आकलन पूरी कुंडली से ही होता है।
आचरण: जो रोज़ कर सकते हैं
- वाणी मधुर रखें — कटु शब्द, गाली और झूठ से बचें।
- बहन, बेटी, बुआ और मौसी का सम्मान करें; उन्हें छोटे-छोटे उपहार दें।
- बुधवार को गणेश जी को दूर्वा (दूब) चढ़ाएँ।
- गाय को हरा चारा खिलाएँ।
- रोज़ कुछ नया पढ़ें और लिखें — बुध अभ्यास से ही बढ़ता है।
- हिसाब-किताब साफ़ रखें, उधार का लेखा लिखकर रखें।
- पौधे लगाएँ और हरियाली की देखभाल करें।
मंत्र और जप
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
अर्थ:बीज-शक्ति सहित बुद्धि-दाता बुध देव को नमस्कार।
जप: पूरे अनुष्ठान में 9000 जप (पंडित जी के मार्गदर्शन में)। घर पर बुधवार से शुरू करके रोज़ 1 माला पर्याप्त है।
ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेथामयं च। अस्मिन्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यजमानश्च सीदत॥
अर्थ:हे अग्निदेव! जागिए, सजग रहिए। आप और यह यजमान मिलकर यज्ञ-पूजा (इष्ट) और लोक-कल्याण के काम (पूर्त) पूरे करें। इस श्रेष्ठ, ऊँचे स्थान पर सब देवता और यजमान विराजें।
जप: विधिवत् अनुष्ठान में, पंडित जी के साथ।
शुक्ल यजुर्वेद — स्वर-सहित शुद्ध उच्चारण आवश्यक; घर पर बीज या नाम मंत्र सरल है।
ॐ बुं बुधाय नमः
अर्थ:बुद्धि-स्वरूप बुध देव को नमस्कार।
जप: बुधवार को 1 माला; विद्यार्थी पढ़ाई से पहले 11 बार।
दान और व्रत
दान: बुधवार
किसी बच्चे की पढ़ाई में मदद करना बुध का सबसे सुंदर दान है।
रत्न
- मुख्य रत्न
- पन्ना
- उपरत्न
- पेरिडॉट, हरा ओनेक्स
बिना कुंडली दिखाए रत्न न पहनें। विद्यार्थियों के लिए रत्न से पहले अभ्यास, पूरी नींद और सही दिनचर्या ज़रूरी है।
यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।