॥ संकल्प-पत्र ॥

अपना नाम लिखिए, और देखिए वह संकल्प में कैसे जुड़ता है

पूजा से पहले पंडित जी यही संकल्प बोलते हैं। आप जो भरेंगे, वह यहीं संस्कृत मंत्र में जुड़ता जाएगा, साथ में उसका हिंदी अर्थ भी।

अगला सामूहिक संकल्प: कल, मंगलवार, 3 नवंबर

कौन-सी सेवा?
अपना नाम, या जिनके लिए प्रार्थना है उनका।
संकल्पकर्ता
गोत्र ज्ञात न हो तो परंपरा अनुसार ‘कश्यप’ लिखें।
संकल्प किसके लिए?
कामना
॥ श्री हनुमते नमः ॥

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य अद्य श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे राजस्थानप्रान्ते सालासरक्षेत्रे [संवत् · मास · पक्ष · तिथि · वार] [गोत्र] गोत्रोत्पन्नः [आपका नाम] नामाहं मम सर्वसंकटनिवृत्त्यर्थं श्रीहनुमत्प्रीत्यर्थं ब्राह्मणद्वारा श्रीहनुमत्पूजनं कारयिष्ये॥

अर्थ

मैं, [आपका नाम], [गोत्र] गोत्र में जन्मा, सभी संकटों से मुक्ति के लिए, श्री हनुमान जी की प्रसन्नता हेतु, ब्राह्मण द्वारा श्री हनुमान पूजन करवाने का संकल्प लेता हूँ।

संवत्, मास, पक्ष, तिथि और वार पूजा के दिन पंडित जी पंचांग देखकर स्वयं जोड़ेंगे।

नाम और गोत्र भरते ही भेज सकेंगे

भेजते ही WhatsApp खुलेगा और संदेश पहले से लिखा होगा। दक्षिणा इच्छा अनुसार; यह वेबसाइट आपकी भरी कोई जानकारी अपने पास नहीं रखती।

॥ शब्द-दर-शब्द ॥

संकल्प के हर शब्द का अर्थ

संकल्प में समय की सबसे बड़ी इकाई से लेकर आज के दिन तक, और ब्रह्मांड से लेकर सालासर तक, अपना स्थान पहचाना जाता है। फिर अपना नाम, गोत्र और कामना बोली जाती है।

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः
भगवान विष्णु का तीन बार स्मरण। हर शुभ कर्म की शुरुआत भगवान के नाम से।
श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य
भगवान विष्णु की आज्ञा से चल रही इस सृष्टि में।
अद्य
आज।
श्रीब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे
ब्रह्मा जी की आयु के दूसरे आधे भाग (परार्ध) में। समय की सबसे बड़ी इकाई से शुरुआत।
श्रीश्वेतवाराहकल्पे
‘श्वेतवाराह’ नाम के कल्प में, यानी ब्रह्मा जी के इस दिन में।
वैवस्वतमन्वन्तरे
सातवें मनु, वैवस्वत मनु के युग (मन्वंतर) में।
अष्टाविंशतितमे कलियुगे
चारों युगों के अट्ठाईसवें चक्र के कलियुग में।
कलिप्रथमचरणे
कलियुग के पहले चरण में।
जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे
जम्बूद्वीप के भरतखंड, यानी हमारे भारतवर्ष में।
राजस्थानप्रान्ते सालासरक्षेत्रे
राजस्थान प्रदेश के सालासर धाम में, जहाँ पूजा हो रही है।
[संवत् · मास · पक्ष · तिथि · वार]
पूजा के दिन पंडित जी पंचांग देखकर विक्रम संवत, महीना, पक्ष, तिथि और वार जोड़ते हैं।
… गोत्रोत्पन्नः / गोत्रोत्पन्ना
… गोत्र में जन्मा / जन्मी।
… नामाहं
… नाम वाला / वाली मैं।
मम सकुटुम्बस्य
मेरे और मेरे परिवार के (जब संकल्प सपरिवार हो)।
…प्राप्त्यर्थं / …निवृत्त्यर्थं
… पाने के लिए / … से छुटकारे के लिए। यहाँ आपकी कामना बोली जाती है।
…प्रीत्यर्थं
… (देवता) की प्रसन्नता के लिए।
ब्राह्मणद्वारा … कारयिष्ये
ब्राह्मण के द्वारा … (पूजा/पाठ) करवाऊँगा / करवाऊँगी।