सेवाएँ: सालासर में, या घर बैठे
पूजा-पाठ, संस्कार, श्राद्ध, कुंडली और ऑनलाइन संकल्प। हर सेवा की पूरी जानकारी, और यह भी कि वह कब ज़रूरी नहीं है।
पूजा करवाने से पहले, दो सवाल
बहुत बार भक्त को किसी बड़ी पूजा की ज़रूरत ही नहीं होती। यह जाँच आपको सच बताएगी, चाहे उसमें हमारी कोई सेवा न हो।
पूजा, पाठ, हवन और संस्कार
आप सालासर आएँ। शास्त्रोक्त विधि से पूजा-पाठ, हवन, मांगलिक कार्य और संस्कार।
सुंदरकांड पाठ
हनुमान जी की कृपा और संकट से शांति के लिए। मंगलवार-शनिवार विशेष।
पूरी जानकारी संदेश भेजेंमंत्र जाप
कामना, संकट या शांति के लिए, आपके नाम और गोत्र के संकल्प से विधिपूर्वक जाप। कितनी संख्या में जाप हो, यह पंडित जी उद्देश्य देखकर बताएँगे।
संस्कार और शुभ कार्य
जीवन के हर शुभ मोड़ पर विधि-विधान से संस्कार।
वास्तु परामर्श और वास्तु पूजन
घर, दुकान या प्लॉट का नक्शा देखकर सरल सलाह, बिना तोड़-फोड़ के डर के; और भूमि पूजन से गृह प्रवेश तक वास्तु पूजन।
अंत्येष्टि और श्राद्ध
कठिन समय में परिवार के साथ, शास्त्रोक्त विधि से।
कुंडली, मिलान और मुहूर्त
जन्म विवरण भेजिए। पंडित जी शांति से देखकर वॉइस नोट में उत्तर देंगे। फ़ोन कॉल नहीं।
आपके नाम का संकल्प, सालासर में
दूर हैं, तब भी जुड़िए। आपके नाम और गोत्र से पूजा, उसका वीडियो WhatsApp पर, और प्रसाद डाक से।
किस पूजा में क्या होता है
पाठ
सुंदरकांड पाठ
गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस का पाँचवाँ कांड, जिसमें हनुमान जी का समुद्र लाँघना, सीता माता की खोज और लंका-दहन है। संकट के समय, नए काम की शुरुआत पर और मंगलवार-शनिवार को इसका पाठ विशेष माना जाता है।
पढ़ेंहनुमान चालीसा पाठ (11, 21 या 108)
गोस्वामी तुलसीदास जी की हनुमान चालीसा का संकल्प सहित पाठ: 11, 21 या 108 बार, आपके नाम और गोत्र से।
पढ़ेंपूजा और अनुष्ठान
रुद्राभिषेक
शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक, साथ में रुद्र-मंत्रों का पाठ। सोमवार, सावन, प्रदोष और महाशिवरात्रि पर यह पूजा विशेष मानी जाती है।
पढ़ेंसत्यनारायण कथा
भगवान विष्णु के सत्य-स्वरूप की पूजा और पाँच अध्यायों की कथा का श्रवण। पूर्णिमा, गृह प्रवेश, जन्मदिन या किसी मनोकामना के पूरी होने पर परिवार मिलकर यह कथा सुनता है।
पढ़ेंनवग्रह शांति पूजा
नौ ग्रहों का विधि से पूजन, उनके मंत्रों का जप और उनकी समिधाओं से हवन। यह पूजा कुंडली देखकर ही करवाई जाती है, और केवल तब जब सच में ज़रूरत हो।
पढ़ेंमहामृत्युंजय जप
भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का संकल्प सहित जप-अनुष्ठान। परिवार में किसी के स्वास्थ्य संकट, बड़ी सर्जरी या लंबी बीमारी के समय, इलाज के साथ श्रद्धा का सहारा।
पढ़ेंसंस्कार
विवाह संस्कार
सोलह संस्कारों में सबसे बड़ा संस्कार। कुंडली मिलान और मुहूर्त से लेकर कन्यादान, फेरे, सप्तपदी और सिंदूरदान तक, वैदिक विधि से विवाह।
पढ़ेंनामकरण संस्कार
शिशु का नामकरण: जन्म-नक्षत्र के अक्षर से नाम चुनकर, परिवार के बड़ों के आशीर्वाद के साथ बच्चे को उसका नाम देना।
पढ़ेंमुंडन संस्कार
चूड़ाकर्म संस्कार: जन्म के बाद पहली बार बच्चे के बाल उतारना। स्वच्छता, स्वास्थ्य और आशीर्वाद का यह संस्कार शुभ मुहूर्त में किया जाता है।
पढ़ेंअंत्येष्टि, तेरहवीं और श्राद्ध कर्म
अंतिम संस्कार और उसके बाद की क्रियाएँ: अस्थि-विसर्जन, दशगात्र, तेरहवीं और बरसी। दुःख की घड़ी में परिवार के साथ रहकर, शास्त्रोक्त विधि से, शांति और सम्मान के साथ।
पढ़ेंवास्तु
भूमि पूजन (शिलान्यास)
घर, दुकान या किसी भी निर्माण की नींव रखने से पहले धरती माता, वास्तु पुरुष और दिशाओं के देवताओं का पूजन, और नींव में शिला या कलश की स्थापना।
पढ़ेंगृह प्रवेश पूजा
नए घर में पहली बार प्रवेश से पहले वास्तु-पूजन, गणेश-लक्ष्मी पूजन, कलश और हवन, ताकि घर में सुख, शांति और अपनापन बसे।
पढ़ेंवास्तु शांति पूजा
घर, दुकान या ऑफ़िस के देवता वास्तु पुरुष और आठों दिशाओं के स्वामियों का पूजन और हवन, ताकि स्थान रहने वालों के लिए सुखद, स्वस्थ और शांत हो।
पढ़ेंसेवा कैसे होती है
- निवेदन: संकल्प-पत्र या निवेदन WhatsApp पर भेजें। कॉल नहीं, केवल संदेश।
- उत्तर: 24 घंटे में तिथि, समय और सामग्री की सूची।
- संकल्प: पूजा के दिन आपके नाम और गोत्र से संकल्प, पूरी विधि से।
- प्रमाण और प्रसाद: पूजा का वीडियो WhatsApp पर। ऑनलाइन सेवा में प्रसाद डाक से।
पूजा के बाद दक्षिणा अर्पित करनी हो, तो यहाँ से कर सकते हैं
सवाल-जवाब
क्या ऑनलाइन संकल्प से भी पूजा का फल मिलता है?
हाँ। संकल्प में आपका नाम, गोत्र और कामना बोलकर ही पूजा होती है, और ‘ब्राह्मणद्वारा कारयिष्ये’ यानी ब्राह्मण के द्वारा पूजा करवाने की परंपरा बहुत पुरानी है। सबसे बड़ी चीज़ आपका भाव है। जिस समय पूजा हो, आप घर पर दीपक जलाकर हनुमान चालीसा पढ़ें, तो और अच्छा।
पूजा का वीडियो कब मिलेगा?
पूजा वाले दिन ही आपके WhatsApp पर भेजा जाता है, ताकि आप देख सकें कि संकल्प आपके नाम से हुआ।
प्रसाद कैसे आएगा?
ऑनलाइन सेवा में प्रसाद डाक से भेजा जाता है। पहुँचने में कितने दिन लगेंगे, यह आपके शहर पर निर्भर करता है। विदेश में प्रसाद भेजना हर बार संभव नहीं होता।
पूजा-सामग्री कौन लाएगा?
पूजा-सामग्री आप स्वयं ला सकते हैं। यदि उसकी व्यवस्था पंडित जी से करवानी हो, तो सूची और वास्तविक ख़र्च पहले ही साफ़-साफ़ बता दिया जाता है।
पूजा सच में हुई, इसका प्रमाण क्या है?
हर ऑनलाइन संकल्प का वीडियो पूजा वाले दिन ही आपके WhatsApp पर भेजा जाता है। उसमें संकल्प के समय आपका नाम और गोत्र बोला जाता है, ताकि आप स्वयं सुन सकें।
क्या मेरी जानकारी सुरक्षित है?
यह वेबसाइट आपकी कोई जानकारी अपने पास नहीं रखती। संकल्प-पत्र में भरी बातें सीधे आपके अपने WhatsApp संदेश में जाती हैं। नाम, गोत्र और जन्म-विवरण का उपयोग केवल संकल्प और कुंडली विचार के लिए होता है, किसी और को नहीं दिया जाता।
अगर किसी कारण तय दिन पूजा न हो सके तो?
तो आपको पहले ही बता दिया जाएगा और आपकी सुविधा से नई तिथि तय होगी।
क्या पंडित जी से मिल सकते हैं?
हाँ, सालासर आकर। पहले WhatsApp पर निवेदन भेज दें, ताकि सेवा के बीच मिलने का समय तय हो सके।
कुंडली दिखाने के लिए क्या भेजना होगा?
नाम, जन्म तिथि, जन्म का समय और जन्म स्थान, और आपका प्रश्न एक पंक्ति में। जन्म का सही समय पता न हो, तो वह भी बता दीजिए; उसके हिसाब से विचार किया जाता है। कुंडली विचार में समय लगता है, इसलिए पूरा विवरण एक साथ भेजिए।
पंडित जी फ़ोन पर बात क्यों नहीं करते?
पंडित जी सुबह 4 बजे से रात तक मंदिरों की सेवा में रहते हैं। जल्दबाज़ी के फ़ोन की जगह वे सेवा के बाद शांति से आपका निवेदन पढ़ते हैं और WhatsApp पर, ज़रूरत हो तो वॉइस नोट में, सोच-समझकर उत्तर देते हैं।
मुझे अपना गोत्र नहीं पता, तो?
कोई बात नहीं। परंपरा में जिनका गोत्र ज्ञात न हो, उनके लिए ‘कश्यप’ गोत्र बोला जाता है, क्योंकि कश्यप ऋषि को सबका पूर्वज माना गया है।
क्या आप डराकर पूजा बताते हैं?
नहीं। यही इस सेवा का पहला वचन है। अगर किसी छोटे उपाय से काम चल सकता है, तो वही बताया जाएगा; और अगर पूजा की ज़रूरत ही नहीं है, तो साफ़ कहा जाएगा।
क्या विदेश से भी संकल्प करवा सकते हैं?
हाँ। निवेदन WhatsApp पर भेजिए; संकल्प और वीडियो उसी तरह होंगे।
सालासर आकर पूजा करवानी हो तो कैसे करें?
पहले निवेदन भेजिए, ताकि तिथि और समय तय हो सके। मंगलवार, शनिवार, पूर्णिमा और मेलों के समय बहुत भीड़ होती है, इसलिए पहले से बताना ठीक रहता है।