- कब करवाते हैं
- रिश्ते की बात आगे बढ़ाने से पहले; सगाई और विवाह-मुहूर्त निकालने से पहले।
- अनुमानित समय
- जन्म-विवरण मिलने के बाद, सामान्यतः 24 घंटे के भीतर WhatsApp पर उत्तर
- कहाँ
- सालासर में, आपके यहाँ, या ऑनलाइन संकल्प से
कुंडली मिलान क्यों करवाते हैं
कुंडली मिलान का उद्देश्य यह देखना है कि दो लोगों के स्वभाव, स्वास्थ्य और जीवन की दिशा में कितना तालमेल है। इसकी सबसे प्रचलित विधि ‘अष्टकूट’ है, जिसमें आठ बातों के कुल 36 गुण होते हैं।
- वर्ण (1 गुण): स्वभाव और कार्य की प्रकृति का मेल
- वश्य (2 गुण): आपसी आकर्षण और एक-दूसरे पर प्रभाव
- तारा (3 गुण): भाग्य और स्वास्थ्य का तालमेल
- योनि (4 गुण): स्वभाव और अंतरंग संगति
- ग्रह मैत्री (5 गुण): दोनों की राशियों के स्वामियों की मित्रता, यानी मानसिक मेल
- गण (6 गुण): स्वभाव के तीन प्रकार: देव, मनुष्य और राक्षस
- भकूट (7 गुण): परिवार, समृद्धि और आपसी प्रेम
- नाड़ी (8 गुण): स्वास्थ्य और संतान से जुड़ा विचार
सामान्यतः 18 या उससे अधिक गुण ठीक माने जाते हैं। पर नाड़ी और भकूट जैसे दोषों के कई परिहार (अपवाद) शास्त्रों में बताए गए हैं, और गुणों के अलावा सप्तम भाव, शुक्र और गुरु की स्थिति, मांगलिक विचार और दशा का समय भी देखा जाता है। इसलिए केवल अंकों से नहीं, पूरी कुंडली से निर्णय होता है।
कब ज़रूरत नहीं
केवल गुणों के अंकों से रिश्ता न तोलें: 30 गुण मिलकर भी बात न बने, और 20 गुण में भी सुखी जीवन हो सकता है। मांगलिक या नाड़ी दोष सुनकर घबराएँ नहीं; पूरी कुंडली देखकर ही निर्णय होता है, और कई बार दोष का परिहार कुंडली में ही होता है।
पूजा में क्या-क्या होता है
- दोनों के जन्म-विवरण लिए जाते हैं: नाम, जन्म तिथि, जन्म का सही समय और जन्म स्थान।
- दोनों की कुंडलियाँ बनाई जाती हैं: लग्न, राशि और नक्षत्र।
- अष्टकूट गुण-मिलान किया जाता है (36 में से)।
- नाड़ी, भकूट और गण दोष का विचार और उनके परिहार देखे जाते हैं।
- दोनों कुंडलियों में मंगल की स्थिति देखकर मांगलिक विचार और उसका परिहार।
- सप्तम भाव, शुक्र-गुरु और वैवाहिक जीवन के योग देखे जाते हैं।
- दोनों की चल रही दशा और आने वाले समय पर विचार।
- निष्कर्ष सरल भाषा में WhatsApp पर, ज़रूरत हो तो वॉइस नोट में बताया जाता है।
- रिश्ता तय हो, तो सगाई और विवाह के शुभ मुहूर्त निकाले जाते हैं।
सामग्री
परिवार की तैयारी
- जन्म का समय जितना सही होगा, मिलान उतना ही सटीक होगा; अस्पताल के रिकॉर्ड या जन्म प्रमाण-पत्र से देख लें।
- दोनों परिवारों की जानकारी और सहमति से ही मिलान करवाएँ।
- मिलान का परिणाम निजी रखें; किसी के बारे में दोष की बातें फैलाना उचित नहीं।
- कोई दोष निकले, तो तुरंत रिश्ता न तोड़ें; पहले उसका परिहार और पूरी कुंडली समझ लें।
- अंतिम निर्णय में लड़के-लड़की की आपसी समझ और परिवारों का स्वभाव भी उतना ही ज़रूरी है।
मंत्र
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
अर्थ:हे कात्यायनी, हे महामाया, हे महान योगिनी और सबकी स्वामिनी देवी, नंदगोप के पुत्र (श्रीकृष्ण) को मेरा पति बनाइए; आपको नमस्कार है। ब्रज की गोपियों ने यह प्रार्थना की थी; आज इसे शुभ और योग्य जीवनसाथी की कामना से श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।
सवाल-जवाब
जन्म का सही समय पता न हो, तो?
नाम-राशि या प्रश्न-कुंडली से भी विचार किया जाता है, पर उसकी सटीकता कम होती है। जो जानकारी हो, वह साफ़ बता दें; उसी के हिसाब से विचार होगा।
कितने गुण मिलने ज़रूरी हैं?
सामान्यतः 18 या उससे अधिक गुण ठीक माने जाते हैं। पर केवल गुणों की संख्या से निर्णय नहीं होता; दोषों के परिहार और पूरी कुंडली देखी जाती है।
एक मांगलिक और एक गैर-मांगलिक हो, तो क्या करें?
पहले देखें कि मांगलिक दोष का परिहार कुंडली में है या नहीं; कई बार दूसरी कुंडली में ही संतुलन होता है। डर से अच्छा रिश्ता न छोड़ें; पूरी जानकारी के लिए ‘मांगलिक दोष का सच’ पृष्ठ पढ़ें।
क्या कुंडली मिलान के लिए सालासर आना होगा?
नहीं। जन्म-विवरण WhatsApp पर भेजिए; पंडित जी शांति से देखकर वहीं उत्तर देते हैं, ज़रूरत हो तो वॉइस नोट में।
यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।