आपकी दक्षिणा पहुँच गई
पंडित जी आपकी श्रद्धा को सादर ग्रहण करते हैं। श्री बालाजी महाराज आप पर कृपा बनाए रखें।
- राशि
- भुगतान संख्या
भुगतान संख्या संभालकर रखें, किसी प्रश्न में यही काम आएगी।
पंडित जी को सूचना भेजेंदक्षिणा का भाव
दक्षिणा मन की संतुष्टि से दी जाती है: न किसी दबाव में, न किसी के कहने पर। आप जो भी राशि प्रसन्न मन से अर्पित करेंगे, पंडित जी उसे उसी प्रसन्नता से ग्रहण करेंगे।
श्रद्धया देयम्। अश्रद्धयाऽदेयम्। श्रिया देयम्। ह्रिया देयम्। भिया देयम्। संविदा देयम्॥
तैत्तिरीय उपनिषद्, शिक्षावल्ली 11.3
अर्थ:श्रद्धा से देना चाहिए, अश्रद्धा से नहीं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार, विनम्रता से, आदर-भाव से और समझ-बूझकर देना चाहिए।
शास्त्र कहते हैं कि दक्षिणा तभी फलदायी है, जब देने वाले और लेने वाले, दोनों का मन संतुष्ट हो। कलियुग में अक्सर न देने वाले का मन भरता है, न लेने वाले का। हमारे यहाँ ऐसा नहीं है: आप जो मन से दें, वही पूरा है।