॥ जन्म नक्षत्र ॥

जन्म नक्षत्र, राशि और नाम का अक्षर

जन्म की तारीख़, समय और स्थान भरिए। जन्म के क्षण चंद्रमा जिस नक्षत्र और राशि में था, वही आपका जन्म नक्षत्र और राशि है। नामकरण में इसी नक्षत्र के चरण से नाम का पहला अक्षर चुना जाता है।

पंडित जी को कुंडली दिखाएँWhatsApp पर संदेश, उत्तर 24 घंटे में
अस्पताल के रिकॉर्ड या घर के बड़ों से पूछा हुआ समय।

यह गणना आपके फ़ोन पर ही होती है; आपकी जन्म-जानकारी कहीं भेजी या सहेजी नहीं जाती।

इसे कैसे समझें

नक्षत्र और चरण: आकाश के 27 भाग नक्षत्र हैं और हर नक्षत्र के चार चरण। जन्म के समय चंद्रमा जहाँ था, वही जन्म नक्षत्र है। नामकरण संस्कार में उसी चरण का अक्षर नाम के पहले अक्षर के लिए लिया जाता है।

चंद्र राशि: भारतीय परंपरा में "राशि" का मतलब चंद्र राशि है। अख़बार के राशिफल अक्सर सूर्य राशि से होते हैं, इसलिए दोनों अलग हो सकती हैं।

गण, नाड़ी, योनि: ये विवाह के समय कुंडली मिलान (अष्टकूट) में काम आते हैं। अकेले इनका कोई अच्छा या बुरा अर्थ नहीं है।

यह पूरी कुंडली नहीं है: पूरी जन्म कुंडली में लग्न, नौ ग्रहों की स्थिति, दशा और भाव भी देखे जाते हैं। उसके लिए पंडित जी को जन्म-विवरण भेजिए।

सभी 27 नक्षत्रों के नाम-अक्षर

नक्षत्र, उसके चार चरणों के अक्षर, स्वामी ग्रह और गण
नक्षत्रचरण 1, 2, 3, 4 के अक्षरस्वामीगण
अश्विनीचू, चे, चो, लाकेतुदेव
भरणीली, लू, ले, लोशुक्रमनुष्य
कृत्तिकाअ, ई, उ, एसूर्यराक्षस
रोहिणीओ, वा, वी, वूचंद्रमनुष्य
मृगशिरावे, वो, का, कीमंगलदेव
आर्द्राकु, घ, ङ, छराहुमनुष्य
पुनर्वसुके, को, हा, हीगुरुदेव
पुष्यहु, हे, हो, डाशनिदेव
आश्लेषाडी, डू, डे, डोबुधराक्षस
मघामा, मी, मू, मेकेतुराक्षस
पूर्वा फाल्गुनीमो, टा, टी, टूशुक्रमनुष्य
उत्तरा फाल्गुनीटे, टो, पा, पीसूर्यमनुष्य
हस्तपू, ष, ण, ठचंद्रदेव
चित्रापे, पो, रा, रीमंगलराक्षस
स्वातिरू, रे, रो, ताराहुदेव
विशाखाती, तू, ते, तोगुरुराक्षस
अनुराधाना, नी, नू, नेशनिदेव
ज्येष्ठानो, या, यी, यूबुधराक्षस
मूलये, यो, भा, भीकेतुराक्षस
पूर्वाषाढ़ाभू, धा, फा, ढाशुक्रमनुष्य
उत्तराषाढ़ाभे, भो, जा, जीसूर्यमनुष्य
श्रवणखी, खू, खे, खोचंद्रदेव
धनिष्ठागा, गी, गू, गेमंगलराक्षस
शतभिषागो, सा, सी, सूराहुराक्षस
पूर्वा भाद्रपदसे, सो, दा, दीगुरुमनुष्य
उत्तरा भाद्रपददू, थ, झ, ञशनिमनुष्य
रेवतीदे, दो, चा, चीबुधदेव