ज्योतिष: कुंडली, मिलान, नवग्रह और मुहूर्त
अपनी जन्म कुंडली खुद बनाइए, विवाह के लिए 36 गुण मिलाइए, नौ ग्रहों और दोषों का सच समझिए। मन में कोई प्रश्न हो, तो जन्म विवरण WhatsApp पर भेजिए; पंडित जी शांति से देखकर उत्तर देंगे, बिना डराए।
मुफ़्त ज्योतिष उपकरण
जन्म तिथि, समय और स्थान भरिए; गणना आपके फ़ोन या कंप्यूटर में ही होती है, जन्म विवरण कहीं भेजा नहीं जाता।
जन्म कुंडली
लग्न, चंद्र और नवांश कुंडली, ग्रह स्पष्ट, भाव स्पष्ट, अवकहड़ा चक्र, विंशोत्तरी दशा, मांगलिक विचार और साढ़ेसाती।
कुंडली बनाएँ ३६गुणकुंडली मिलान
अष्टकूट के 36 गुण: वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी; नाड़ी और भकूट दोष, और उनके परिहार की स्थिति।
गुण मिलान करें २७नक्षत्रजन्म नक्षत्र और नाम-अक्षर
अपना नक्षत्र, चरण, चंद्र राशि, गण, नाड़ी, योनि, और नामकरण के लिए शुभ अक्षर।
अभी देखें ५अंगपंचांग और मुहूर्त
तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण; राहुकाल, चौघड़िया, होरा और अभिजीत मुहूर्त; आने वाले व्रत-त्योहार भी।
आज का पंचांगपंडित जी को कुंडली कैसे दिखाएँ
- जन्म विवरण: नाम, जन्म तिथि, जन्म का समय और जन्म स्थान (गाँव या शहर)। समय जितना सही हो, उतना अच्छा; पता न हो, तो वह भी लिख दीजिए।
- प्रश्न: जो जानना है, एक पंक्ति में: जैसे विवाह, नौकरी, व्यापार, पढ़ाई या स्वास्थ्य से जुड़ी बात। विवाह-मिलान के लिए वर और कन्या, दोनों का विवरण भेजिए।
- WhatsApp पर भेजिए: नीचे का बटन दबाने पर संदेश का ढाँचा अपने-आप भर जाता है। बस खाली जगह भरकर भेज दीजिए।
- उत्तर: पंडित जी मंदिरों की सेवा के बाद शांति से कुंडली देखते हैं, और WhatsApp पर, ज़रूरत हो तो वॉइस नोट में, उत्तर देते हैं। फ़ोन कॉल नहीं।
WhatsApp: +91 98281 29585 · केवल संदेश, उत्तर 24 घंटे में · दक्षिणा इच्छा अनुसार
डराएँगे नहीं
दोष, कालसर्प या ग्रहों के नाम पर भय दिखाकर कभी कोई पूजा नहीं बताई जाएगी।
जो ज़रूरी नहीं, वो नहीं
छोटे उपाय से काम चले तो बड़ी पूजा नहीं। कई बार सलाह बस इतनी होगी: हर मंगलवार हनुमान चालीसा।
रत्न सबसे अंत में, और केवल पूरी कुंडली दिखाकर। उपाय का सही क्रम है: पहले आचरण, फिर मंत्र-जप, दान और व्रत। ग़लत रत्न लाभ की जगह परेशानी दे सकता है।
जिन दोषों से लोग सबसे ज़्यादा डरते हैं, उनका सच
शनि की साढ़ेसाती
जब गोचर में शनि आपकी चंद्र-राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव से गुज़रते हैं — लगभग साढ़े सात साल। यह समय कठिन भी हो सकता है और जीवन को नई दिशा देने वाला भी।
पूरा पढ़ेंशनि की ढैया
जब गोचर में शनि चंद्र-राशि से चौथे या आठवें भाव में हों — लगभग ढाई साल का समय। इसे ‘लघु कल्याणी’ भी कहा जाता है।
पूरा पढ़ेंमांगलिक दोष (मंगल दोष)
जब कुंडली में मंगल पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो उसे मांगलिक योग कहते हैं। यह विवाह-मिलान में देखा जाता है — पर इससे डरने की ज़रूरत नहीं।
पूरा पढ़ेंकालसर्प योग
जब कुंडली में सातों ग्रह राहु और केतु के एक ओर आ जाएँ, तो उसे कालसर्प योग कहते हैं। इसके नाम से जितना डर फैलाया जाता है, उतना डरने की ज़रूरत नहीं।
पूरा पढ़ेंपितृ दोष
पूर्वजों के प्रति अधूरे कर्तव्यों से जुड़ी मान्यता। इसका सबसे सुंदर उपाय है — श्राद्ध, तर्पण और जीवित बड़ों की सेवा।
पूरा पढ़ेंशुभ मुहूर्त
रोज़ के छोटे कामों के लिए आज के पंचांग में चौघड़िया, राहुकाल, होरा और अभिजीत मुहूर्त देखे जा सकते हैं। ये सब आपके चुने हुए शहर के सूर्योदय के अनुसार निकलते हैं।
विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, व्यापार आरंभ, नामकरण या वाहन जैसे बड़े कामों का मुहूर्त पंडित जी से ही निकलवाएँ, क्योंकि उसमें तिथि-नक्षत्र के साथ लग्न, शुद्धि और परिवार की कुंडली भी देखी जाती है।
ज्योतिष से जुड़ी पूजा
पूजा तभी, जब सच में ज़रूरत हो। हर पूजा क्या है, कितना समय लगता है और कैसे तैयारी करें, सब पढ़कर तय कीजिए।
कुंडली मिलान
विवाह से पहले वर-वधू की कुंडलियों का मिलान: अष्टकूट गुण-मिलान, मांगलिक विचार और ग्रहों की पूरी तस्वीर, शांत मन से और बिना डराए।
पढ़ेंनवग्रह शांति पूजा
नौ ग्रहों का विधि से पूजन, उनके मंत्रों का जप और उनकी समिधाओं से हवन। यह पूजा कुंडली देखकर ही करवाई जाती है, और केवल तब जब सच में ज़रूरत हो।
पढ़ेंमहामृत्युंजय जप
भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का संकल्प सहित जप-अनुष्ठान। परिवार में किसी के स्वास्थ्य संकट, बड़ी सर्जरी या लंबी बीमारी के समय, इलाज के साथ श्रद्धा का सहारा।
पढ़ेंसवाल-जवाब
जन्म का सही समय पता न हो, तो क्या कुंडली देखी जा सकती है?
हाँ। जितना याद हो (सुबह, दोपहर, शाम या लगभग समय), वह लिख दीजिए। चंद्र राशि लगभग सवा दो दिन तक एक ही रहती है, इसलिए वह अक्सर बिना सही समय के भी पता चल जाती है; पर लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसलिए लग्न और भावों की बात समय के हिसाब से सावधानी से कही जाती है।
इस वेबसाइट पर बनी कुंडली कितनी सही है?
ग्रहों की स्थिति खगोल-गणित के मानक सूत्रों और लाहिरी अयनांश से निकाली जाती है, और गणना आपके फ़ोन या कंप्यूटर में ही होती है; जन्म विवरण कहीं भेजा नहीं जाता। पर कुंडली बनाना गणित है और उसे पढ़ना अनुभव। फल, दशा और उपाय की बात पूरी कुंडली देखकर ही कही जा सकती है।
विवाह के लिए 36 में से कितने गुण मिलने चाहिए?
सामान्य परंपरा में 18 से कम गुण कम माने जाते हैं, 18 से 24 मध्यम, 25 से 32 अच्छे और 33 से अधिक उत्तम। पर केवल गिनती से निर्णय नहीं होता: नाड़ी और भकूट दोष, उनके परिहार, मांगलिक विचार और दोनों कुंडलियों की पूरी तस्वीर साथ देखी जाती है। कुंडली मिलान: 36 गुण
मांगलिक होने से क्या विवाह में बाधा आती है?
मांगलिक शब्द से डरने की ज़रूरत नहीं। पाँच-छह भावों की गिनती के कारण बहुत बड़ी संख्या में लोग किसी-न-किसी तरह मांगलिक निकल आते हैं, और शास्त्रों में इसके कई परिहार भी बताए गए हैं। दोनों कुंडलियाँ शांति से दिखाइए। मांगलिक दोष (मंगल दोष)
क्या कोई रत्न पहन लेना चाहिए?
बिना पूरी कुंडली दिखाए कोई भी रत्न न पहनें। उपाय का सही क्रम पहले आचरण, फिर मंत्र-जप, दान और व्रत है, और रत्न सबसे अंत में। बहुत बार सरल उपायों से ही काम चल जाता है। नवग्रह
क्या फ़ोन पर तुरंत भविष्यवाणी मिल सकती है?
नहीं। फ़ोन कॉल पर तुरंत भविष्यवाणी इस सेवा में नहीं होती। कुंडली शांति से देखकर ही WhatsApp पर उत्तर दिया जाता है, ताकि जो कहा जाए, सोच-समझकर कहा जाए।
कुंडली दिखाने की दक्षिणा कितनी है?
दक्षिणा इच्छा अनुसार है: कोई तय रेट नहीं, कोई दबाव नहीं, कोई मोल-भाव नहीं।