- कब करवाते हैं
- कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति देखकर पंडित जी की सलाह पर। गृह प्रवेश, विवाह जैसे बड़े शुभ कार्यों से पहले संक्षिप्त नवग्रह पूजन तो परंपरा से होता ही है।
- अनुमानित समय
- लगभग 3 से 4 घंटे (हवन सहित)
- कहाँ
- सालासर में, आपके यहाँ, या ऑनलाइन संकल्प से
नवग्रह शांति पूजा क्यों करवाते हैं
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, ये नौ ग्रह ज्योतिष में जीवन के अलग-अलग पक्षों से जोड़े जाते हैं। ग्रह किसी को सज़ा देने नहीं बैठे; वे हमारे कर्मों का दर्पण हैं। नवग्रह शांति का अर्थ है ग्रहों के प्रति आदर और अपने आचरण पर ध्यान, ताकि कठिन समय में मन स्थिर रहे।
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥
नवग्रह स्तुति (परंपरागत)
अर्थ:ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि), शिव (त्रिपुरासुर का अंत करने वाले), सूर्य, चंद्रमा, मंगल (भूमि-पुत्र), बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, ये सब ग्रह हमारे लिए शांति देने वाले हों।
हर बड़े शुभ कार्य की शुरुआत में नवग्रहों का संक्षिप्त पूजन होता है, इसलिए नवग्रह पूजा अपने-आप में डर की बात नहीं है। अलग से नवग्रह शांति का अनुष्ठान तब किया जाता है जब पूरी कुंडली देखकर लगे कि किसी ग्रह के लिए विशेष जप, हवन और दान उचित है।
उपाय का सही क्रम याद रखिए: सबसे पहले सही आचरण, फिर मंत्र-जप, फिर दान और व्रत, और रत्न सबसे आख़िर में, केवल कुंडली देखकर। नवग्रह शांति पूजा इन सबका साथ है, इनकी जगह नहीं।
कब ज़रूरत नहीं
केवल किसी के कहने पर, बिना पूरी कुंडली देखे, नवग्रह शांति करवाना ज़रूरी नहीं है। हर कठिनाई ग्रहों के कारण नहीं होती, और कई बार किसी एक ग्रह के लिए उसका नियमित जप, दान या सही आचरण ही पर्याप्त होता है।
पूजा में क्या-क्या होता है
- पहले कुंडली देखकर यह तय होता है कि शांति पूजा ज़रूरी है या नहीं, और किन ग्रहों के लिए।
- पंचांग से शुभ दिन और समय चुना जाता है।
- गणेश पूजन, कलश स्थापना और संकल्प होता है।
- चौकी पर नवग्रह मंडल बनाया जाता है: हर ग्रह का अपना स्थान, रंग और अनाज।
- हर ग्रह का आवाहन, ध्यान और पूजन होता है: उसके रंग के फूल, वस्त्र और अन्न के साथ।
- संकल्प की संख्या के अनुसार नवग्रहों के मंत्रों का जप होता है।
- हवन में हर ग्रह की अलग समिधा से आहुतियाँ दी जाती हैं: सूर्य के लिए आक, चंद्र के लिए पलाश, मंगल के लिए खैर, बुध के लिए अपामार्ग, गुरु के लिए पीपल, शुक्र के लिए गूलर, शनि के लिए शमी, राहु के लिए दूर्वा और केतु के लिए कुश।
- पूर्णाहुति और आरती होती है।
- ग्रहों के अनुसार दान का संकल्प कराया जाता है।
- क्षमा-प्रार्थना और प्रसाद-वितरण के साथ पूजा पूरी होती है।
सामग्री
परिवार की तैयारी
- जन्म-विवरण या कुंडली पहले भेजें, ताकि ज़रूरत और संकल्प तय हो सके।
- पूजा के दिन स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; पति-पत्नी साथ बैठ सकते हैं।
- दान की सामग्री पहले से तैयार रखें और उसे ज़रूरतमंद को सम्मान से दें।
- पूजा के बाद भी आचरण के उपाय (जैसे बड़ों का सम्मान, सच बोलना, सेवा) जारी रखें; असली शांति वहीं से आती है।
सवाल-जवाब
क्या बिना कुंडली देखे नवग्रह शांति करवा सकते हैं?
बड़े शुभ कार्यों में संक्षिप्त नवग्रह पूजन तो होता ही है। पर अलग से शांति का अनुष्ठान कुंडली देखकर ही उचित है, ताकि बिना ज़रूरत का ख़र्च और चिंता न हो।
नौ ग्रहों की पूजा ज़रूरी है या एक ग्रह की भी हो सकती है?
कुंडली के अनुसार। कई बार केवल एक ग्रह के लिए उसका जप, दान और व्रत पर्याप्त होता है, और पूरी नवग्रह शांति की ज़रूरत नहीं पड़ती।
क्या साथ में रत्न पहनना ज़रूरी है?
नहीं। रत्न उपायों में सबसे आख़िर में आता है और बिना कुंडली दिखाए कभी नहीं पहनना चाहिए।
क्या यह पूजा दूर से हो सकती है?
हाँ। कुंडली देखकर ज़रूरत तय होने के बाद सालासर में आपके नाम और गोत्र से संकल्प लेकर पूजा हो सकती है, और उसका वीडियो WhatsApp पर भेजा जाता है।
यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।