- कब करवाते हैं
- परिवार में किसी के गंभीर रोग, सर्जरी या दुर्घटना के बाद स्वास्थ्य-लाभ के समय; जन्मदिन पर दीर्घायु की कामना से; और कुंडली देखकर पंडित जी की सलाह पर।
- अनुमानित समय
- जप-संख्या पर निर्भर: छोटा संकल्प (जैसे 11 माला) एक बैठक में; सवा लाख जप का अनुष्ठान कई पंडित मिलकर कुछ दिनों में पूरा करते हैं
- कहाँ
- सालासर में, आपके यहाँ, या ऑनलाइन संकल्प से
- दक्षिणा
- इच्छा अनुसार
महामृत्युंजय जप क्यों करवाते हैं
महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद का मंत्र है, जिसमें भगवान शिव को ‘त्र्यम्बक’, यानी तीन नेत्रों वाले, कहकर पूजा गया है। लोक-कथाओं में मार्कंडेय ऋषि की कथा आती है, जिन्होंने अल्पायु के भय के बीच शिव जी की भक्ति की और शिव जी की कृपा से अभय पाया। इसीलिए स्वास्थ्य संकट में यह मंत्र परिवारों का सबसे बड़ा सहारा बनता है।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ऋग्वेद 7.59.12
अर्थ:हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सबका पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ खरबूज़ा अपनी बेल से सहज ही अलग हो जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, पर अमृत (मोक्ष) से नहीं।
मंत्र का सुंदर भाव यह है कि मृत्यु से डरकर भागना नहीं, बल्कि पके फल की तरह सहज और निर्भय रहना। अनुष्ठान में जप की एक संख्या का संकल्प लिया जाता है, जैसे 11 हज़ार, 21 हज़ार, 51 हज़ार या सवा लाख। बड़ी संख्या का जप कई पंडित मिलकर कुछ दिनों में पूरा करते हैं, और अंत में जप के दसवें भाग के बराबर आहुतियों का हवन (दशांश हवन) किया जाता है।
कब ज़रूरत नहीं
महामृत्युंजय जप डॉक्टर के इलाज की जगह कभी नहीं ले सकता; इलाज, दवा और डॉक्टर की सलाह सबसे पहले। जप उसके साथ मन को धैर्य और परिवार को सहारा देता है। किसी ने डराकर बड़ा अनुष्ठान बताया हो, तो पहले शांति से पूछें; कई बार घर पर नियम से एक माला जप भी पर्याप्त होता है।
पूजा में क्या-क्या होता है
- संकल्प: किसके स्वास्थ्य के लिए (नाम और गोत्र), कितने जप और कितने दिनों में।
- गणेश पूजन, कलश स्थापना और शिवलिंग या शिव जी के चित्र का पूजन।
- पंडित जी द्वारा मंत्र का विनियोग और ध्यान।
- रुद्राक्ष की माला से मंत्र-जप; एक या अधिक पंडित, तय संख्या तक प्रतिदिन।
- संकल्प हो तो जप के दिनों में अखंड दीपक जलता रहता है।
- हर दिन के अंत में उस दिन का जप भगवान को समर्पित किया जाता है।
- अनुष्ठान पूरा होने पर जप का दशांश हवन होता है।
- पूर्णाहुति और शिव जी की आरती।
- क्षमा-प्रार्थना; अभिषेक का जल और प्रसाद श्रद्धा से परिवार को दिया जाता है।
सामग्री
परिवार की तैयारी
- रोगी स्वयं संकल्प में बैठ सकें तो अच्छा; न बैठ सकें, तो परिवार का कोई सदस्य उनके नाम से संकल्प लेता है।
- रोगी अस्पताल में हों, तब भी उनके नाम-गोत्र से संकल्प हो सकता है।
- अनुष्ठान के दिनों में परिवार सात्त्विक भोजन करे और घर में शांति रखे।
- दवा और डॉक्टर की सलाह समय पर, बिना चूके; जप का भरोसा इलाज छोड़ने का कारण कभी न बने।
- परिवार के लोग घर पर रोज़ एक माला जप कर सकते हैं।
सवाल-जवाब
रोगी अस्पताल में है, संकल्प कैसे होगा?
परिवार का कोई सदस्य रोगी के नाम और गोत्र से संकल्प ले सकता है, या सालासर में दूर से संकल्प लेकर जप हो सकता है। जप का वीडियो WhatsApp पर भेजा जाता है।
कितनी संख्या का जप करवाना चाहिए?
यह स्थिति पर निर्भर करता है; 11 माला से लेकर सवा लाख जप तक के संकल्प होते हैं। संख्या से बड़ा है भाव और नियम, इसलिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार संकल्प लें।
क्या हम घर पर स्वयं जप कर सकते हैं?
हाँ। रोज़ एक माला (108 बार) शुद्ध उच्चारण से, शांत मन से जप करें। उच्चारण के लिए वेबसाइट के महामंत्र पृष्ठ पर मंत्र और अर्थ दिया गया है।
क्या जप से बीमारी ठीक होने की गारंटी है?
नहीं, और कोई सच्चा पंडित ऐसी गारंटी नहीं देता। जप श्रद्धा और धैर्य का सहारा है; स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर का इलाज सबसे ज़रूरी है।
यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।