॥ संस्कार ॥

नामकरण संस्कार

शिशु का नामकरण: जन्म-नक्षत्र के अक्षर से नाम चुनकर, परिवार के बड़ों के आशीर्वाद के साथ बच्चे को उसका नाम देना।

समयलगभग 1 से 1.5 घंटे दक्षिणाइच्छा अनुसार
कब करवाते हैं
परंपरा में जन्म के 11वें या 12वें दिन, सूतक पूरा होने के बाद; या फिर किसी शुभ मुहूर्त में। कुछ परिवार 101वें दिन या पहले वर्ष के भीतर करते हैं।
अनुमानित समय
लगभग 1 से 1.5 घंटे
कहाँ
आपके यहाँ या सालासर में; परिवार की उपस्थिति ज़रूरी
दक्षिणा
इच्छा अनुसार

नामकरण संस्कार क्यों करवाते हैं

सोलह संस्कारों में नामकरण पाँचवाँ संस्कार है। नाम केवल पहचान नहीं, जीवन भर साथ चलने वाला आशीर्वाद है। इसीलिए परिवार सोच-समझकर, शुभ अक्षर से, ऐसा नाम चुनता है जिसका अर्थ सुंदर हो।

ज्योतिष में 27 नक्षत्र हैं, और हर नक्षत्र के चार चरणों के लिए अलग अक्षर बताए गए हैं; जैसे अश्विनी नक्षत्र के लिए चू, चे, चो और ला। शिशु के जन्म-समय के नक्षत्र-चरण से नाम का पहला अक्षर निकाला जाता है। कई परिवार इस अक्षर से ‘राशि नाम’ रखते हैं और पुकारने का नाम अपनी पसंद से अलग रखते हैं; यह भी पूरी तरह ठीक है।

नामकरण के दिन परिवार इकट्ठा होता है, बच्चे को आशीर्वाद देता है और भगवान से उसके स्वस्थ, लंबे और सार्थक जीवन की प्रार्थना करता है।

कब ज़रूरत नहीं

नाम के अक्षर को लेकर डरने की ज़रूरत नहीं; राशि-नाम परंपरा के लिए रखा जाता है, और पुकारने का नाम परिवार अपनी पसंद से रख सकता है। नाम बदलवाने से भाग्य बदल जाएगा, ऐसे दावों से सावधान रहें।

पूजा में क्या-क्या होता है

  1. जन्म के सही समय और स्थान से नक्षत्र-चरण देखकर नाम के शुभ अक्षर बताए जाते हैं।
  2. शिशु और माता को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।
  3. गणेश पूजन, कलश स्थापना और माता-पिता द्वारा संकल्प।
  4. कुलदेवता और नवग्रहों का स्मरण।
  5. कई परिवारों की रीति में काँसे या पीतल की थाली में चावल बिछाकर उस पर नाम लिखा जाता है।
  6. पिता या घर के कोई बड़े शिशु के दाहिने कान में धीरे से उसका नाम बोलते हैं।
  7. नाम की घोषणा होती है और बड़े बच्चे को आशीर्वाद देते हैं।
  8. संकल्प हो तो छोटा हवन।
  9. मिठाई और प्रसाद-वितरण।

सामग्री

  • पंडित जी पूरी सामग्री-सूची पहले भेज देते हैं; यह सामान्य सूची है
  • काँसे या पीतल की थाली
  • चावल, रोली, हल्दी और अक्षत
  • मौली
  • कलश, नारियल और आम के पत्ते
  • फूल और माला
  • धूप, दीप और कपूर
  • शिशु के नए वस्त्र
  • मिठाई और फल
  • हवन करना हो तो हवन कुंड और सामग्री

परिवार की तैयारी

  • जन्म का सही समय (घंटे और मिनट तक) और जन्म स्थान पहले भेजें।
  • माता और शिशु के आराम का ध्यान रखें; विधि छोटी और शांत रखी जा सकती है।
  • नवजात के पास भीड़ कम रखें और साफ़-सफ़ाई का विशेष ध्यान रखें।
  • शिशु के स्वास्थ्य के बारे में डॉक्टर की सलाह सबसे पहले मानें।

सवाल-जवाब

जन्म का सही समय कहाँ से मिलेगा?

अस्पताल के जन्म-रिकॉर्ड, डिस्चार्ज के कागज़ या जन्म प्रमाण-पत्र में जन्म का समय लिखा होता है। यही समय नक्षत्र देखने के लिए भेजें।

11वें या 12वें दिन नामकरण न हो पाए तो?

कोई चिंता नहीं। बाद में किसी शुभ मुहूर्त में नामकरण किया जा सकता है; कई परिवार 101वें दिन या पहले वर्ष के भीतर करते हैं।

राशि नाम और पुकारने का नाम अलग हो सकता है?

हाँ। बहुत-से परिवार नक्षत्र के अक्षर से राशि नाम रखते हैं, जो पूजा-संकल्प में काम आता है, और पुकारने का नाम अपनी पसंद से रखते हैं।

क्या नाम के अक्षर WhatsApp पर पूछ सकते हैं?

हाँ। जन्म तिथि, जन्म का समय और स्थान भेजिए; नक्षत्र और शुभ अक्षर WhatsApp पर बता दिए जाते हैं। संस्कार की विधि घर पर परिवार के साथ होती है।

यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।