॥ संस्कार ॥

मुंडन संस्कार

चूड़ाकर्म संस्कार: जन्म के बाद पहली बार बच्चे के बाल उतारना। स्वच्छता, स्वास्थ्य और आशीर्वाद का यह संस्कार शुभ मुहूर्त में किया जाता है।

समयलगभग 1 से 2 घंटे
पंडित जी से यह पूजा करवाएँWhatsApp पर संदेश, उत्तर 24 घंटे में
कब करवाते हैं
परंपरा में बच्चे के पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में (विषम वर्ष), शुभ मुहूर्त में। कई परिवार इसे अपने कुलदेवता या किसी सिद्ध धाम पर करवाते हैं; राजस्थान में इसे ‘जडूला’ भी कहा जाता है।
अनुमानित समय
लगभग 1 से 2 घंटे
कहाँ
आपके यहाँ या सालासर में; परिवार की उपस्थिति ज़रूरी

मुंडन संस्कार क्यों करवाते हैं

सोलह संस्कारों में चूड़ाकर्म, यानी मुंडन, आठवाँ संस्कार है। जन्म के समय के बाल उतारकर बच्चे के नए, स्वस्थ जीवन की शुरुआत मानी जाती है। स्वच्छता की दृष्टि से भी छोटे बच्चे के सिर को साफ़ रखना इसका एक व्यावहारिक भाव है।

मुंडन में कुल की रीति का बड़ा महत्व है: किस वर्ष, किस स्थान पर, शिखा (चोटी) छोड़नी है या नहीं, बाल कहाँ अर्पित करने हैं, और कौन क्या रस्म करेगा। इसलिए विधि से पहले घर के बड़ों से कुल की परंपरा पूछ लेना अच्छा रहता है। परिवार के सब लोग इकट्ठा होकर बच्चे को आशीर्वाद देते हैं, और कुलदेवता को धन्यवाद दिया जाता है।

अगर आप यह संस्कार सालासर आकर करवाना चाहें, तो पहले निवेदन भेज दें, ताकि मुहूर्त और समय पहले से तय हो सके और दर्शन के दिन भागदौड़ न हो।

कब ज़रूरत नहीं

बच्चा बीमार या कमज़ोर हो, तो मुंडन टाल दें; संस्कार बच्चे की सेहत से बड़ा नहीं है। बहुत छोटे बच्चे के सिर की त्वचा कोमल होती है, इसलिए साफ़ उस्तरा, अनुभवी हाथ और सावधानी ज़रूरी है।

पूजा में क्या-क्या होता है

  1. पंचांग से मुहूर्त निकलवाया जाता है।
  2. गणेश पूजन, कलश स्थापना और माता-पिता द्वारा संकल्प।
  3. कुलदेवता का स्मरण और पूजन।
  4. माँ बच्चे को गोद में लेकर बैठती हैं; परिवार की रीति अनुसार बच्चे के सिर पर हल्दी या दही-जल लगाया जाता है।
  5. कई परिवारों में पहले कुछ बाल रस्म के रूप में उतारे जाते हैं, और बुआ उन्हें अपने आँचल में लेती हैं।
  6. नाई सावधानी से मुंडन करते हैं; परिवार की रीति के अनुसार शिखा छोड़ी जाती है।
  7. सिर पर चंदन या हल्दी का हल्का लेप लगाया जाता है।
  8. उतरे बालों को आटे की लोई में रखकर, रीति के अनुसार नदी, तालाब या मंदिर में अर्पित किया जाता है।
  9. आरती, बड़ों का आशीर्वाद और प्रसाद-वितरण।

सामग्री

  • पंडित जी पूरी सामग्री-सूची पहले भेज देते हैं; यह सामान्य सूची है
  • कलश, नारियल और आम के पत्ते
  • हल्दी, चंदन और दही
  • रोली, अक्षत और मौली
  • गंगाजल
  • आटे की लोई (बाल रखने के लिए)
  • साफ़ कपड़ा या आँचल
  • बच्चे के नए वस्त्र
  • फूल और माला
  • धूप, दीप और कपूर
  • मिठाई और फल
  • नया या अच्छी तरह साफ़ किया हुआ उस्तरा (नाई का)

परिवार की तैयारी

  • कुल की रीति घर के बड़ों से पहले पूछ लें: वर्ष, स्थान, शिखा और बाल अर्पित करने की जगह।
  • बच्चे को भूखा न रखें; दोपहर की तेज़ गर्मी में विधि न रखें।
  • मुंडन के बाद बच्चे के सिर को धूप से बचाएँ और साफ़ रखें।
  • कोई कट या छाला हो जाए, तो घरेलू उपाय के बजाय डॉक्टर की सलाह लें।

सवाल-जवाब

मुंडन किस उम्र में करना चाहिए?

परंपरा में पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में, यानी विषम वर्ष में, मुंडन किया जाता है। आपके कुल की रीति जो हो, वही मानें।

क्या लड़कियों का भी मुंडन होता है?

कई परिवारों में लड़कियों का भी मुंडन होता है; यह कुल की रीति पर निर्भर करता है।

क्या शिखा (चोटी) छोड़ना ज़रूरी है?

यह भी कुल की परंपरा पर निर्भर है। कई परिवारों में शिखा छोड़ी जाती है, कई में नहीं।

क्या सालासर में मुंडन करवा सकते हैं?

हाँ, पहले निवेदन भेजिए ताकि मुहूर्त और समय तय हो जाए। मंगलवार, शनिवार और मेलों के दिनों में भीड़ बहुत होती है, इसलिए बच्चे की सुविधा देखकर दिन चुनें।

यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।