- कब करवाते हैं
- नए घर या फ़्लैट में रहना शुरू करने से पहले, नई दुकान या ऑफ़िस खोलने पर, बड़ी मरम्मत या बदलाव के बाद, या जब परिवार चाहे कि घर का वातावरण फिर से शांत और शुद्ध हो। दिन और समय पंचांग देखकर तय होता है।
- अनुमानित समय
- लगभग 2 से 3 घंटे (हवन सहित)
- कहाँ
- आपके यहाँ या सालासर में; परिवार की उपस्थिति ज़रूरी
वास्तु शांति पूजा क्यों करवाते हैं
वास्तु शास्त्र में हर भूमि और भवन के देवता ‘वास्तु पुरुष’ माने गए हैं, और आठों दिशाओं के अलग-अलग स्वामी (दिक्पाल) हैं: पूर्व के इंद्र, आग्नेय के अग्नि, दक्षिण के यम, नैऋत्य के निऋति, पश्चिम के वरुण, वायव्य के वायु, उत्तर के कुबेर और ईशान के ईश (शिव)। वास्तु शांति में इन सबका आदर से पूजन होता है।
पुराणों में कथा आती है कि ब्रह्मा जी ने वास्तु पुरुष को वरदान दिया था कि जो भी घर, मंदिर या भवन बनाएगा, वह उसमें रहने से पहले उनका पूजन करेगा। इसीलिए भूमि पूजन से लेकर गृह प्रवेश तक वास्तु पूजन की परंपरा है।
यह पूजा डर से नहीं, कृतज्ञता से की जाती है: जिस धरती और भवन में परिवार रहेगा, उसके प्रति धन्यवाद और सुख-शांति की प्रार्थना।
कब ज़रूरत नहीं
हर छोटी परेशानी को ‘वास्तु दोष’ मानकर पूजा या तोड़-फोड़ ज़रूरी नहीं। पहले सफ़ाई, रोशनी, हवा और सामान की व्यवस्था देखिए। पंडित जी घर का नक्शा देखकर बताएँगे कि पूजा की ज़रूरत है भी या नहीं।
पूजा में क्या-क्या होता है
- परिवार के नाम और पंचांग के अनुसार पूजा का दिन और समय तय होता है।
- पूजा से पहले पूरे घर की सफ़ाई होती है और गंगाजल छिड़का जाता है।
- संकल्प के साथ गणेश पूजन और कलश स्थापना होती है।
- नवग्रहों का पूजन होता है।
- चौकी पर वास्तु मंडल बनाकर वास्तु पुरुष और उनसे जुड़े देवताओं का पूजन होता है।
- आठों दिशाओं के स्वामियों (दिक्पालों) का पूजन होता है।
- वास्तु मंत्रों और नवग्रह मंत्रों से हवन किया जाता है।
- परंपरा अनुसार घर के कोनों और मुख्य द्वार पर जल, अक्षत या दीपक से दिशा-पूजन होता है।
- पूर्णाहुति, आरती और प्रसाद के साथ पूजा पूरी होती है।
सामग्री
परिवार की तैयारी
- पूजा के समय परिवार के सभी सदस्य घर में रहें।
- घर का मुख्य द्वार साफ़ रखें; तोरण और रंगोली लगा सकते हैं।
- उस दिन घर में सात्त्विक भोजन बनाएँ।
- पूजा के बाद कुछ दिन शाम को मुख्य द्वार और पूजा स्थान पर दीपक जलाएँ।
मंत्र
वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान्त्स्वावेशो अनमीवो भवा नः। यत्त्वेमहे प्रति तन्नो जुषस्व शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे॥
ऋग्वेद 7.54.1, ऋषि वसिष्ठ
अर्थ:हे वास्तु के स्वामी, हमें अपना जानिए। यह घर हमारे लिए सुख से प्रवेश करने योग्य और रोग-रहित हो। हम आपसे जो माँगते हैं, उसे स्वीकार कीजिए, और हमारे परिवार के लोगों तथा पशुओं के लिए कल्याणकारी होइए।
ॐ वास्तुपुरुषाय नमः॥
अर्थ:वास्तु पुरुष को नमस्कार। घर में दीपक जलाते समय या पूजा से पहले 11 बार श्रद्धा से बोल सकते हैं।
सवाल-जवाब
क्या किराए के घर या फ़्लैट में भी वास्तु शांति करवा सकते हैं?
हाँ। छोटे स्वरूप में गणेश पूजन, कलश, वास्तु पूजन और छोटा हवन किया जा सकता है। फ़्लैट में दिशाएँ बदलना संभव नहीं होता, इसलिए सामान की व्यवस्था और पूजा ही मुख्य उपाय है।
क्या वास्तु शांति हर साल करवानी चाहिए?
ज़रूरी नहीं। सामान्यतः भूमि पूजन, गृह प्रवेश या बड़े बदलाव के समय करवाई जाती है। रोज़ घर में साफ़-सफ़ाई और शाम को दीपक ही सबसे अच्छी वास्तु-सेवा है।
क्या वास्तु दोष के लिए घर तोड़ना पड़ता है?
अधिकतर मामलों में नहीं। सामान की जगह, रंग, रोशनी और पूजा से ही बात संभल जाती है। तोड़-फोड़ का डर दिखाकर बड़ा ख़र्च करवाने वालों से सावधान रहें।
यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।