- कब करवाते हैं
- हर पूर्णिमा; गृह प्रवेश, नया व्यापार, विवाह के बाद, जन्मदिन, संतान-जन्म, लंबी यात्रा से लौटने पर, या किसी भी शुभ अवसर और मनोकामना पूरी होने पर।
- अनुमानित समय
- लगभग 1.5 से 2 घंटे
- कहाँ
- सालासर में, आपके यहाँ, या ऑनलाइन संकल्प से
- दक्षिणा
- इच्छा अनुसार
सत्यनारायण कथा क्यों करवाते हैं
सत्यनारायण कथा का संदेश बहुत सीधा है: सच बोलिए, दिया हुआ वचन निभाइए, और भगवान के प्रसाद का आदर कीजिए। कथा के पाँच अध्यायों में निर्धन ब्राह्मण, लकड़हारा, साधु वैश्य और राजा तुंगध्वज जैसे पात्र हैं; जिसने सत्य और श्रद्धा रखी उसका जीवन सँवरा, और जिसने वचन तोड़ा या प्रसाद का अनादर किया उसे पछताना पड़ा।
परंपरा के अनुसार यह कथा स्कंद पुराण के रेवा खंड से जुड़ी है। इसकी सुंदरता यह है कि यह सरल है, घर पर परिवार के साथ हो जाती है, और इसमें बड़ा-छोटा सब बराबर भाग लेते हैं। प्रसाद ‘सवाया’ बनाया जाता है, यानी सवा के माप से, जैसे सवा किलो या सवा पाव।
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
परंपरागत विष्णु-ध्यान
अर्थ:जो शांत स्वरूप हैं, शेषनाग की शय्या पर विराजते हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो देवताओं के स्वामी और संसार के आधार हैं, आकाश जैसे व्यापक, बादल जैसे श्याम वर्ण और सुंदर अंगों वाले हैं, लक्ष्मी जी के पति, कमल-नयन, योगियों के ध्यान में आने वाले, संसार के भय को हरने वाले और सब लोकों के एकमात्र स्वामी हैं, उन भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।
पूरी कथा के पाँचों अध्याय इस वेबसाइट के ‘सत्यनारायण व्रत कथा’ पृष्ठ पर पढ़े जा सकते हैं, ताकि कथा सुनते समय आप साथ-साथ समझ सकें।
कब ज़रूरत नहीं
सत्यनारायण कथा किसी डर या दोष-निवारण के लिए ज़रूरी नहीं है; यह कृतज्ञता और सत्य के संकल्प की पूजा है। बड़ा आयोजन संभव न हो, तो पूर्णिमा को घर पर दीपक जलाकर परिवार के साथ कथा पढ़ लेना भी उतना ही सुंदर है।
पूजा में क्या-क्या होता है
- चौकी के चारों ओर केले के पत्तों या खंभों से छोटा मंडप सजाया जाता है और चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाया जाता है।
- कलश स्थापना होती है: जल, आम के पत्ते और नारियल के साथ।
- गणेश जी, गौरी, नवग्रह और वरुण देवता का संक्षिप्त पूजन होता है।
- यजमान नाम, गोत्र और कामना के साथ संकल्प लेते हैं।
- भगवान सत्यनारायण (शालिग्राम या चित्र) का पूजन होता है: पंचामृत से स्नान, चंदन, पीले फूल और तुलसी दल।
- कथा के पाँच अध्याय पढ़े जाते हैं; हर अध्याय के बाद शंख या घंटी बजाकर जयकारा होता है।
- संकल्प में हो तो छोटा हवन होता है।
- ‘जय लक्ष्मी रमणा’ आरती होती है।
- सवाया प्रसाद (पंजीरी या हलवा), केले, पंचामृत और तुलसी दल सबको बाँटा जाता है।
- कथा की सीख के अनुसार, प्रसाद हर आने वाले को आदर से दिया जाता है और कोई बिना प्रसाद लिए नहीं जाता।
सामग्री
परिवार की तैयारी
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; पीला रंग शुभ माना जाता है।
- कई परिवार दिन में उपवास रखकर कथा के बाद प्रसाद लेते हैं; यह स्वास्थ्य के अनुसार वैकल्पिक है।
- पूरा परिवार साथ बैठे; पड़ोसियों और रिश्तेदारों को भी बुलाया जा सकता है।
- कथा के बीच में उठकर न जाएँ और बातें न करें।
- प्रसाद पर्याप्त बनवाएँ, ताकि आने वाला हर व्यक्ति प्रसाद लेकर जाए।
मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
अर्थ:भगवान वासुदेव (विष्णु) को नमस्कार। कथा से पहले और बाद में इसका जप किया जा सकता है।
सवाल-जवाब
कथा सुबह करें या शाम को?
पूर्णिमा की शाम विशेष मानी जाती है, पर परिवार की सुविधा के अनुसार सुबह भी कथा की जा सकती है।
क्या उपवास रखना ज़रूरी है?
नहीं। उपवास श्रद्धा का हिस्सा है, शर्त नहीं। बुज़ुर्ग, बीमार, गर्भवती महिलाएँ और दवा लेने वाले लोग बिना उपवास के भी पूरे भाव से कथा सुन सकते हैं।
क्या कथा में हवन ज़रूरी है?
हवन संकल्प पर निर्भर करता है। साधारण कथा पूजन, कथा, आरती और प्रसाद से पूरी होती है; गृह प्रवेश जैसे अवसरों पर कई परिवार साथ में हवन भी करवाते हैं।
हम दूर हैं, क्या हमारे नाम से कथा हो सकती है?
हाँ। सालासर में आपके नाम और गोत्र से संकल्प लेकर कथा होती है और उसका वीडियो WhatsApp पर भेजा जाता है। उसी समय आप घर पर दीपक जलाकर कथा पढ़ें या सुनें।
यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।