- कब
- हर महीने शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि, पूर्णिमा को। कई पूर्णिमाएँ विशेष पर्व भी हैं, जैसे गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा। सालासर में चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती) और आश्विन पूर्णिमा पर विशाल मेले लगते हैं।
- पूजनीय
- भगवान श्री सत्यनारायण (श्री विष्णु) और चंद्रदेव
- संबंधित ग्रह
- चंद्र ग्रह
अगली तिथियाँ
- 24नवंबर कार्तिक पूर्णिमामंगलवार · देव दीपावली, गुरु नानक जयंती
- 23दिसंबर मार्गशीर्ष पूर्णिमाबुधवार · दत्तात्रेय जयंती
- 22जनवरी पौष पूर्णिमाशुक्रवार · शाकंभरी पूर्णिमा
- 20फ़रवरी माघ पूर्णिमाशनिवार · गुरु रविदास जयंती
- 22मार्च फाल्गुन पूर्णिमासोमवार · होली (धुलंडी) भी इसी दिन
- 20अप्रैल चैत्र पूर्णिमामंगलवार · हनुमान जयंती
- 20मई वैशाख पूर्णिमागुरुवार · बुद्ध पूर्णिमा
- 18जून ज्येष्ठ पूर्णिमाशुक्रवार · वट पूर्णिमा (महाराष्ट्र, गुजरात), कबीर जयंती
- 18जुलाई आषाढ़ पूर्णिमारविवार · गुरु पूर्णिमा
- 16अगस्त श्रावण पूर्णिमा व्रतसोमवार · रक्षा बंधन और पूर्णिमा स्नान-दान 17 अगस्त
- 15सितंबर भाद्रपद पूर्णिमाबुधवार · पूर्णिमा श्राद्ध
- 15अक्टूबर आश्विन पूर्णिमा व्रतशुक्रवार · शरद पूर्णिमा 14 अक्टूबर की रात
अगली तिथि के लिए पंडित जी से पूछें।
पूरा पंचांग देखेंपूर्णिमा व्रत और सत्यनारायण पूजा का महत्व
पूर्णिमा वह तिथि है जब चंद्रमा अपनी पूरी सोलह कलाओं के साथ आकाश में चमकता है। ज्योतिष में चंद्रमा मन के कारक हैं, इसलिए पूर्णिमा को मन की पूर्णता और शांति का दिन माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और भगवान विष्णु की पूजा का बहुत महत्व है।
पूर्णिमा पर सबसे प्रसिद्ध पूजा है भगवान सत्यनारायण की कथा। स्कंद पुराण की परंपरा में आने वाली यह कथा बताती है कि सत्य ही नारायण है। जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है और अपने वचन निभाता है, उसके घर में सुख-समृद्धि आती है।
घर में किसी शुभ काम की शुरुआत, गृह प्रवेश, नई नौकरी, विवाह, संतान-जन्म या किसी मनोकामना के पूरी होने पर भी सत्यनारायण कथा करवाने की परंपरा है। पूरा परिवार और पड़ोसी साथ बैठकर कथा सुनते हैं, इसलिए यह पूजा घर में प्रेम और एकता भी लाती है।
रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना पूर्णिमा व्रत का सुंदर अंग है। मान्यता है कि इससे मन शांत रहता है, नींद अच्छी आती है और घर में शीतलता बनी रहती है।
पूजा सामग्री
व्रत और पूजा की विधि
- पूर्णिमा की सुबह स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, नहीं तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें।
- हाथ में जल-अक्षत लेकर व्रत और सत्यनारायण पूजा का संकल्प लें।
- दिन भर फलाहार रखें या सामर्थ्य के अनुसार एक समय भोजन करें।
- शाम को या सुविधा के अनुसार किसी शुभ समय में पूजा की तैयारी करें। चौकी पर कपड़ा बिछाएँ और केले के पत्तों से छोटा-सा मंडप सजाएँ।
- कलश स्थापना करें। फिर गणेश जी और माता गौरी का पूजन करें और नवग्रहों का स्मरण करें।
- भगवान सत्यनारायण को पंचामृत से स्नान कराएँ, फिर शुद्ध जल से। चंदन, पीले फूल, तुलसी दल, वस्त्र और यज्ञोपवीत अर्पित करें।
- धूप-दीप जलाएँ और पंजीरी, केले, पंचामृत का भोग लगाएँ। हर भोग पर तुलसी दल रखें।
- परिवार के साथ बैठकर सत्यनारायण कथा के पाँचों अध्याय सुनें। हर अध्याय के अंत में शंख या घंटी बजाने की परंपरा है।
- “जय लक्ष्मी रमणा” से आरती करें।
- कथा का प्रसाद सबको बाँटें और स्वयं भी श्रद्धा से ग्रहण करें। कथा का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भगवान के प्रसाद का अनादर कभी न करें।
- रात को चंद्रोदय के बाद लोटे में जल और थोड़ा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें और चंद्र स्तुति बोलें।
- इसके बाद सात्त्विक भोजन से व्रत खोलें।
नियम: क्या करें, क्या न करें
क्या खाएँ
- फल, दूध, मेवे
- सत्यनारायण का प्रसाद (पंजीरी, पंचामृत, केला)
- अर्घ्य के बाद एक बार सात्त्विक भोजन
क्या न खाएँ
- प्याज़, लहसुन
- मांस, मदिरा और हर नशा
- तामसिक भोजन
अन्य नियम
- कथा के बीच में उठकर न जाएँ और बातचीत न करें।
- प्रसाद अवश्य ग्रहण करें और सबको श्रद्धा से बाँटें।
- इस दिन किए गए वचन और सत्य-पालन को सबसे बड़ी पूजा मानें।
- सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
मंत्र
ॐ श्री सत्यनारायणाय नमः
अर्थ:सत्य स्वरूप भगवान श्री नारायण को नमस्कार।
जप: पूजा में 108 बार, तुलसी की माला से
दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्। नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥
अर्थ:जो दही, शंख और बर्फ़ की तरह उजले हैं, जो क्षीरसागर से प्रकट हुए हैं और भगवान शिव के मुकुट के आभूषण हैं, उन चंद्रदेव को मैं नमस्कार करता हूँ।
जप: चंद्रमा को अर्घ्य देते समय 1 या 3 बार
सत्यनारायण कथा: संक्षेप में
नैमिषारण्य में ऋषियों ने सूत जी से पूछा कि कलियुग में मनुष्य सरल उपाय से दुखों से कैसे छूटे। सूत जी ने बताया कि यही प्रश्न एक बार नारद जी ने भगवान विष्णु से पूछा था, और भगवान ने सत्यनारायण व्रत का विधान बताया।
इस व्रत से काशी के एक निर्धन ब्राह्मण के दिन फिरे और एक लकड़हारे को सुख मिला। राजा उल्कामुख भी संतान-सुख की कामना से यही व्रत करते थे। साधु नाम का एक वैश्य बार-बार व्रत का वचन देकर भूल गया, तो उसे और उसके दामाद को कारागार तक जाना पड़ा। जब उसकी पत्नी लीलावती और बेटी कलावती ने श्रद्धा से व्रत किया, तब उनके कष्ट दूर हुए।
साधु ने भगवान से झूठ बोला कि उसकी नाव में केवल लता-पत्र हैं, तो उसका धन लता-पत्र बन गया। कलावती ने जल्दी में प्रसाद छोड़ा, तो उसके पति की नाव डूब गई। और राजा तुंगध्वज ने ग्वालों के दिए प्रसाद का अनादर किया, तो उसका सब कुछ छिन गया। हर बार भूल मानकर श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान ने सब लौटा दिया।
सत्यनारायण भगवान की पूरी कथा, पाँचों अध्यायों के साथ, विस्तार से अलग पृष्ठ पर दी गई है। पूजा के समय वही पूरी कथा पढ़ें या सुनें।
साल की प्रमुख पूर्णिमाएँ
- चैत्र पूर्णिमा: हनुमान जयंती। सालासर बालाजी धाम में इस दिन विशाल मेला लगता है।
- वैशाख पूर्णिमा: बुद्ध पूर्णिमा।
- ज्येष्ठ पूर्णिमा: पश्चिम भारत में वट पूर्णिमा का व्रत।
- आषाढ़ पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा, गुरुओं के सम्मान का दिन।
- श्रावण पूर्णिमा: रक्षाबंधन।
- भाद्रपद पूर्णिमा: पूर्णिमा श्राद्ध, इसी के बाद पितृ पक्ष शुरू होता है।
- आश्विन पूर्णिमा: शरद पूर्णिमा, जब चाँदनी में खीर रखने की परंपरा है। सालासर में इस दिन भी बड़ा मेला लगता है।
- कार्तिक पूर्णिमा: देव दीपावली, गुरु नानक जयंती और पवित्र स्नान का दिन।
- मार्गशीर्ष पूर्णिमा: दत्तात्रेय जयंती।
- पौष पूर्णिमा: शाकंभरी जयंती।
- माघ पूर्णिमा: माघी पूर्णिमा, स्नान-दान का विशेष दिन।
- फाल्गुन पूर्णिमा: होलिका दहन।
उद्यापन
जो लोग 12 पूर्णिमा या एक वर्ष तक पूर्णिमा व्रत का संकल्प लेते हैं, वे संकल्प पूरा होने पर अगली पूर्णिमा को उद्यापन करते हैं: सत्यनारायण पूजा, हवन, ब्राह्मण भोजन और सामर्थ्य के अनुसार दान। विधि के लिए पंडित जी से सलाह लें।
सावधानी
पूर्णिमा व्रत सरल है, फिर भी बीमार, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताएँ, बुज़ुर्ग और डायबिटीज़ या नियमित दवा वाले लोग फलाहार या एक समय भोजन के साथ व्रत करें और डॉक्टर की सलाह लें। डायबिटीज़ वाले लोग पंजीरी और पंचामृत थोड़ी मात्रा में ही लें। दवा कभी न छोड़ें।
पूजा के अंत में आरती
श्री सत्यनारायण जी की आरती, पूरे पाठ और PDF के साथ।
यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।