॥ वास्तु ॥

भूमि पूजन (शिलान्यास)

घर, दुकान या किसी भी निर्माण की नींव रखने से पहले धरती माता, वास्तु पुरुष और दिशाओं के देवताओं का पूजन, और नींव में शिला या कलश की स्थापना।

समयलगभग 1 से 2 घंटे दक्षिणाइच्छा अनुसार
कब करवाते हैं
प्लॉट पर निर्माण शुरू करने से पहले, नींव की खुदाई के समय, शुभ मुहूर्त में। पुराने भवन को गिराकर नया बनाना हो, तब भी।
अनुमानित समय
लगभग 1 से 2 घंटे
कहाँ
आपके यहाँ या सालासर में; परिवार की उपस्थिति ज़रूरी
दक्षिणा
इच्छा अनुसार

भूमि पूजन (शिलान्यास) क्यों करवाते हैं

हमारी परंपरा में धरती को माता माना गया है। निर्माण के लिए उसे खोदने से पहले उनसे क्षमा माँगी जाती है और प्रार्थना की जाती है कि यह भवन सुरक्षित, मज़बूत और रहने वालों के लिए मंगलमय हो।

भूमि पूजन में भूमि के देवता वास्तु पुरुष और दिशाओं के स्वामियों का पूजन होता है, और नींव में शिला या कलश की स्थापना की जाती है। इसे शिलान्यास भी कहते हैं।

कब ज़रूरत नहीं

भूमि पूजन के लिए बड़ा आयोजन ज़रूरी नहीं; परिवार और कारीगरों के साथ श्रद्धा से किया छोटा पूजन भी पूरा है।

पूजा में क्या-क्या होता है

  1. पंचांग देखकर भूमि पूजन का दिन और समय तय होता है।
  2. प्लॉट की सफ़ाई होती है और जहाँ पूजा होनी है वहाँ गंगाजल छिड़का जाता है।
  3. संकल्प के साथ गणेश पूजन और कलश स्थापना होती है।
  4. धरती माता का पूजन और क्षमा-प्रार्थना होती है।
  5. वास्तु पुरुष और आठों दिशाओं के स्वामियों का पूजन होता है।
  6. नींव की खुदाई की शुरुआत पूजा के साथ की जाती है; किस कोने से शुरू करें, यह पंडित जी स्थान देखकर बताते हैं।
  7. परिवार की परंपरा अनुसार नींव में कलश, शिला या पूजा-सामग्री की स्थापना होती है।
  8. नारियल फोड़कर, आरती और प्रसाद के साथ पूजा पूरी होती है; कारीगरों को भी प्रसाद दिया जाता है।

सामग्री

  • पंडित जी पूरी सामग्री-सूची पहले भेज देते हैं; यह सामान्य सूची है
  • कलश, नारियल और आम के पत्ते
  • नींव में रखने के लिए शिला या ईंटें (परिवार की परंपरा अनुसार)
  • गणेश जी की मूर्ति या सुपारी
  • रोली, हल्दी, अक्षत, मौली
  • गंगाजल
  • फूल, दूर्वा और माला
  • धूप, दीप और कपूर
  • मिठाई, फल और प्रसाद

परिवार की तैयारी

  • भूमि पूजन में घर के मुखिया और परिवार के सदस्य साथ रहें।
  • निर्माण करने वाले मिस्त्री और कारीगरों को भी पूजा में बुलाएँ।
  • प्लॉट का नक्शा और दिशा (उत्तर कहाँ है) पहले से पंडित जी को भेज दें।

मंत्र

वास्तु सूक्त का पहला मंत्र

वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान्त्स्वावेशो अनमीवो भवा नः। यत्त्वेमहे प्रति तन्नो जुषस्व शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे॥

ऋग्वेद 7.54.1, ऋषि वसिष्ठ

अर्थ:हे वास्तु के स्वामी, हमें अपना जानिए। यह घर हमारे लिए सुख से प्रवेश करने योग्य और रोग-रहित हो। हम आपसे जो माँगते हैं, उसे स्वीकार कीजिए, और हमारे परिवार के लोगों तथा पशुओं के लिए कल्याणकारी होइए।

सवाल-जवाब

प्लॉट ख़रीदते ही भूमि पूजन करें या निर्माण के समय?

भूमि पूजन निर्माण शुरू करने से पहले, नींव की खुदाई के समय किया जाता है। प्लॉट ख़रीदते समय चाहें तो छोटा पूजन कर सकते हैं।

छोटे निर्माण या एक कमरा बढ़वाने पर भी?

बड़ा आयोजन ज़रूरी नहीं। गणेश पूजन और धरती माता को प्रणाम करके काम शुरू करना काफ़ी है; चाहें तो पंडित जी से दिन पूछ लें।

यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।