॥ वास्तु ॥

गृह प्रवेश पूजा

नए घर में पहली बार प्रवेश से पहले वास्तु-पूजन, गणेश-लक्ष्मी पूजन, कलश और हवन, ताकि घर में सुख, शांति और अपनापन बसे।

समयलगभग 3 से 4 घंटे
पंडित जी से यह पूजा करवाएँWhatsApp पर संदेश, उत्तर 24 घंटे में
कब करवाते हैं
शुभ मुहूर्त में: नया घर या फ़्लैट, लंबे समय बाद पुराने घर में लौटना, या बड़ी मरम्मत के बाद। परंपरा में चातुर्मास और खरमास में गृह प्रवेश सामान्यतः नहीं किया जाता।
अनुमानित समय
लगभग 3 से 4 घंटे (हवन और कथा सहित)
कहाँ
आपके यहाँ या सालासर में; परिवार की उपस्थिति ज़रूरी

गृह प्रवेश पूजा क्यों करवाते हैं

शास्त्रों में गृह प्रवेश तीन तरह का बताया गया है: अपूर्व, जब पहली बार नए घर में प्रवेश हो; सपूर्व, जब लंबी यात्रा या लंबे समय बाद पुराने घर में लौटें; और द्वंद्व, जब बड़ी मरम्मत या किसी आपदा के बाद घर में फिर से रहना शुरू करें। तीनों में घर को फिर से पूजा से शुद्ध करके अपनाया जाता है।

मान्यता है कि हर भूमि और भवन के देवता ‘वास्तु पुरुष’ हैं। वास्तु-पूजन में उनसे और सब देवताओं से प्रार्थना की जाती है कि यह घर रहने वालों के लिए सुखद, स्वस्थ और शांत हो। पूजा के बाद ईंट-पत्थर का मकान परिवार का ‘घर’ बनता है।

वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान्त्स्वावेशो अनमीवो भवा नः। यत्त्वेमहे प्रति तन्नो जुषस्व शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे॥

ऋग्वेद 7.54.1

अर्थ:हे वास्तु के स्वामी, हमें अपना जानिए। यह घर हमारे लिए सुख से प्रवेश करने योग्य और रोग-रहित हो। हम आपसे जो माँगते हैं, उसे स्वीकार कीजिए, और हमारे परिवार के लोगों तथा पशुओं के लिए कल्याणकारी होइए।

कई परिवार गृह प्रवेश के दिन या उसके बाद सत्यनारायण कथा या सुंदरकांड का पाठ भी करवाते हैं, ताकि नए घर की शुरुआत कथा और भजन से हो।

कब ज़रूरत नहीं

गृह प्रवेश के लिए बहुत महँगे या बड़े आयोजन ज़रूरी नहीं हैं; श्रद्धा से किया गया छोटा पूजन भी पूरा है। वास्तु के नाम पर घर तोड़ने-फोड़ने या डर से अनावश्यक उपाय करवाने की ज़रूरत नहीं; पहले शांति से पूछें।

पंडित जी के साथ: एक झलक

गृह प्रवेश पूजननए घर में गृह प्रवेश और वास्तु देव का पूजन।1 जुलाई 2026 · Instagram पर देखें

पूजा में क्या-क्या होता है

  1. परिवार के नाम और पंचांग के अनुसार गृह प्रवेश का मुहूर्त निकलवाया जाता है।
  2. प्रवेश से पहले घर की पूरी सफ़ाई होती है; मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण, रंगोली और स्वस्तिक बनाया जाता है।
  3. मुख्य द्वार पर पूजन होता है। घर की महिला सिर पर जल से भरा कलश लेकर, और परिवार दाहिना पैर पहले रखकर, मंगल-ध्वनि के साथ प्रवेश करता है। कुछ परिवारों में गाय को पहले प्रवेश कराने की परंपरा भी है।
  4. पूजा स्थान पर गणेश पूजन, कलश स्थापना और संकल्प होता है।
  5. वास्तु पुरुष और नवग्रहों का पूजन होता है।
  6. वास्तु शांति और नवग्रह की आहुतियों के साथ हवन किया जाता है।
  7. रसोई में पहली बार दूध उबाला जाता है; दूध का उफनना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। फिर कुछ मीठा बनाकर भोग लगाया जाता है।
  8. घर के कोनों में गंगाजल छिड़का जाता है।
  9. संकल्प हो तो सत्यनारायण कथा या सुंदरकांड का पाठ होता है।
  10. आरती, प्रसाद और बड़ों के आशीर्वाद के साथ पूजा पूरी होती है।

सामग्री

  • पंडित जी पूरी सामग्री-सूची पहले भेज देते हैं; यह सामान्य सूची है
  • तांबे या मिट्टी का कलश, नारियल और आम के पत्ते
  • मुख्य द्वार के लिए तोरण और रंगोली
  • गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र
  • नवग्रह के लिए अनाज और चौकी
  • हवन कुंड, हवन सामग्री, घी और समिधा
  • रोली, अक्षत, हल्दी, मौली और जनेऊ
  • गंगाजल
  • दूध उबालने के लिए नया बर्तन और दूध
  • फूल और मालाएँ
  • धूप, दीप और कपूर
  • मिठाई, फल, पान और सुपारी

परिवार की तैयारी

  • मुहूर्त के समय तक पूजा की सारी तैयारी हो जाए; सामान की शिफ़्टिंग पूजा से पहले या बाद में आराम से करें।
  • परिवार के सभी सदस्य पूजा में साथ रहें।
  • पहले दिन घर में दीपक जलाएँ। परंपरा में माना जाता है कि गृह प्रवेश के दिन घर ख़ाली न छोड़ें।
  • उस दिन घर में सात्त्विक भोजन बनाएँ।
  • पड़ोसियों को प्रसाद देकर नए घर की शुरुआत मीठे संबंधों से करें।

मंत्र

गणेश वंदना

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ:हे टेढ़ी सूँड़ और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले गणेश जी, मेरे सभी कार्य सदा बिना विघ्न के पूरे कीजिए।

सवाल-जवाब

क्या किराए के घर में भी गृह प्रवेश पूजा करनी चाहिए?

करना अच्छा है, पर बड़ा आयोजन ज़रूरी नहीं। गणेश पूजन, कलश और छोटा हवन, या केवल सत्यनारायण कथा भी पर्याप्त है।

चातुर्मास या खरमास में गृह प्रवेश करना पड़े तो?

परंपरा में इन दिनों गृह प्रवेश सामान्यतः टाला जाता है। मजबूरी हो, जैसे किराए का घर बदलना, तो पंडित जी से पूछकर उचित दिन और सरल पूजा तय करें।

मरम्मत के बाद भी पूजा करनी चाहिए?

हाँ, बड़ी मरम्मत के बाद फिर से रहना शुरू करें तो इसे ‘द्वंद्व’ गृह प्रवेश कहते हैं; उसमें भी छोटी पूजा की जाती है।

दुकान या ऑफ़िस के लिए क्या करें?

नई दुकान या ऑफ़िस में भी शुभ मुहूर्त में गणेश-लक्ष्मी पूजन और कलश स्थापना की जाती है, जिसे व्यापार आरंभ पूजा कहते हैं।

यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।