॥ पाठ ॥

सुंदरकांड पाठ

गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरितमानस का पाँचवाँ कांड, जिसमें हनुमान जी का समुद्र लाँघना, सीता माता की खोज और लंका-दहन है। संकट के समय, नए काम की शुरुआत पर और मंगलवार-शनिवार को इसका पाठ विशेष माना जाता है।

समयलगभग 2 से 3 घंटे दक्षिणाइच्छा अनुसार ऑनलाइन संकल्पसंभव
कब करवाते हैं
मंगलवार और शनिवार विशेष; हनुमान जयंती, नए घर या नए काम की शुरुआत, परीक्षा या लंबी यात्रा से पहले, किसी चिंता के समय, और मनोकामना पूरी होने पर आभार के रूप में।
अनुमानित समय
लगभग 2 से 3 घंटे (संगीतमय पाठ में थोड़ा अधिक)
कहाँ
सालासर में, आपके यहाँ, या ऑनलाइन संकल्प से
दक्षिणा
इच्छा अनुसार

सुंदरकांड पाठ क्यों करवाते हैं

सुंदरकांड रामचरितमानस का वह भाग है जिसमें हनुमान जी अपनी शक्ति, बुद्धि और विनम्रता से वह काम पूरा करते हैं जो असंभव लगता था: समुद्र लाँघना, लंका में सीता माता को खोजना, उन्हें प्रभु श्रीराम की मुद्रिका देना, लंका को जलाना और लौटकर श्रीराम को समाचार सुनाना। इसीलिए इसे ‘सुंदर’ कहा गया है, क्योंकि इसमें भक्ति, साहस और सफलता तीनों एक साथ हैं।

मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ मन से भय और निराशा दूर करता है, और कठिन समय में धैर्य देता है। पाठ सुनते हुए परिवार के सब लोग हनुमान जी की तरह ‘राम काज’ में लगे रहने का भाव सीखते हैं, यानी अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा और विनम्रता से करना।

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

रामचरितमानस, सुंदरकांड (आरंभ का तीसरा श्लोक)

अर्थ:अतुलित बल के धाम, सोने के पर्वत जैसे तेजस्वी शरीर वाले, राक्षस-रूपी वन को जलाने वाली अग्नि, ज्ञानियों में सबसे आगे, सब गुणों के भंडार, वानरों के स्वामी और श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवनपुत्र हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूँ।

मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के दिन माने जाते हैं, इसलिए बहुत-से परिवार अपने संकल्प के पाठ के लिए यही दिन चुनते हैं।

कब ज़रूरत नहीं

सुंदरकांड किसी डर की वजह से करवाना ज़रूरी नहीं है, और यह किसी समस्या का ‘पक्का इलाज’ भी नहीं है। काम में मेहनत, बीमारी में डॉक्टर और विवाद में समझदारी की जगह कोई पाठ नहीं ले सकता; पाठ इन सबके साथ मन को बल देता है। घर पर नियम से स्वयं पाठ करना भी उतना ही सुंदर है।

पूजा में क्या-क्या होता है

  1. पाठ के स्थान को साफ़ करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाया जाता है और श्रीराम दरबार व हनुमान जी का चित्र या मूर्ति रखी जाती है।
  2. घी का दीपक जलाकर गणेश जी का स्मरण और पूजन होता है, ताकि पाठ बिना विघ्न के पूरा हो।
  3. यजमान हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपने नाम, गोत्र और कामना के साथ संकल्प लेते हैं।
  4. श्रीराम, सीता माता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी का आवाहन और पूजन होता है: रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप और नैवेद्य से।
  5. हनुमान जी को सिंदूर का तिलक या चोला, लाल फूल और गुड़-चने, बूंदी या लड्डू का भोग अर्पित किया जाता है।
  6. सुंदरकांड का पाठ आरंभ होता है: मंगलाचरण के श्लोकों से लेकर अंतिम दोहे तक, दोहे और चौपाइयाँ क्रम से। संगीतमय पाठ में ढोलक और मंजीरे के साथ गाया जाता है।
  7. परिवार के लोग चौपाइयाँ साथ-साथ दोहराते हैं या शांति से सुनते हैं।
  8. पाठ पूरा होने पर हनुमान चालीसा का पाठ होता है।
  9. हनुमान जी की आरती और श्रीराम की स्तुति के बाद क्षमा-प्रार्थना की जाती है।
  10. प्रसाद बाँटा जाता है और बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।

सामग्री

  • पंडित जी पूरी सामग्री-सूची पहले भेज देते हैं; यह सामान्य सूची है
  • चौकी और लाल कपड़ा
  • श्रीराम दरबार और हनुमान जी का चित्र या मूर्ति
  • रामचरितमानस या सुंदरकांड की पुस्तकें
  • घी, दीपक और रुई की बत्ती
  • धूप, अगरबत्ती और कपूर
  • रोली, अक्षत (साबुत चावल) और मौली
  • सिंदूर और चमेली का तेल (चोला चढ़ाना हो तो)
  • लाल फूल और माला
  • तुलसी दल
  • गुड़-चना, बूंदी या लड्डू का प्रसाद
  • पान, सुपारी, लौंग और इलायची
  • जल का लोटा और गंगाजल
  • सबके बैठने के लिए दरी या आसन

परिवार की तैयारी

  • पाठ से पहले स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; लाल या पीला रंग शुभ माना जाता है।
  • जो संकल्प लें, वे पूरे पाठ में बैठ सकें, इसका ध्यान रखें। बुज़ुर्गों के लिए कुर्सी या सहारा रख सकते हैं।
  • पाठ के दिन घर में सात्त्विक वातावरण रखें और मांस-मदिरा से दूर रहें।
  • फ़ोन साइलेंट रखें और बीच-बीच में उठकर न जाएँ।
  • प्रसाद पहले से तैयार रखें और पाठ के बाद परिवार व पड़ोसियों में बाँटें।

मंत्र

हनुमान जी का नाम मंत्र

ॐ हं हनुमते नमः

अर्थ:हनुमान जी को नमस्कार। पाठ से पहले और बाद में परिवार के सब लोग 11 बार जप सकते हैं।

सवाल-जवाब

सुंदरकांड में कितना समय लगता है?

सामान्य पाठ में लगभग 2 से 2.5 घंटे लगते हैं। संगीतमय पाठ, जिसमें ढोलक-मंजीरे के साथ गाया जाता है, उसमें 3 घंटे या थोड़ा अधिक भी लग सकता है।

क्या घर की महिलाएँ और बच्चे भी पाठ में बैठ सकते हैं?

हाँ, बिल्कुल। सुंदरकांड का पाठ और श्रवण पूरे परिवार के लिए है। बच्चे साथ बैठेंगे तो उन्हें हनुमान जी की कथा भी याद रहेगी।

मंगलवार या शनिवार के अलावा किसी और दिन करवा सकते हैं?

हाँ। मंगलवार और शनिवार विशेष माने जाते हैं, पर गृह प्रवेश, नया काम या कोई शुभ अवसर हो, तो सुविधा के दिन भी पाठ करवाया जा सकता है।

हम सालासर नहीं आ सकते, तो?

सालासर में आपके नाम और गोत्र से संकल्प लेकर पाठ करवाया जा सकता है, और उसका वीडियो आपको WhatsApp पर भेजा जाता है। उसी समय आप घर पर दीपक जलाकर हनुमान चालीसा पढ़ें।

यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।