॥ साप्ताहिक व्रत ॥ बुध देव और भगवान श्री गणेश

बुधवार व्रत

बुद्धि, वाणी, व्यापार और विद्या के लिए बुध देव और विघ्नहर्ता गणेश जी का व्रत। हरे रंग, दूर्वा और मूँग का विशेष महत्व।

कब
हर बुधवार। किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से आरंभ करना शुभ माना जाता है। संकल्प के अनुसार 7, 21 या 45 बुधवार तक व्रत रखा जाता है।
पूजनीय
बुध देव और भगवान श्री गणेश
संबंधित ग्रह
बुध ग्रह

बुधवार व्रत का महत्व

बुधवार बुध ग्रह का दिन है और इस दिन भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व है। गणेश जी बुद्धि के देवता और विघ्नहर्ता हैं, और बुध ग्रह बुद्धि, वाणी, गणित, लेखन, व्यापार और संवाद के कारक माने जाते हैं। इसलिए दोनों की उपासना एक ही दिन होती है।

यह व्रत विद्यार्थियों, व्यापारियों और ऐसे लोगों के लिए विशेष माना जाता है जिनका काम बोलने, लिखने या हिसाब-किताब से जुड़ा है। मान्यता है कि इससे पढ़ाई में मन लगता है, बोलने में आत्मविश्वास आता है, व्यापार में सही निर्णय होते हैं और रुके हुए कामों के विघ्न दूर होते हैं।

बुध ग्रह त्वचा और नसों से भी जोड़े जाते हैं, और परिवार में बहन, बेटी और बुआ से संबंधों के कारक भी माने जाते हैं। इसलिए इस व्रत में मधुर वाणी और घर की बेटियों के सम्मान को सबसे बड़ा नियम माना गया है।

हरा रंग बुध का प्रिय रंग है। इस दिन हरे वस्त्र पहनना, गणेश जी को हरी दूर्वा चढ़ाना और हरी मूँग का दान करना शुभ माना जाता है।

पूजा सामग्री

  • हरे वस्त्र या हरा आसन
  • 21 दूर्वा (दूब घास की गाँठें)
  • सिंदूर (गणेश जी के लिए)
  • लाल और पीले फूल
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • मोदक या बेसन/बूँदी के लड्डू
  • हरी मूँग (साबुत)
  • केले और हरे फल
  • पान का पत्ता और सुपारी
  • घी का दीपक, धूप, कपूर
  • जनेऊ
  • जल का लोटा

व्रत और पूजा की विधि

  1. सुबह स्नान करें और हो सके तो हरे या हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
  2. हाथ में जल-अक्षत लेकर बुधवार व्रत का संकल्प लें।
  3. पूजा-स्थान पर गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। जल छिड़ककर स्थान शुद्ध करें।
  4. गणेश जी को सिंदूर का तिलक करें, जनेऊ, लाल-पीले फूल और 21 दूर्वा अर्पित करें।
  5. बुध देव का ध्यान करें और ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ या बुध बीज मंत्र का जप करें।
  6. मोदक या लड्डू, केले और हरी मूँग का भोग लगाएँ। पान-सुपारी अर्पित करें।
  7. घी का दीपक और धूप जलाएँ।
  8. बुधवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  9. “जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा” से आरती करें।
  10. ‘ॐ गं गणपतये नमः’ की एक माला जप करें।
  11. दिन में एक बार सात्त्विक भोजन करें। मूँग से बना भोजन (जैसे मूँग की दाल या खिचड़ी) शुभ माना जाता है।
  12. हो सके तो किसी ज़रूरतमंद को हरी मूँग, हरी सब्ज़ी या हरा वस्त्र दान करें।

नियम: क्या करें, क्या न करें

क्या खाएँ

  • मूँग की दाल, खिचड़ी या मूँग का हलवा
  • हरी सब्ज़ियाँ, फल, दूध
  • दिन में एक बार सात्त्विक भोजन

क्या न खाएँ

  • प्याज़, लहसुन
  • मांस, मदिरा और हर नशा
  • बहुत तीखा और तला भोजन

अन्य नियम

  • झूठ और कटु वचन से बचें। बुध वाणी के देवता हैं, इसलिए इस दिन वाणी की मिठास सबसे बड़ा व्रत है।
  • घर की बहन, बेटी और बुआ का सम्मान करें, हो सके तो उन्हें कोई छोटा उपहार दें।
  • विद्यार्थी पढ़ाई शुरू करने से पहले गणेश जी को प्रणाम करें।
  • हिसाब-किताब और लेन-देन में ईमानदारी रखें।

मंत्र

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

अर्थ:‘गं’ बीजाक्षर सहित गणों के स्वामी श्री गणेश को नमस्कार।

जप: रोज़ 1 माला (108 बार)

माला / बोलकर जाप
गणेश वंदना

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ:हे टेढ़ी सूँड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले गणेश जी! मेरे सभी कामों को सदा बिना विघ्न के पूरा कीजिए।

जप: किसी भी काम या पढ़ाई के आरंभ में 1 बार

माला / बोलकर जाप
बुध बीज मंत्र

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

अर्थ:बीजाक्षरों सहित बुध देव को नमस्कार। यह बुध ग्रह की शांति का मंत्र है।

जप: रोज़ 1 माला; पूरा अनुष्ठान 9000 जप, पंडित जी के मार्गदर्शन में

माला / बोलकर जाप
व्रत-कथा

बुधवार व्रत कथा: ज़िद, बुध देव की लीला और क्षमा

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक धनी व्यक्ति रहता था। उसका विवाह दूसरे नगर की एक सुशील कन्या से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद वह अपनी पत्नी को लिवाने ससुराल गया। कुछ दिन आदर-सत्कार में बीते। फिर उसने सास-ससुर से कहा कि वह आज ही पत्नी को लेकर अपने घर लौटना चाहता है।

वह दिन बुधवार था। सास-ससुर ने प्रेम से समझाया, “बेटा, हमारे यहाँ बुधवार को बेटी की विदाई नहीं करते। एक दिन और रुक जाओ, कल सुबह शुभ समय में विदा करेंगे।” पर वह व्यक्ति अपनी बात पर अड़ गया। उसने किसी की नहीं सुनी और ज़िद करके उसी दिन पत्नी को लेकर बैलगाड़ी से चल पड़ा।

रास्ते में दोपहर हो गई और पत्नी को बहुत प्यास लगी। उसने पति से पानी माँगा। पति लोटा लेकर पास के गाँव में पानी लेने चला गया। जब वह पानी लेकर लौटा, तो उसकी आँखें फटी रह गईं। उसकी पत्नी के पास बिल्कुल उसी के जैसा, वैसे ही कपड़े पहने, वैसी ही आवाज़ वाला एक पुरुष बैठा था और पत्नी उसके हाथ से पानी पी रही थी।

वह गुस्से से बोला, “तुम कौन हो, जो मेरी पत्नी के पास बैठे हो?” दूसरा पुरुष शांति से बोला, “यह मेरी पत्नी है। मैं अभी-अभी इसे ससुराल से विदा कराकर ला रहा हूँ। तुम कौन हो?” दोनों में बहस होने लगी। बेचारी पत्नी भी हैरान थी। दोनों एक जैसे थे, वह पहचान ही नहीं पा रही थी कि उसका असली पति कौन है।

शोर सुनकर आस-पास के लोग जमा हो गए। तभी राजा के सिपाही भी आ पहुँचे। उन्होंने स्त्री से पूछा, “इन दोनों में तुम्हारा पति कौन है?” वह कुछ नहीं बता सकी। सिपाहियों ने सोचा कि पानी लेकर आया व्यक्ति ही झूठा है, और उसे पकड़कर कारागार में डालने की तैयारी करने लगे।

अब उस व्यक्ति का घमंड टूट गया। उसने हाथ जोड़कर मन ही मन भगवान से प्रार्थना की, “हे प्रभु, यह कैसी लीला है? मुझसे क्या भूल हुई?” तभी आकाशवाणी हुई, “मूर्ख! तूने बड़ों की बात नहीं मानी। सबके मना करने पर भी बुधवार के दिन ज़िद करके विदाई कराई। यह सब बुध देव की लीला है।”

यह सुनते ही उसे अपनी भूल समझ आ गई। उसने बुध देव से सच्चे मन से क्षमा माँगी और संकल्प लिया, “हे बुध देव, आगे से मैं बड़ों की बात का सम्मान करूँगा और नियम से आपका व्रत करूँगा।” उसी क्षण वह दूसरा पुरुष अंतर्धान हो गया। सब लोग चकित रह गए और सिपाहियों ने उसे छोड़ दिया।

पति-पत्नी सकुशल अपने घर पहुँचे। उस दिन से दोनों हर बुधवार श्रद्धा से व्रत करने लगे और बुध देव तथा गणेश जी की कृपा से उनका घर सुख-समृद्धि से भर गया। कथा आती है कि जो इस कथा को पढ़ता या सुनता है, उसकी यात्राएँ और काम निर्विघ्न पूरे होते हैं।

कथा का सार: ज़िद और अहंकार बुद्धि को ढक देते हैं, और बड़ों की सलाह का सम्मान बहुत से विघ्नों से बचा लेता है।

गणेश जी को दूर्वा क्यों प्रिय है

पुराणों में एक कथा आती है। अनलासुर नाम का एक दैत्य था, जिसके शरीर और आँखों से आग निकलती थी। वह जहाँ जाता, सब कुछ जला देता। देवता और ऋषि उससे बहुत परेशान हुए और गणेश जी की शरण में गए। गणेश जी ने विशाल रूप धारण करके उस दैत्य को निगल लिया।

पर दैत्य की आग से गणेश जी के पेट में भयंकर जलन होने लगी। देवताओं ने बहुत उपाय किए, पर जलन शांत नहीं हुई। तब ऋषि कश्यप ने 21 दूर्वा की गाँठें बनाकर गणेश जी को खिलाईं, और उनकी जलन तुरंत शांत हो गई। तभी से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है।

  • दूर्वा की गाँठें 21 या 11 की संख्या में चढ़ाई जाती हैं।
  • दूर्वा साफ़ जगह से तोड़ें और धोकर चढ़ाएँ।
  • दूर्वा गणेश जी के मस्तक या चरणों पर अर्पित की जाती है।
  • तुलसी गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती। यह भी पुरानी परंपरा है।

उद्यापन

संकल्प के बुधवार पूरे होने पर अगले बुधवार को उद्यापन करें। गणेश जी और बुध देव का विधिवत पूजन करें और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ या बुध मंत्र से हवन करवाएँ।

  • सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों या ज़रूरतमंदों को भोजन कराएँ।
  • हरे वस्त्र, हरी मूँग, कांसे का पात्र, पुस्तकें या कॉपी-पेन दान करें। विद्यार्थियों को पढ़ाई की सामग्री देना विशेष शुभ माना जाता है।
  • विधि के लिए पंडित जी से सलाह लें।

सावधानी

बच्चे और विद्यार्थी कठोर उपवास न करें। उनके लिए गणेश जी को दूर्वा चढ़ाना और एक माला जप ही पूरा व्रत है। बीमार, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताएँ, बुज़ुर्ग और डायबिटीज़ या नियमित दवा वाले लोग फलाहार या एक समय भोजन के साथ व्रत करें और डॉक्टर की सलाह लें। दवा कभी न छोड़ें।

पूजा के अंत में आरती

श्री गणेश जी की आरती, पूरे पाठ और PDF के साथ।

आरती पढ़ें

यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।