॥ तीर्थ दर्शन ॥

भगवान शिव के धाम

बारह ज्योतिर्लिंग, पंच केदार, पंचभूत स्थल, और कैलाश, अमरनाथ, पशुपतिनाथ जैसे शिव धाम।

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12 ज्योतिर्लिंग

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग

प्रभास पाटन (वेरावल के पास), अरब सागर तट, ज़िला गिर सोमनाथ, गुजरात

अरब सागर के तट पर प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ (सोम अर्थात चंद्रमा के नाथ) 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। इतिहास में मंदिर कई बार तोड़ा गया और फिर बनाया गया। सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर बने वर्तमान मंदिर में 1951 में प्राण प्रतिष्ठा हुई।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि; कार्तिक पूर्णिमा पर पाँच दिन का मेला।
कब जाएँ
मंदिर पूरे वर्ष खुला रहता है; अक्टूबर से फरवरी मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन सोमनाथ और वेरावल; नज़दीकी हवाई अड्डे दीव और पोरबंदर।
जानकारी के स्रोत

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (श्रीशैलम)

श्रीशैलम, नल्लमला पहाड़, कृष्णा नदी के पास, ज़िला नंद्याल, आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश के नल्लमला पहाड़ों में कृष्णा नदी के पास श्रीशैलम में स्थित। यहाँ एक ही परिसर में शिव मल्लिकार्जुन रूप में और माता पार्वती भ्रमरांबा रूप में पूजे जाते हैं। इसलिए यह स्थान ज्योतिर्लिंग के साथ शक्तिपीठ भी माना जाता है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि और उगादि (तेलुगु नववर्ष) पर विशेष उत्सव।
कब जाएँ
पूरे वर्ष दर्शन होते हैं; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
मरकापुर रोड रेलवे स्टेशन लगभग 85 किमी; हैदराबाद हवाई अड्डा लगभग 215 किमी।
जानकारी के स्रोत

श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

उज्जैन (प्राचीन अवंतिका), शिप्रा नदी के पास, मध्य प्रदेश

शिप्रा नदी के तट पर बसी उज्जैन (प्राचीन अवंतिका) नगरी का यह ज्योतिर्लिंग स्वयंभू माना जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकाल दक्षिणमुखी हैं। मंदिर के ऊपरी तल पर नागचंद्रेश्वर विराजते हैं, जिनके दर्शन वर्ष में केवल नाग पंचमी को होते हैं।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि, नाग पंचमी, और लगभग 12 वर्ष में सिंहस्थ कुंभ।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन शहर में ही; इंदौर हवाई अड्डा लगभग 55 किमी।
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श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

मांधाता (शिवपुरी) द्वीप, नर्मदा नदी, ज़िला खंडवा, मध्य प्रदेश

नर्मदा नदी के बीच मांधाता (शिवपुरी) द्वीप पर स्थित, जिसका आकार ॐ जैसा माना जाता है। नदी के दक्षिण तट पर ममलेश्वर (अमलेश्वर) मंदिर है। पुराणों के अनुसार ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में और पार्थिव लिंग ममलेश्वर में है, इसलिए श्रद्धालु दोनों के दर्शन करते हैं।

विशेष पर्व
हर सोमवार ओंकारेश्वर की पालकी निकलती है, सावन में विशेष धूम; महाशिवरात्रि।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना, सावन में भारी भीड़।
कैसे पहुँचें
ओंकारेश्वर रोड (मोरटक्का) स्टेशन लगभग 12 किमी, खंडवा जंक्शन लगभग 70 किमी; इंदौर हवाई अड्डा लगभग 77 किमी।

मान्यताओं में अंतर: स्तोत्र में 'ओङ्कारममलेश्वरम्' आता है, इसलिए ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को मिलाकर एक ही ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

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श्री बैद्यनाथ धाम (वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग)

देवघर, झारखंड

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, जहाँ मुख्य मंदिर के साथ 21 अन्य मंदिर हैं। कथा है कि रावण शिवलिंग को लंका ले जा रहा था, पर वह यहीं स्थापित हो गया और रावण उसे उठा न सका।

विशेष पर्व
सावन का श्रावणी मेला, जिसमें श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर चढ़ाते हैं; महाशिवरात्रि।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; सावन में बहुत भारी भीड़, अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
बैद्यनाथ धाम स्टेशन शहर में, जसीडीह जंक्शन लगभग 7 किमी; देवघर हवाई अड्डा लगभग 12 किमी।

मान्यताओं में अंतर: स्तोत्र में 'परल्यां वैद्यनाथं च' आता है, इसलिए महाराष्ट्र के बीड जिले का परली वैजनाथ मंदिर भी यह दावा करता है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का बैजनाथ मंदिर भी वैद्यनाथ माना जाता है। अधिकतर राष्ट्रीय सूचियों में देवघर का नाम है।

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श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

भीमाशंकर गाँव, खेड़ तालुका, सह्याद्रि पर्वत, ज़िला पुणे, महाराष्ट्र

पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वतमाला के जंगलों के बीच स्थित, जहाँ से भीमा नदी निकलती है। कथा है कि शिव ने यहाँ त्रिपुरासुर का वध किया और देवताओं के अनुरोध पर भीमशंकर रूप में बस गए। आसपास भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि।
कब जाएँ
पूरे वर्ष दर्शन; अक्टूबर से फरवरी मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे में; मंदिर पुणे से लगभग 110 किमी।

मान्यताओं में अंतर: स्तोत्र में 'डाकिन्यां भीमशङ्करम्' आता है और डाकिनी क्षेत्र की पहचान पर मतभेद है। असम में गुवाहाटी के पास (कामरूप) और ओडिशा के रायगड़ा जिले के भीमपुर का मंदिर भी यह दावा करते हैं। अधिकतर सूचियों में पुणे जिले का भीमाशंकर ही माना जाता है।

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श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (रामनाथस्वामी मंदिर)

रामेश्वरम द्वीप, ज़िला रामनाथपुरम, तमिलनाडु

रामेश्वरम द्वीप पर स्थित रामनाथस्वामी मंदिर। कथा है कि लंका विजय के बाद श्रीराम ने यहाँ शिव पूजा की; सीता जी के बनाए रेत के रामलिंग की मुख्य पूजा होती है और हनुमान जी द्वारा कैलाश से लाए विश्वलिंग की पूजा पहले होती है। लंबे गलियारे और 22 तीर्थ कुंड प्रसिद्ध हैं और यह चार धामों में भी एक है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि; 22 तीर्थ कुंडों में स्नान की परंपरा।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च मौसम सबसे सुहाना।
कैसे पहुँचें
रामेश्वरम रेलवे स्टेशन लगभग 1 किमी; मदुरै हवाई अड्डा लगभग 179 किमी।
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श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

द्वारका और बेट द्वारका के मार्ग पर, सौराष्ट्र तट, ज़िला देवभूमि द्वारका, गुजरात

गुजरात के सौराष्ट्र तट पर द्वारका और बेट द्वारका के मार्ग पर स्थित। शिवलिंग भूमिगत गर्भगृह में है और परिसर में शिव की लगभग 25 मीटर ऊँची बैठी हुई प्रतिमा है। स्तोत्र में इसे 'दारुकावन' का नागेश कहा गया है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि और सावन मास।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
द्वारका रेलवे स्टेशन से लगभग 16 किमी; नज़दीकी हवाई अड्डे जामनगर और पोरबंदर।

मान्यताओं में अंतर: दारुकावन की पहचान पर मतभेद है। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले का औंढा नागनाथ और उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का जागेश्वर धाम भी नागेश ज्योतिर्लिंग होने का दावा करते हैं। अधिकतर सूचियों में द्वारका का नागेश्वर माना जाता है।

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श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

वाराणसी (काशी), गंगा तट के पास, उत्तर प्रदेश

गंगा किनारे बसी काशी (वाराणसी) का यह ज्योतिर्लिंग सबसे पवित्र शिव धामों में गिना जाता है। वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार 1780 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया। नया काशी विश्वनाथ धाम गलियारा मंदिर को गंगा घाटों से जोड़ता है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि और सावन मास में विशेष भीड़।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
वाराणसी जंक्शन लगभग 6 किमी, वाराणसी सिटी स्टेशन लगभग 2 किमी; बाबतपुर हवाई अड्डा शहर से लगभग 22 किमी।
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श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

त्र्यंबक, ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी, ज़िला नासिक, महाराष्ट्र

नासिक जिले में ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी पर स्थित, जिसके पास गोदावरी नदी का उद्गम माना जाता है। यहाँ के ज्योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तीन मुख हैं। वर्तमान मंदिर पेशवा बालाजी बाजीराव (नानासाहेब) ने बनवाया था।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि; सिंहस्थ कुंभ (लगभग 12 वर्ष में); नारायण नागबलि और कालसर्प शांति जैसी विधियाँ।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
नासिक रोड रेलवे स्टेशन लगभग 39 किमी; नासिक शहर से लगभग 30 किमी। नज़दीकी हवाई अड्डा नासिक (ओझर)।
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श्री केदारनाथ धाम

केदारनाथ, मंदाकिनी नदी के पास, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड

मंदाकिनी नदी के पास लगभग 3,583 मीटर ऊँचाई पर स्थित केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में एक और पंच केदार में प्रथम है। यह उत्तराखंड की छोटा चार धाम यात्रा का भी भाग है। मान्यता है कि मंदिर का निर्माण पांडवों से जुड़ा है।

विशेष पर्व
कपाट खुलने और भाई दूज पर कपाट बंद होने के अवसर; सर्दियों में पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में।
कब जाएँ
कपाट अप्रैल/मई में खुलते हैं और भाई दूज (अक्टूबर/नवंबर) पर बंद होते हैं।
कैसे पहुँचें
ऋषिकेश से लगभग 223 किमी; सड़क गौरीकुंड तक, फिर लगभग 16 किमी पैदल। नज़दीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून)।

ध्यान दें: लगभग 3,583 मीटर ऊँचाई, ठंड और कठिन चढ़ाई। उत्तराखंड चार धाम यात्रा के लिए सरकारी पंजीकरण अनिवार्य है।

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श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

वेरूल गाँव, एलोरा गुफाओं के पास, ज़िला छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र

एलोरा गुफाओं से लगभग 1.5 किमी दूर वेरूल गाँव में स्थित, स्तोत्र के क्रम में बारहवाँ ज्योतिर्लिंग। कथा है कि शिवभक्त घुश्मा की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव यहाँ घुश्मेश्वर रूप में बसे। वर्तमान मंदिर 18वीं सदी में होल्कर राजघराने के समय बना।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) शहर लगभग 30 किमी; वहीं रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा।

मान्यताओं में अंतर: राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के शिवाड़ गाँव का घुश्मेश्वर मंदिर भी बारहवाँ ज्योतिर्लिंग होने का दावा करता है। अधिकतर सूचियों में वेरूल का घृष्णेश्वर माना जाता है।

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पंच केदार

श्री मध्यमहेश्वर (मदमहेश्वर) मंदिर

गौंडार गाँव के ऊपर, रांसी से पैदल मार्ग, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड

रुद्रप्रयाग जिले में गौंडार गाँव के ऊपर लगभग 3,497 मीटर ऊँचाई पर स्थित द्वितीय केदार, जिसे मदमहेश्वर भी कहते हैं। कथा है कि यहाँ शिव की नाभि (मध्य भाग) प्रकट हुई, इसलिए नाम मध्यमहेश्वर पड़ा।

विशेष पर्व
कपाट खुलने पर ऊखीमठ से डोली यात्रा।
कब जाएँ
कपाट प्रायः मई में खुलते हैं और अक्टूबर/नवंबर में बंद होते हैं।
कैसे पहुँचें
रांसी से लगभग 16-18 किमी पैदल। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन लगभग 227 किमी; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा लगभग 244 किमी।

ध्यान दें: लंबी पैदल चढ़ाई। सर्दियों में पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।

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श्री तुंगनाथ मंदिर

चोपता के ऊपर, चंद्रशिला चोटी के नीचे, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड

लगभग 3,680 मीटर ऊँचाई पर स्थित तुंगनाथ विश्व के सबसे ऊँचे शिव मंदिरों में गिना जाता है और पंच केदार में सबसे ऊँचा है। कथा है कि यहाँ शिव की भुजाएँ प्रकट हुईं। मंदिर से लगभग 2 किमी ऊपर चंद्रशिला चोटी है।

विशेष पर्व
कपाट खुलने और बंद होने के समय डोली यात्रा।
कब जाएँ
कपाट प्रायः अप्रैल/मई में खुलते हैं और अक्टूबर/नवंबर में बंद होते हैं।
कैसे पहुँचें
चोपता से लगभग 5 किमी पैदल। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन लगभग 240 किमी; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (देहरादून)।

ध्यान दें: अधिक ऊँचाई पर ठंड रहती है। सर्दियों में कपाट बंद रहते हैं और पूजा मक्कूमठ में होती है।

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श्री रुद्रनाथ मंदिर

गोपेश्वर के पास, सगर गाँव से पैदल मार्ग, ज़िला चमोली, उत्तराखंड

चमोली जिले में लगभग 3,600 मीटर ऊँचाई पर स्थित चतुर्थ केदार। कथा है कि यहाँ शिव का मुख प्रकट हुआ, इसलिए उनके एकानन (मुख) रूप की पूजा होती है। मंदिर के सामने से नंदा देवी और त्रिशूल पर्वत दिखते हैं।

विशेष पर्व
श्रावण पूर्णिमा (प्रायः रक्षाबंधन) पर वार्षिक मेला।
कब जाएँ
कपाट प्रायः मई में खुलते हैं और अक्टूबर के मध्य में बंद होते हैं।
कैसे पहुँचें
सगर गाँव से लगभग 20 किमी पैदल। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से गोपेश्वर लगभग 241 किमी; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा लगभग 258 किमी।

ध्यान दें: पंच केदार की सबसे कठिन चढ़ाइयों में गिनी जाती है। सर्दियों में पूजा गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में होती है।

जानकारी के स्रोत

श्री कल्पेश्वर मंदिर

उर्गम घाटी, ज़िला चमोली, उत्तराखंड

चमोली जिले की उर्गम घाटी में लगभग 2,200 मीटर ऊँचाई पर स्थित पंचम केदार। कथा है कि यहाँ शिव की जटा प्रकट हुई; गुफा जैसे मार्ग के भीतर जटा रूप की पूजा होती है। मान्यता है कि ऋषि दुर्वासा ने यहाँ तप किया था।

विशेष पर्व
पंच केदार में अकेला मंदिर जो पूरे वर्ष खुला रहता है।
कब जाएँ
पूरे वर्ष खुला; बरसात में सड़क बाधित हो सकती है।
कैसे पहुँचें
बद्रीनाथ मार्ग पर हेलंग से उर्गम घाटी; अब सड़क देवग्राम तक, आगे थोड़ा पैदल। ऋषिकेश स्टेशन लगभग 255 किमी।
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पंचभूत स्थल

श्री एकाम्बरेश्वर मंदिर

कांचीपुरम, तमिलनाडु

कांचीपुरम का विशाल शिव मंदिर, जहाँ शिव पृथ्वी तत्व के प्रतीक पृथ्वी लिंग रूप में पूजे जाते हैं। कथा है कि माता पार्वती ने यहाँ आम के पेड़ के नीचे रेत का शिवलिंग बनाकर पूजा की थी। मंदिर का प्राचीन आम का वृक्ष और लगभग 59 मीटर ऊँचा गोपुरम प्रसिद्ध हैं।

विशेष पर्व
पंगुनी ब्रह्मोत्सव (मार्च-अप्रैल), जिसमें शिव-पार्वती विवाह का उत्सव मनाया जाता है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
कांचीपुरम रेलवे स्टेशन; नज़दीकी हवाई अड्डा चेन्नई।
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श्री जम्बुकेश्वर मंदिर (तिरुवनैकावल)

तिरुवनैकावल, श्रीरंगम द्वीप (तिरुचिरापल्ली), तमिलनाडु

तिरुचिरापल्ली में कावेरी तट के श्रीरंगम द्वीप पर स्थित, जहाँ शिव जल तत्व के प्रतीक अप्पु लिंग रूप में पूजे जाते हैं। गर्भगृह में भूमिगत जल-स्रोत से शिवलिंग के पास पानी रिसता रहता है। माता पार्वती यहाँ अखिलांडेश्वरी रूप में पूजी जाती हैं।

विशेष पर्व
पंगुनी ब्रह्मोत्सव (मार्च-अप्रैल) और आडि पूरम (जुलाई-अगस्त)।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
श्रीरंगम स्टेशन लगभग 2.5 किमी, तिरुचिरापल्ली जंक्शन लगभग 11 किमी; नज़दीकी हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
जानकारी के स्रोत

श्री अरुणाचलेश्वर मंदिर

तिरुवन्नामलाई, अरुणाचल पर्वत की तलहटी, तमिलनाडु

तिरुवन्नामलाई में अरुणाचल पर्वत की तलहटी पर स्थित, जहाँ शिव अग्नि तत्व के प्रतीक अग्नि लिंग रूप में पूजे जाते हैं। पुराणों के अनुसार शिव यहाँ ब्रह्मा और विष्णु के सामने अग्नि-स्तंभ रूप में प्रकट हुए थे। श्रद्धालु पूरे पर्वत को शिव का स्वरूप मानते हैं।

विशेष पर्व
कार्तिगै दीपम (नवंबर-दिसंबर) पर पर्वत की चोटी पर विशाल दीप; हर पूर्णिमा को लगभग 14 किमी गिरिवलम।
कब जाएँ
नवंबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
तिरुवन्नामलाई रेलवे स्टेशन लगभग 2 किमी; चेन्नई हवाई अड्डा लगभग 180 किमी।
जानकारी के स्रोत

श्री कालहस्तीश्वर मंदिर

श्रीकालहस्ती, स्वर्णमुखी नदी के तट पर, ज़िला तिरुपति, आंध्र प्रदेश

स्वर्णमुखी नदी के तट पर स्थित, जहाँ शिव वायु तत्व के प्रतीक वायु लिंग रूप में पूजे जाते हैं। कथा है कि मकड़ी, सर्प और हाथी ने यहाँ शिव पूजा कर मुक्ति पाई, और भक्त कन्नप्पा ने यहीं अपनी आँखें अर्पित करनी चाहीं। मंदिर राहु-केतु पूजा के लिए प्रसिद्ध है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि पर 13 दिन का ब्रह्मोत्सव; ग्रहण के समय भी मंदिर खुला रहता है।
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी मौसम अपेक्षाकृत ठंडा; मार्च से जून बहुत गर्मी पड़ती है।
कैसे पहुँचें
श्रीकालहस्ती रेलवे स्टेशन लगभग 3 किमी; नज़दीकी हवाई अड्डा तिरुपति, तिरुपति शहर लगभग 36 किमी।
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श्री नटराज मंदिर, चिदंबरम

चिदंबरम, ज़िला कडलूर, तमिलनाडु

चिदंबरम के इस मंदिर में शिव आनंद तांडव करते नटराज रूप में पूजे जाते हैं और यह आकाश तत्व का स्थल है। गर्भगृह का 'चिदंबर रहस्य' एक खाली स्थान है, जो निराकार शिव का प्रतीक माना जाता है। परिसर में भगवान विष्णु (गोविंदराज) का मंदिर भी है।

विशेष पर्व
दिसंबर-जनवरी में आरुद्रा दर्शन, जून-जुलाई में आनी तिरुमंजनम, और महाशिवरात्रि पर नाट्यांजलि उत्सव।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
चिदंबरम रेलवे स्टेशन; पुडुचेरी हवाई अड्डा लगभग 60-66 किमी, चेन्नई लगभग 215 किमी।
जानकारी के स्रोत

राजस्थान में

हर्षनाथ मंदिर, हर्ष पर्वत

हर्ष पर्वत, हर्ष गाँव, ज़िला सीकर, राजस्थान

सीकर के पास अरावली के हर्ष पर्वत पर भगवान शिव के ‘हर्षनाथ’ रूप का 10वीं सदी का मंदिर है, जिसका शिलालेख 973 ई. का है। पुराना मंदिर अब खंडहर है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का संरक्षित स्मारक है। उसके पास 1718 में बना शिव मंदिर है, जहाँ आज भी पूजा होती है।

विशेष पर्व
पर्वत पर हर्ष भैरव का स्थान भी है, जहाँ भक्त दर्शन करते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च; गर्मियों में पहाड़ी पर धूप बहुत तेज़ होती है।
कैसे पहुँचें
सीकर से लगभग 14 किमी, पहाड़ी की चोटी पर। नज़दीकी रेलवे स्टेशन सीकर, हवाई अड्डा जयपुर।

ध्यान दें: पुराना मंदिर संरक्षित स्मारक है; अवशेषों और मूर्तियों को नुकसान न पहुँचाएँ।

जानकारी के स्रोत

श्री एकलिंगजी मंदिर

कैलाशपुरी, नागदा के पास, ज़िला उदयपुर, राजस्थान

कैलाशपुरी में भगवान शिव ‘एकलिंगजी’ के रूप में पूजे जाते हैं, जिन्हें मेवाड़ का कुलदेवता माना जाता है; मेवाड़ के महाराणा स्वयं को उनका दीवान मानते आए हैं। परंपरा के अनुसार पहला मंदिर 8वीं सदी में बप्पा रावल ने बनवाया, और बाद में महाराणा कुंभा और रायमल ने इसका पुनर्निर्माण कराया।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि और एकलिंगजी पाटोत्सव पर विशेष उत्सव होते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
उदयपुर के पास (गिर्वा तहसील)। नज़दीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा उदयपुर।
जानकारी के स्रोत

अन्य प्रसिद्ध धाम

श्री अमरनाथ गुफा

दक्षिण कश्मीर का हिमालय, पहलगाम और बालटाल से आगे, ज़िला अनंतनाग, जम्मू और कश्मीर

दक्षिण कश्मीर के हिमालय में लगभग 3,880 मीटर ऊँचाई पर स्थित पवित्र गुफा, जहाँ बर्फ से प्राकृतिक रूप से बनने वाले शिवलिंग (बाबा बर्फानी) के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि यहीं भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई थी।

विशेष पर्व
वार्षिक अमरनाथ यात्रा, जिसका समापन श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) पर होता है।
कब जाएँ
यात्रा गर्मियों में, लगभग जुलाई से अगस्त; तिथियाँ हर वर्ष श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड घोषित करता है।
कैसे पहुँचें
पहलगाम (नुनवान) से लगभग 48 किमी या बालटाल से लगभग 14 किमी पैदल। नज़दीकी हवाई अड्डा श्रीनगर; बड़ा रेलवे स्टेशन जम्मू।

ध्यान दें: पंजीकरण (यात्रा परमिट) और अधिकृत डॉक्टर का अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र ज़रूरी। अभी आयु सीमा 13 से 70 वर्ष है।

जानकारी के स्रोत

कैलाश पर्वत और मानसरोवर

कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील, पश्चिमी तिब्बत, ज़िला न्गारी प्रांत (बुरांग काउंटी), चीन (तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र)

तिब्बत (चीन) में स्थित कैलाश पर्वत को भगवान शिव और माता पार्वती का निवास माना जाता है; पास ही पवित्र मानसरोवर झील है। पर्वत पर चढ़ाई वर्जित है, श्रद्धालु उसकी परिक्रमा करते हैं। जैन, बौद्ध और बोन परंपराओं में भी यह पर्वत पवित्र है।

विशेष पर्व
कैलाश परिक्रमा (लगभग 53 किमी, प्रायः तीन दिन) और मानसरोवर में स्नान।
कब जाएँ
भारत सरकार की यात्रा प्रायः जून से अगस्त/सितंबर के बीच होती है।
कैसे पहुँचें
विदेश मंत्रालय की यात्रा लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) या नाथू ला (सिक्किम) से; कुछ यात्री नेपाल होकर निजी संचालकों के साथ जाते हैं।

ध्यान दें: वैध भारतीय पासपोर्ट ज़रूरी; सरकारी यात्रा में चयन कंप्यूटर ड्रॉ से। नेपाल मार्ग में चीनी वीज़ा और तिब्बत परमिट पहले से लें।

जानकारी के स्रोत

श्री पशुपतिनाथ मंदिर

काठमांडू, बागमती नदी के तट पर, नेपाल

नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के तट पर स्थित यह मंदिर भगवान शिव के पशुपति रूप को समर्पित है, जहाँ चारों दिशाओं में मुख वाला शिवलिंग है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर 'काठमांडू घाटी' का भाग है। कुछ कथाओं के अनुसार पंच केदार वाले बैल रूप शिव का सिर यहाँ प्रकट हुआ।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि पर विशाल मेला; तीज पर्व भी धूमधाम से मनाया जाता है।
कब जाएँ
पूरे वर्ष दर्शन होते हैं; महाशिवरात्रि पर बहुत भारी भीड़।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी हवाई अड्डा काठमांडू का त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा; भारत से सड़क मार्ग से भी काठमांडू पहुँचा जाता है।

ध्यान दें: भारतीयों को नेपाल के लिए वीज़ा नहीं चाहिए; पासपोर्ट या चुनाव आयोग का मतदाता पहचान पत्र साथ रखें।

जानकारी के स्रोत

श्री लिंगराज मंदिर

पुराना भुवनेश्वर (एकाम्र क्षेत्र), बिंदुसागर के पास, ज़िला खोर्धा, ओडिशा

भुवनेश्वर के पुराने शहर (एकाम्र क्षेत्र) का सबसे प्रमुख शिव मंदिर, जो वर्तमान रूप में 11वीं सदी का है। यहाँ के स्वयंभू शिवलिंग को हरिहर (शिव और विष्णु का संयुक्त रूप) माना जाता है। पास में पवित्र बिंदुसागर सरोवर है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि, अशोकाष्टमी पर रुकुणा रथ यात्रा, और 22 दिन की चंदन यात्रा।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन और बीजू पटनायक हवाई अड्डा, दोनों शहर में ही।

ध्यान दें: मंदिर परिसर में केवल हिंदुओं को प्रवेश है; अन्य लोग बाहर बने ऊँचे चबूतरे से मंदिर देख सकते हैं।

जानकारी के स्रोत

श्री बृहदीश्वर मंदिर

तंजावुर, कावेरी के दक्षिण तट पर, तमिलनाडु

तंजावुर का यह विशाल शिव मंदिर चोल सम्राट राजराज प्रथम ने 1003 से 1010 ई. के बीच बनवाया। यह यूनेस्को विश्व धरोहर 'महान जीवंत चोल मंदिर' का भाग है। इसका ऊँचा विमान (शिखर) और एक ही पत्थर से बनी विशाल नंदी प्रतिमा प्रसिद्ध हैं।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि के आसपास (फरवरी) बृहन नाट्यांजलि नृत्य उत्सव।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
तंजावुर रेल मार्ग से जुड़ा है; नज़दीकी हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली (लगभग 55 किमी)।
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श्री नीलकंठ महादेव मंदिर

ऋषिकेश से लगभग 28 किमी, वन क्षेत्र, ज़िला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड

ऋषिकेश से लगभग 28 किमी दूर जंगलों के बीच स्थित भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर। नाम शिव के नीलकंठ रूप पर है; पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पीने से उनका कंठ नीला हो गया था।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि और सावन मास।
कब जाएँ
पूरे वर्ष दर्शन; बरसात में पहाड़ी सड़क पर सावधानी रखें।
कैसे पहुँचें
ऋषिकेश से सड़क मार्ग लगभग 28 किमी। रेलवे स्टेशन ऋषिकेश/योग नगरी ऋषिकेश; नज़दीकी हवाई अड्डा देहरादून (जॉली ग्रांट)।
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श्री बैजनाथ मंदिर (कांगड़ा)

बैजनाथ, धौलाधार पर्वतमाला के पास, ज़िला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में धौलाधार पर्वतमाला के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर, जहाँ शिव वैद्यनाथ (बैजनाथ) रूप में पूजे जाते हैं। कथा है कि रावण शिवलिंग को लंका ले जा रहा था और वह लिंग यहीं स्थापित हो गया।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि।
कब जाएँ
पूरे वर्ष दर्शन होते हैं; सर्दियों में ठंड अधिक रहती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी हवाई अड्डा कांगड़ा (गग्गल); कांगड़ा घाटी की छोटी रेल लाइन पर बैजनाथ पपरोला स्टेशन।

मान्यताओं में अंतर: कुछ परंपराएँ इसे ही वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मानती हैं, पर अधिकतर सूचियों में झारखंड के देवघर का बैद्यनाथ धाम है; महाराष्ट्र का परली वैजनाथ भी यह दावा करता है।

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श्री महाबलेश्वर मंदिर, गोकर्ण

गोकर्ण, अरब सागर तट, ज़िला उत्तर कन्नड़, कर्नाटक

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में अरब सागर तट पर स्थित महाबलेश्वर मंदिर। कथा है कि रावण शिव का आत्मलिंग लंका ले जा रहा था, पर गणेश जी ने उसे यहीं धरती पर रख दिया और रावण उसे उठा न सका। यह कर्नाटक के सात मुक्ति क्षेत्रों में एक है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि पर रथ यात्रा।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
गोकर्ण रोड रेलवे स्टेशन (कोंकण रेलवे) लगभग 10 किमी; नज़दीकी हवाई अड्डे हुबली, गोवा और मंगलूरु।
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