कुंभ मेला चार स्थानों पर लगता है: प्रयागराज (गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम), हरिद्वार (गंगा), उज्जैन (शिप्रा) और नासिक-त्र्यंबकेश्वर (गोदावरी)। हर स्थान पर यह लगभग 12 वर्ष में एक बार, बृहस्पति ग्रह की स्थिति के अनुसार लगता है; उज्जैन और नासिक में इसे सिंहस्थ कहते हैं। प्रयागराज और हरिद्वार में लगभग 6 वर्ष पर अर्धकुंभ भी होता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के अमृत की बूँदें इन्हीं चार स्थानों पर गिरी थीं।
प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य मानी जाने वाली सरस्वती का संगम। संगम पर गंगा का हल्का और यमुना का गहरा जल अलग-अलग दिखता है। पुराणों में प्रयाग को तीर्थराज कहा गया है और मान्यता है कि यहाँ स्नान से पाप नष्ट होते हैं।
विशेष पर्व
हर वर्ष माघ मेला; लगभग 12 वर्ष में कुंभ और 6 वर्ष में अर्धकुंभ।
कब जाएँ
माघ मास (जनवरी-फरवरी) में स्नान का विशेष महत्व; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
प्रयागराज जंक्शन रेलवे स्टेशन और प्रयागराज हवाई अड्डा; संगम तक सड़क मार्ग से, फिर नाव से।
ध्यान दें: कुंभ और माघ मेले में बहुत भारी भीड़ होती है; प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
हरिद्वार (प्राचीन मायापुरी, सप्तपुरियों में एक) में गंगा तट का सबसे पवित्र घाट, जिसका नाम हरि (भगवान विष्णु) से जुड़ा है। मान्यता है कि यहाँ के ब्रह्मकुंड में समुद्र मंथन के अमृत की बूँदें गिरी थीं। हर शाम गंगा आरती होती है और श्रद्धालु दीपदान करते हैं।
विशेष पर्व
हर शाम गंगा आरती; लगभग 12 वर्ष में कुंभ और 6 वर्ष में अर्धकुंभ; कांवड़ यात्रा।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
हरिद्वार जंक्शन रेलवे स्टेशन शहर में; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (देहरादून) हरिद्वार से लगभग 35 किमी।
ध्यान दें: गंगा का बहाव तेज़ रहता है; स्नान करते समय घाट पर लगी जंजीर पकड़कर रखें।
उज्जैन (प्राचीन अवंतिका), शिप्रा नदी के पास, मध्य प्रदेश
शिप्रा नदी के तट पर बसी उज्जैन (प्राचीन अवंतिका) नगरी का यह ज्योतिर्लिंग स्वयंभू माना जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकाल दक्षिणमुखी हैं। मंदिर के ऊपरी तल पर नागचंद्रेश्वर विराजते हैं, जिनके दर्शन वर्ष में केवल नाग पंचमी को होते हैं।
विशेष पर्व
महाशिवरात्रि, नाग पंचमी, और लगभग 12 वर्ष में सिंहस्थ कुंभ।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन शहर में ही; इंदौर हवाई अड्डा लगभग 55 किमी।
त्र्यंबक, ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी, ज़िला नासिक, महाराष्ट्र
नासिक जिले में ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी पर स्थित, जिसके पास गोदावरी नदी का उद्गम माना जाता है। यहाँ के ज्योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तीन मुख हैं। वर्तमान मंदिर पेशवा बालाजी बाजीराव (नानासाहेब) ने बनवाया था।
विशेष पर्व
महाशिवरात्रि; सिंहस्थ कुंभ (लगभग 12 वर्ष में); नारायण नागबलि और कालसर्प शांति जैसी विधियाँ।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
नासिक रोड रेलवे स्टेशन लगभग 39 किमी; नासिक शहर से लगभग 30 किमी। नज़दीकी हवाई अड्डा नासिक (ओझर)।