॥ तीर्थ दर्शन ॥

पवित्र तीर्थ, नदियाँ और घाट

संगम, हर की पौड़ी, गंगोत्री, यमुनोत्री और लोहार्गल जैसे पवित्र तीर्थ।

राजस्थान में

लोहार्गल तीर्थ

लोहार्गल, उदयपुरवाटी के पास, ज़िला झुंझुनूं, राजस्थान

अरावली की घाटी में बसे लोहार्गल का अर्थ है ‘जहाँ लोहा गल जाए’। कथा है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने यहाँ सूर्य कुंड में स्नान किया और उनके अस्त्र-शस्त्र गल गए। कुंड के सामने प्राचीन सूर्य मंदिर है, और पास की पहाड़ी पर मालकेतु जी का मंदिर है।

विशेष पर्व
भाद्रपद में जन्माष्टमी से अमावस्या तक 24 कोस की मालकेतु परिक्रमा होती है; अमावस्या पर सूर्य कुंड में स्नान।
कब जाएँ
भाद्रपद की परिक्रमा के समय, या अक्टूबर से मार्च। वर्षा में यहाँ झरना बहता है।
कैसे पहुँचें
उदयपुरवाटी से लगभग 10 किमी, नवलगढ़ से लगभग 30 किमी, झुंझुनूं से लगभग 70 किमी। हवाई अड्डा जयपुर।

ध्यान दें: मालकेतु जी के मंदिर तक लगभग 400 सीढ़ियाँ हैं; परिक्रमा पहाड़ी रास्तों पर पैदल होती है।

जानकारी के स्रोत

गलताजी तीर्थ

गलता, जयपुर के पूर्व में, राजस्थान

जयपुर से लगभग 10 किमी पूर्व में अरावली की संकरी घाटी में गलताजी मंदिरों और पवित्र कुंडों का समूह है। पहाड़ से आने वाले प्राकृतिक झरने का पानी इन कुंडों में भरता है। परंपरा के अनुसार यहाँ गालव ऋषि ने तप किया था; यह सदियों से रामानंदी संप्रदाय के संतों का प्रमुख स्थान है।

विशेष पर्व
मकर संक्रांति पर कुंडों में स्नान के लिए हज़ारों श्रद्धालु आते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च; मकर संक्रांति पर विशेष स्नान।
कैसे पहुँचें
जयपुर से लगभग 10 किमी। नज़दीकी रेलवे स्टेशन जयपुर जंक्शन, हवाई अड्डा जयपुर।

ध्यान दें: परिसर में बंदर बहुत हैं; खाने-पीने का सामान संभालकर रखें।

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अन्य प्रसिद्ध धाम

त्रिवेणी संगम, प्रयागराज

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य मानी जाने वाली सरस्वती का संगम। संगम पर गंगा का हल्का और यमुना का गहरा जल अलग-अलग दिखता है। पुराणों में प्रयाग को तीर्थराज कहा गया है और मान्यता है कि यहाँ स्नान से पाप नष्ट होते हैं।

विशेष पर्व
हर वर्ष माघ मेला; लगभग 12 वर्ष में कुंभ और 6 वर्ष में अर्धकुंभ।
कब जाएँ
माघ मास (जनवरी-फरवरी) में स्नान का विशेष महत्व; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
प्रयागराज जंक्शन रेलवे स्टेशन और प्रयागराज हवाई अड्डा; संगम तक सड़क मार्ग से, फिर नाव से।

ध्यान दें: कुंभ और माघ मेले में बहुत भारी भीड़ होती है; प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

जानकारी के स्रोत

हर की पौड़ी, हरिद्वार

हरिद्वार, गंगा तट, उत्तराखंड

हरिद्वार (प्राचीन मायापुरी, सप्तपुरियों में एक) में गंगा तट का सबसे पवित्र घाट, जिसका नाम हरि (भगवान विष्णु) से जुड़ा है। मान्यता है कि यहाँ के ब्रह्मकुंड में समुद्र मंथन के अमृत की बूँदें गिरी थीं। हर शाम गंगा आरती होती है और श्रद्धालु दीपदान करते हैं।

विशेष पर्व
हर शाम गंगा आरती; लगभग 12 वर्ष में कुंभ और 6 वर्ष में अर्धकुंभ; कांवड़ यात्रा।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
हरिद्वार जंक्शन रेलवे स्टेशन शहर में; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (देहरादून) हरिद्वार से लगभग 35 किमी।

ध्यान दें: गंगा का बहाव तेज़ रहता है; स्नान करते समय घाट पर लगी जंजीर पकड़कर रखें।

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श्री यमुनोत्री धाम

यमुनोत्री, जानकी चट्टी से 6 किमी पैदल, ज़िला उत्तरकाशी, उत्तराखंड

छोटा चार धाम का पहला पड़ाव, जहाँ माँ यमुना का मंदिर है। मान्यता है कि यमुना जी यमराज की बहन हैं और इनमें स्नान से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। मंदिर के पास सूर्य कुंड के गर्म पानी में भक्त चावल और आलू पकाकर प्रसाद बनाते हैं।

विशेष पर्व
अक्षय तृतीया पर कपाट खुलना और भाई दूज (यम द्वितीया) पर कपाट बंद होना विशेष अवसर हैं।
कब जाएँ
कपाट अक्षय तृतीया (अप्रैल-मई) पर खुलते और भाई दूज पर बंद होते हैं; शीतकाल में पूजा खरसाली में।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन देहरादून या ऋषिकेश; हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून)। देहरादून से सड़क लगभग 180 किमी, फिर 6 किमी पैदल।

ध्यान दें: चार धाम पंजीकरण अनिवार्य। जानकी चट्टी से 6 किमी चढ़ाई और ऊँचाई लगभग 3293 मीटर; वरिष्ठ यात्री स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

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श्री गंगोत्री धाम

गंगोत्री, भागीरथी नदी के तट पर, ज़िला उत्तरकाशी, उत्तराखंड

माँ गंगा का यह धाम छोटा चार धाम का दूसरा पड़ाव है। कथा है कि राजा भगीरथ के तप से गंगा पृथ्वी पर उतरीं और भगवान शिव ने उनका वेग अपनी जटाओं में थामा। मंदिर गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा ने बनवाया था; गंगा का उद्गम गौमुख यहाँ से आगे पैदल मार्ग पर है।

विशेष पर्व
अक्षय तृतीया पर कपाट खुलना और अन्नकूट (दीपावली के अगले दिन) पर कपाट बंद होना विशेष अवसर हैं।
कब जाएँ
कपाट अक्षय तृतीया (अप्रैल-मई) पर खुलते और अन्नकूट पर बंद होते हैं; शीतकाल में पूजा मुखबा में।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश या देहरादून; हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून)। ऋषिकेश से सड़क द्वारा लगभग 270 किमी।

ध्यान दें: चार धाम पंजीकरण अनिवार्य। ऊँचाई लगभग 3100 मीटर; गर्म कपड़े साथ रखें।

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