॥ तीर्थ-समूह ॥

सप्तपुरी

गरुड़ पुराण के अनुसार सात नगरियाँ मोक्ष देने वाली मानी गई हैं: अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी (वाराणसी), कांची (कांचीपुरम), अवंतिका (उज्जैन) और द्वारका। इन्हें सप्तपुरी या सप्त मोक्षपुरी कहते हैं। मान्यता है कि इनकी यात्रा से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिलती है।

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सप्तपुरी श्लोक

अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका। पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः॥

अर्थ:अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी (वाराणसी), कांची (कांचीपुरम), अवंतिका (उज्जैन) और द्वारावती (द्वारका), ये सात पुरियाँ मोक्ष देने वाली हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से की गई इनकी यात्रा जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति दिलाती है। यह श्लोक गरुड़ पुराण से जुड़ा माना जाता है।

श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या

अयोध्या, उत्तर प्रदेश

मान्यता है कि यही भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। यहाँ नागर शैली में बने भव्य मंदिर में 22 जनवरी 2024 को बाल रूप श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई। मंदिर का प्रबंधन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करता है।

विशेष पर्व
चैत्र की राम नवमी मुख्य पर्व; दीपावली पर अयोध्या का दीपोत्सव प्रसिद्ध है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; राम नवमी (मार्च-अप्रैल) और दीपावली पर बहुत भीड़।
कैसे पहुँचें
अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 1 किमी; महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्टेशन से लगभग 15 किमी।
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श्री कृष्ण जन्मभूमि (जन्मस्थान), मथुरा

मथुरा नगर, उत्तर प्रदेश

मान्यता है कि यहीं कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, और गर्भगृह मंदिर उसी कारागार कक्ष के स्थान पर माना जाता है। परिसर में केशवदेव मंदिर (1958) और राधा-कृष्ण का भागवत भवन (1982) भी हैं। आधुनिक परिसर 20वीं सदी में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रयासों से बना।

विशेष पर्व
जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का जन्मोत्सव सबसे बड़ा पर्व; राधाष्टमी, होली और दीपावली भी।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; जन्माष्टमी और होली पर विशेष उत्सव।
कैसे पहुँचें
मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन (दिल्ली-मुंबई मुख्य मार्ग); हवाई अड्डा आगरा (लगभग 60 किमी) या दिल्ली (लगभग 160 किमी)।
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हर की पौड़ी, हरिद्वार

हरिद्वार, गंगा तट, उत्तराखंड

हरिद्वार (प्राचीन मायापुरी, सप्तपुरियों में एक) में गंगा तट का सबसे पवित्र घाट, जिसका नाम हरि (भगवान विष्णु) से जुड़ा है। मान्यता है कि यहाँ के ब्रह्मकुंड में समुद्र मंथन के अमृत की बूँदें गिरी थीं। हर शाम गंगा आरती होती है और श्रद्धालु दीपदान करते हैं।

विशेष पर्व
हर शाम गंगा आरती; लगभग 12 वर्ष में कुंभ और 6 वर्ष में अर्धकुंभ; कांवड़ यात्रा।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
हरिद्वार जंक्शन रेलवे स्टेशन शहर में; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (देहरादून) हरिद्वार से लगभग 35 किमी।

ध्यान दें: गंगा का बहाव तेज़ रहता है; स्नान करते समय घाट पर लगी जंजीर पकड़कर रखें।

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श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

वाराणसी (काशी), गंगा तट के पास, उत्तर प्रदेश

गंगा किनारे बसी काशी (वाराणसी) का यह ज्योतिर्लिंग सबसे पवित्र शिव धामों में गिना जाता है। वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार 1780 में महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया। नया काशी विश्वनाथ धाम गलियारा मंदिर को गंगा घाटों से जोड़ता है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि और सावन मास में विशेष भीड़।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
वाराणसी जंक्शन लगभग 6 किमी, वाराणसी सिटी स्टेशन लगभग 2 किमी; बाबतपुर हवाई अड्डा शहर से लगभग 22 किमी।
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श्री कामाक्षी अम्मन मंदिर

कांचीपुरम, तमिलनाडु

मोक्ष देने वाली सात पुरियों में गिनी जाने वाली कांची में देवी कामाक्षी पद्मासन में विराजती हैं और हाथों में गन्ने का धनुष, पाश और अंकुश धारण करती हैं। मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने यहाँ श्रीचक्र स्थापित किया था। मंदिर का कांची कामकोटि पीठ से गहरा संबंध है।

विशेष पर्व
मासी (फ़रवरी-मार्च) का मुख्य उत्सव, रथ उत्सव, तेप्पम (नौका) उत्सव और नवरात्रि
कब जाएँ
पूरे वर्ष; नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर) और मासी उत्सव (फ़रवरी-मार्च) में विशेष आयोजन
कैसे पहुँचें
कांचीपुरम रेलवे स्टेशन; नज़दीकी हवाई अड्डा चेन्नई, लगभग 72 किमी
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श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

उज्जैन (प्राचीन अवंतिका), शिप्रा नदी के पास, मध्य प्रदेश

शिप्रा नदी के तट पर बसी उज्जैन (प्राचीन अवंतिका) नगरी का यह ज्योतिर्लिंग स्वयंभू माना जाता है। 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकाल दक्षिणमुखी हैं। मंदिर के ऊपरी तल पर नागचंद्रेश्वर विराजते हैं, जिनके दर्शन वर्ष में केवल नाग पंचमी को होते हैं।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि, नाग पंचमी, और लगभग 12 वर्ष में सिंहस्थ कुंभ।
कब जाएँ
पूरे वर्ष; अक्टूबर से मार्च मौसम सुहाना।
कैसे पहुँचें
उज्जैन जंक्शन रेलवे स्टेशन शहर में ही; इंदौर हवाई अड्डा लगभग 55 किमी।
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श्री द्वारकाधीश मंदिर (द्वारका धाम)

द्वारका, गोमती के तट पर, ज़िला देवभूमि द्वारका, गुजरात

द्वारका के राजा के रूप में श्रीकृष्ण का यह मंदिर जगत मंदिर कहलाता है और चार धाम तथा सप्तपुरी दोनों में गिना जाता है। पाँच तलों वाला मंदिर 72 स्तंभों पर खड़ा है और शिखर की ध्वजा दिन में कई बार बदली जाती है। मान्यता है कि इसकी पहली स्थापना श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने की थी।

विशेष पर्व
जन्माष्टमी मुख्य उत्सव; नवरात्रि और दीपावली भी धूमधाम से मनाए जाते हैं।
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी का मौसम सबसे अच्छा; जन्माष्टमी पर विशेष उत्सव।
कैसे पहुँचें
द्वारका रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 2 किमी; नज़दीकी हवाई अड्डे पोरबंदर (लगभग 95 किमी) और जामनगर।
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