॥ तीर्थ-समूह ॥

चार धाम

आदि शंकराचार्य की परंपरा से जुड़े भारत की चारों दिशाओं के चार धाम: उत्तर में बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारका, पूर्व में पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम। इनमें बद्रीनाथ, द्वारका और पुरी भगवान विष्णु के धाम हैं, जबकि रामेश्वरम भगवान शिव का धाम है। मान्यता है कि चारों धामों की यात्रा से मोक्ष का मार्ग खुलता है। इन्हें उत्तराखंड के छोटा चार धाम से अलग समझें।

श्री बद्रीनाथ धाम

बद्रीनाथ, अलकनंदा नदी के तट पर, ज़िला चमोली, उत्तराखंड

गढ़वाल हिमालय में अलकनंदा के किनारे भगवान बद्रीनारायण (विष्णु) का यह धाम चार धाम और छोटा चार धाम दोनों में आता है और 108 दिव्य देशों में भी गिना जाता है। गर्भगृह में शालिग्राम शिला की ध्यान मुद्रा वाली मूर्ति है। मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने 9वीं सदी में इस तीर्थ को फिर से प्रतिष्ठित किया।

विशेष पर्व
माता मूर्ति का मेला, जून में बद्री-केदार उत्सव और जन्माष्टमी।
कब जाएँ
कपाट अप्रैल-मई में खुलते और अक्टूबर-नवंबर में बंद होते हैं; शीतकालीन पूजा ज्योतिर्मठ और पांडुकेश्वर में।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (लगभग 297 किमी); हवाई अड्डा जॉली ग्रांट, देहरादून (लगभग 317 किमी)। आगे सड़क मार्ग से।

ध्यान दें: चार धाम यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य (ऑनलाइन या मार्ग के केंद्रों पर)। ऊँचाई लगभग 3100 मीटर, गर्म कपड़े रखें।

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श्री द्वारकाधीश मंदिर (द्वारका धाम)

द्वारका, गोमती के तट पर, ज़िला देवभूमि द्वारका, गुजरात

द्वारका के राजा के रूप में श्रीकृष्ण का यह मंदिर जगत मंदिर कहलाता है और चार धाम तथा सप्तपुरी दोनों में गिना जाता है। पाँच तलों वाला मंदिर 72 स्तंभों पर खड़ा है और शिखर की ध्वजा दिन में कई बार बदली जाती है। मान्यता है कि इसकी पहली स्थापना श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने की थी।

विशेष पर्व
जन्माष्टमी मुख्य उत्सव; नवरात्रि और दीपावली भी धूमधाम से मनाए जाते हैं।
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी का मौसम सबसे अच्छा; जन्माष्टमी पर विशेष उत्सव।
कैसे पहुँचें
द्वारका रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 2 किमी; नज़दीकी हवाई अड्डे पोरबंदर (लगभग 95 किमी) और जामनगर।
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श्री जगन्नाथ मंदिर (जगन्नाथ पुरी)

पुरी, बंगाल की खाड़ी के तट पर, ओडिशा

पूर्व दिशा के इस धाम में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। तीनों की मूर्तियाँ नीम की लकड़ी की हैं, जिन्हें नवकलेवर अनुष्ठान में समय-समय पर बदला जाता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 12वीं सदी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने आरंभ कराया था।

विशेष पर्व
आषाढ़ मास की प्रसिद्ध रथ यात्रा, ज्येष्ठ पूर्णिमा की स्नान यात्रा और मंदिर का महाप्रसाद।
कब जाएँ
सर्दियों (अक्टूबर से फरवरी) में मौसम अच्छा; रथ यात्रा आषाढ़ (जून-जुलाई) में होती है।
कैसे पहुँचें
पुरी रेलवे स्टेशन (लाइन का अंतिम स्टेशन) शहर में ही; नज़दीकी हवाई अड्डा भुवनेश्वर (लगभग 60 किमी)।

ध्यान दें: परंपरा के अनुसार मंदिर के भीतर गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।

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श्री रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (रामनाथस्वामी मंदिर)

रामेश्वरम द्वीप, ज़िला रामनाथपुरम, तमिलनाडु

रामेश्वरम द्वीप पर स्थित रामनाथस्वामी मंदिर। कथा है कि लंका विजय के बाद श्रीराम ने यहाँ शिव पूजा की; सीता जी के बनाए रेत के रामलिंग की मुख्य पूजा होती है और हनुमान जी द्वारा कैलाश से लाए विश्वलिंग की पूजा पहले होती है। लंबे गलियारे और 22 तीर्थ कुंड प्रसिद्ध हैं और यह चार धामों में भी एक है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि; 22 तीर्थ कुंडों में स्नान की परंपरा।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च मौसम सबसे सुहाना।
कैसे पहुँचें
रामेश्वरम रेलवे स्टेशन लगभग 1 किमी; मदुरै हवाई अड्डा लगभग 179 किमी।
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