उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय के चार धाम: यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ। परंपरा से यात्रा यमुनोत्री से शुरू होकर गंगोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ पर पूरी होती है। ये धाम लगभग छह महीने ही खुलते हैं: कपाट अक्षय तृतीया (अप्रैल-मई) के आसपास खुलते हैं और दीपावली के बाद बंद होते हैं (बद्रीनाथ के कुछ बाद, नवंबर में)। उत्तराखंड सरकार ने सभी यात्रियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया है।
यमुनोत्री, जानकी चट्टी से 6 किमी पैदल, ज़िला उत्तरकाशी, उत्तराखंड
छोटा चार धाम का पहला पड़ाव, जहाँ माँ यमुना का मंदिर है। मान्यता है कि यमुना जी यमराज की बहन हैं और इनमें स्नान से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। मंदिर के पास सूर्य कुंड के गर्म पानी में भक्त चावल और आलू पकाकर प्रसाद बनाते हैं।
विशेष पर्व
अक्षय तृतीया पर कपाट खुलना और भाई दूज (यम द्वितीया) पर कपाट बंद होना विशेष अवसर हैं।
कब जाएँ
कपाट अक्षय तृतीया (अप्रैल-मई) पर खुलते और भाई दूज पर बंद होते हैं; शीतकाल में पूजा खरसाली में।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन देहरादून या ऋषिकेश; हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून)। देहरादून से सड़क लगभग 180 किमी, फिर 6 किमी पैदल।
ध्यान दें: चार धाम पंजीकरण अनिवार्य। जानकी चट्टी से 6 किमी चढ़ाई और ऊँचाई लगभग 3293 मीटर; वरिष्ठ यात्री स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
गंगोत्री, भागीरथी नदी के तट पर, ज़िला उत्तरकाशी, उत्तराखंड
माँ गंगा का यह धाम छोटा चार धाम का दूसरा पड़ाव है। कथा है कि राजा भगीरथ के तप से गंगा पृथ्वी पर उतरीं और भगवान शिव ने उनका वेग अपनी जटाओं में थामा। मंदिर गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा ने बनवाया था; गंगा का उद्गम गौमुख यहाँ से आगे पैदल मार्ग पर है।
विशेष पर्व
अक्षय तृतीया पर कपाट खुलना और अन्नकूट (दीपावली के अगले दिन) पर कपाट बंद होना विशेष अवसर हैं।
कब जाएँ
कपाट अक्षय तृतीया (अप्रैल-मई) पर खुलते और अन्नकूट पर बंद होते हैं; शीतकाल में पूजा मुखबा में।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश या देहरादून; हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून)। ऋषिकेश से सड़क द्वारा लगभग 270 किमी।
ध्यान दें: चार धाम पंजीकरण अनिवार्य। ऊँचाई लगभग 3100 मीटर; गर्म कपड़े साथ रखें।
केदारनाथ, मंदाकिनी नदी के पास, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
मंदाकिनी नदी के पास लगभग 3,583 मीटर ऊँचाई पर स्थित केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में एक और पंच केदार में प्रथम है। यह उत्तराखंड की छोटा चार धाम यात्रा का भी भाग है। मान्यता है कि मंदिर का निर्माण पांडवों से जुड़ा है।
विशेष पर्व
कपाट खुलने और भाई दूज पर कपाट बंद होने के अवसर; सर्दियों में पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में।
कब जाएँ
कपाट अप्रैल/मई में खुलते हैं और भाई दूज (अक्टूबर/नवंबर) पर बंद होते हैं।
कैसे पहुँचें
ऋषिकेश से लगभग 223 किमी; सड़क गौरीकुंड तक, फिर लगभग 16 किमी पैदल। नज़दीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून)।
ध्यान दें: लगभग 3,583 मीटर ऊँचाई, ठंड और कठिन चढ़ाई। उत्तराखंड चार धाम यात्रा के लिए सरकारी पंजीकरण अनिवार्य है।
बद्रीनाथ, अलकनंदा नदी के तट पर, ज़िला चमोली, उत्तराखंड
गढ़वाल हिमालय में अलकनंदा के किनारे भगवान बद्रीनारायण (विष्णु) का यह धाम चार धाम और छोटा चार धाम दोनों में आता है और 108 दिव्य देशों में भी गिना जाता है। गर्भगृह में शालिग्राम शिला की ध्यान मुद्रा वाली मूर्ति है। मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने 9वीं सदी में इस तीर्थ को फिर से प्रतिष्ठित किया।
विशेष पर्व
माता मूर्ति का मेला, जून में बद्री-केदार उत्सव और जन्माष्टमी।
कब जाएँ
कपाट अप्रैल-मई में खुलते और अक्टूबर-नवंबर में बंद होते हैं; शीतकालीन पूजा ज्योतिर्मठ और पांडुकेश्वर में।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (लगभग 297 किमी); हवाई अड्डा जॉली ग्रांट, देहरादून (लगभग 317 किमी)। आगे सड़क मार्ग से।
ध्यान दें: चार धाम यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य (ऑनलाइन या मार्ग के केंद्रों पर)। ऊँचाई लगभग 3100 मीटर, गर्म कपड़े रखें।