॥ तीर्थ दर्शन ॥

भगवान विष्णु के धाम

बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, तिरुपति, श्रीरंगम और पद्मनाभस्वामी जैसे विष्णु धाम, और पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर।

राजस्थान में

श्री ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर

पुष्कर, पुष्कर सरोवर के पास, ज़िला अजमेर, राजस्थान

अजमेर से लगभग 14 किमी दूर पुष्कर तीर्थ में पवित्र पुष्कर सरोवर और ब्रह्मा जी का मंदिर है, जो भारत में ब्रह्मा जी के गिने-चुने मंदिरों में से एक है। सरोवर के पास की पहाड़ी पर ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री माता का मंदिर है, जहाँ से सरोवर का सुंदर दृश्य दिखता है।

विशेष पर्व
कार्तिक मास में पुष्कर मेला भरता है; कार्तिक पूर्णिमा पर सरोवर में स्नान का विशेष महत्व है।
कब जाएँ
अक्टूबर से फ़रवरी का मौसम अच्छा रहता है; कार्तिक मेले में भारी भीड़ रहती है।
कैसे पहुँचें
अजमेर से लगभग 14 किमी; नज़दीकी बड़ा रेलवे स्टेशन अजमेर जंक्शन। हवाई अड्डा किशनगढ़ या जयपुर।

ध्यान दें: सावित्री माता मंदिर पहाड़ी पर है; पैदल लगभग एक घंटे की चढ़ाई है, रोपवे भी है।

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श्री चारभुजा नाथ मंदिर, गढ़बोर

गढ़बोर, कुंभलगढ़ तहसील, ज़िला राजसमंद, राजस्थान

गढ़बोर गाँव में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप ‘चारभुजा नाथ’ का प्राचीन मंदिर है, जो लगभग 1444 ई. में बना बताया जाता है। प्रतिमा के चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म हैं। मान्यता है कि इस प्रतिमा की पूजा पांडवों ने की थी।

विशेष पर्व
जलझूलनी एकादशी (अगस्त-सितंबर) का मेला प्रसिद्ध है; फागोत्सव, जन्माष्टमी और अन्नकूट भी मनाए जाते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
उदयपुर से लगभग 112 किमी, कुंभलगढ़ से लगभग 32 किमी। नज़दीकी हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन उदयपुर।
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अन्य प्रसिद्ध धाम

श्री बद्रीनाथ धाम

बद्रीनाथ, अलकनंदा नदी के तट पर, ज़िला चमोली, उत्तराखंड

गढ़वाल हिमालय में अलकनंदा के किनारे भगवान बद्रीनारायण (विष्णु) का यह धाम चार धाम और छोटा चार धाम दोनों में आता है और 108 दिव्य देशों में भी गिना जाता है। गर्भगृह में शालिग्राम शिला की ध्यान मुद्रा वाली मूर्ति है। मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने 9वीं सदी में इस तीर्थ को फिर से प्रतिष्ठित किया।

विशेष पर्व
माता मूर्ति का मेला, जून में बद्री-केदार उत्सव और जन्माष्टमी।
कब जाएँ
कपाट अप्रैल-मई में खुलते और अक्टूबर-नवंबर में बंद होते हैं; शीतकालीन पूजा ज्योतिर्मठ और पांडुकेश्वर में।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (लगभग 297 किमी); हवाई अड्डा जॉली ग्रांट, देहरादून (लगभग 317 किमी)। आगे सड़क मार्ग से।

ध्यान दें: चार धाम यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य (ऑनलाइन या मार्ग के केंद्रों पर)। ऊँचाई लगभग 3100 मीटर, गर्म कपड़े रखें।

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श्री जगन्नाथ मंदिर (जगन्नाथ पुरी)

पुरी, बंगाल की खाड़ी के तट पर, ओडिशा

पूर्व दिशा के इस धाम में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। तीनों की मूर्तियाँ नीम की लकड़ी की हैं, जिन्हें नवकलेवर अनुष्ठान में समय-समय पर बदला जाता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 12वीं सदी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने आरंभ कराया था।

विशेष पर्व
आषाढ़ मास की प्रसिद्ध रथ यात्रा, ज्येष्ठ पूर्णिमा की स्नान यात्रा और मंदिर का महाप्रसाद।
कब जाएँ
सर्दियों (अक्टूबर से फरवरी) में मौसम अच्छा; रथ यात्रा आषाढ़ (जून-जुलाई) में होती है।
कैसे पहुँचें
पुरी रेलवे स्टेशन (लाइन का अंतिम स्टेशन) शहर में ही; नज़दीकी हवाई अड्डा भुवनेश्वर (लगभग 60 किमी)।

ध्यान दें: परंपरा के अनुसार मंदिर के भीतर गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।

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श्री वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी)

तिरुमला पहाड़ियाँ, तिरुपति, आंध्र प्रदेश

शेषाचलम की सात पहाड़ियों में से सातवीं, वेंकटाद्रि पर भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी, श्रीनिवास, गोविंद) का प्रसिद्ध मंदिर है, जिसका प्रबंधन तिरुमला तिरुपति देवस्थानम करता है। अनेक भक्त मन्नत के रूप में केश दान करते हैं। यहाँ के लड्डू प्रसाद को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिला है।

विशेष पर्व
सितंबर-अक्टूबर में नौ दिन का श्रीवारी ब्रह्मोत्सवम; दिसंबर-जनवरी में वैकुंठ एकादशी।
कब जाएँ
पूरे वर्ष दर्शन होते हैं; ब्रह्मोत्सवम और वैकुंठ एकादशी पर सबसे अधिक भीड़ रहती है।
कैसे पहुँचें
तिरुपति रेलवे स्टेशन और रेणिगुंटा जंक्शन; हवाई अड्डा शहर से लगभग 15 किमी। ऊपर घाट सड़क या अलिपिरी पैदल मार्ग (लगभग 11 किमी)।

ध्यान दें: अलिपिरी पैदल मार्ग में लगभग 3550 सीढ़ियाँ हैं; चढ़ाई से पहले अपनी क्षमता देख लें।

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श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर

ईस्ट फोर्ट, तिरुवनंतपुरम, केरल

यहाँ भगवान विष्णु अनंत (आदिशेष) नाग पर शयन मुद्रा में विराजते हैं और विशाल मूर्ति के दर्शन तीन द्वारों से होते हैं। यह 108 दिव्य देशों में से एक है। 1750 में त्रावणकोर के राजा मार्तंड वर्मा ने अपना राज्य भगवान को अर्पित किया और राजा पद्मनाभ दास कहलाए।

विशेष पर्व
अल्पशि (अक्टूबर-नवंबर) और पंगुनि (मार्च-अप्रैल) के 10 दिन के उत्सव; हर 6 वर्ष में लक्षदीपम।
कब जाएँ
पूरे वर्ष दर्शन; दोनों उत्सवों के अंत में शंखुमुखम तट तक आरट्टु शोभायात्रा निकलती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन तिरुवनंतपुरम सेंट्रल; हवाई अड्डा तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

ध्यान दें: केवल हिंदुओं को प्रवेश। पुरुष धोती या मुंडु पहनें, कमीज़ नहीं; महिलाएँ साड़ी या पारंपरिक वस्त्र पहनें।

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श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, श्रीरंगम

श्रीरंगम द्वीप, कावेरी और कोल्लिडम नदियों के बीच, ज़िला तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु

108 दिव्य देशों में सबसे प्रमुख इस मंदिर में भगवान रंगनाथ (विष्णु) आदिशेष पर शयन करते हैं। लगभग 155 एकड़ में फैला, 21 गोपुरम वाला यह परिसर विश्व के सबसे बड़े सक्रिय हिंदू मंदिरों में गिना जाता है। संत रामानुजाचार्य का जीवन इसी तीर्थ से जुड़ा रहा।

विशेष पर्व
मार्गळि (दिसंबर-जनवरी) में लगभग 20 दिन का उत्सव, जिसमें वैकुंठ एकादशी सबसे प्रमुख है।
कब जाएँ
दिसंबर-जनवरी सबसे सुहावने और उत्सव के महीने; अप्रैल-मई बहुत गर्म।
कैसे पहुँचें
तिरुचिरापल्ली शहर से लगभग 12 किमी उत्तर; बड़ा स्टेशन तिरुचिरापल्ली जंक्शन, श्रीरंगम स्टेशन पर कुछ ट्रेनें रुकती हैं; तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डा।
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श्री मुक्तिनाथ धाम

मुक्तिनाथ, मुस्तांग (गंडकी प्रदेश), नेपाल

लगभग 3800 मीटर की ऊँचाई पर भगवान विष्णु का यह मंदिर हिंदू और बौद्ध दोनों के लिए पवित्र है; हिंदू इसे मुक्तिक्षेत्र कहते हैं। यह 108 दिव्य देशों में गिना जाता है और कुछ परंपराओं में शक्तिपीठ भी माना जाता है। पास की काली गंडकी नदी शालिग्राम शिलाओं के लिए प्रसिद्ध है।

विशेष पर्व
मंदिर परिसर की 108 जलधाराएँ और दो कुंड प्रसिद्ध हैं।
कब जाएँ
मध्य अप्रैल से मध्य जून और मध्य सितंबर से मध्य नवंबर में सबसे अधिक यात्री आते हैं।
कैसे पहुँचें
काठमांडू से पोखरा, फिर पोखरा से जोमसोम (हवाई अड्डा; उड़ान या सड़क), आगे जीप या बस से मुक्तिनाथ।

ध्यान दें: ऊँचाई अधिक है, ठंड और कम ऑक्सीजन का ध्यान रखें। भारतीय यात्री पासपोर्ट या मूल मतदाता पहचान पत्र रखें; आधार मान्य नहीं।

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