राजस्थान में बालाजी, श्याम बाबा, श्रीनाथजी, एकलिंगजी, ब्रह्मा जी और माता जी के अनेक प्रसिद्ध धाम हैं। यहाँ बाबा रामदेव जी, तेजाजी, गोगाजी और पाबूजी जैसे लोक देवताओं की भी गहरी मान्यता है। यह सूची सालासर बालाजी से शुरू होकर राज्य के प्रमुख धामों तक जाती है।
जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर बसे सालासर में हनुमान जी ‘सालासर बालाजी’ के रूप में विराजते हैं, जहाँ उनके दर्शन दाढ़ी-मूँछ वाले रूप में होते हैं। कथा है कि प्रतिमा असोटा गाँव में खेत जोतते समय निकली और भक्त मोहनदास जी को मिले स्वप्न-संकेत के बाद सालासर लाई गई।
विशेष पर्व
चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती) और आश्विन पूर्णिमा पर बड़े मेले भरते हैं; मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है; गर्मियों में दोपहर की धूप बहुत तेज़ होती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन सुजानगढ़ (लगभग 27 किमी), लक्ष्मणगढ़ (लगभग 31 किमी)। नज़दीकी हवाई अड्डा जयपुर (लगभग 180 किमी)।
सालासर-लक्ष्मणगढ़ मार्ग, सालासर, ज़िला चूरू, राजस्थान
सालासर धाम से लक्ष्मणगढ़ की ओर लगभग 2 किमी पर हनुमान जी की माता अंजनी का मंदिर है, जहाँ चतुर्भुज माता अंजनी की गोद में बाल हनुमान विराजमान हैं। बहुत से श्रद्धालु बालाजी के साथ माता अंजनी के दर्शन भी करते हैं। सुहागिनें सुखी दांपत्य की कामना से यहाँ पूजा करती हैं।
विशेष पर्व
हनुमान जयंती मुख्य पर्व है; सुहागिनें नारियल और सुहाग की सामग्री चढ़ाती हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
सालासर से लगभग 2 किमी (लक्ष्मणगढ़ मार्ग पर)। नज़दीकी रेलवे स्टेशन सुजानगढ़, हवाई अड्डा जयपुर।
खाटू में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की ‘श्याम’ रूप में पूजा होती है। कथा है कि बर्बरीक ने श्रीकृष्ण के माँगने पर अपना शीश दान किया, और कृष्ण ने उन्हें कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। मान्यता है कि उनका शीश श्याम कुंड से प्रकट हुआ।
विशेष पर्व
फाल्गुन मास में विशाल लक्खी मेला भरता है; बहुत से भक्त रींगस से निशान लेकर पैदल आते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है; फाल्गुन मेले में बहुत भारी भीड़ होती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन (लगभग 17 किमी)। हवाई अड्डा जयपुर (लगभग 90 किमी)।
ध्यान दें: फाल्गुन मेले में लंबी कतारें लगती हैं और काफ़ी पैदल चलना पड़ता है।
जीणमाता गाँव, अरावली की पहाड़ियाँ, ज़िला सीकर, राजस्थान
सीकर से लगभग 29 किमी दक्षिण में अरावली की पहाड़ियों पर जीण माता का प्राचीन मंदिर है; इन्हें शक्ति का रूप माना जाता है। लोककथा है कि जीण अपने भाई हर्ष से रूठकर काजल शिखर पर तप करने लगीं, और हर्ष ने पास के पर्वत पर भैरव की तपस्या की।
विशेष पर्व
चैत्र और आश्विन के नवरात्र में सबसे अधिक श्रद्धालु आते हैं।
कब जाएँ
नवरात्र के समय, या अक्टूबर से मार्च।
कैसे पहुँचें
सीकर से लगभग 29 किमी, जयपुर से लगभग 108 किमी। नज़दीकी बड़ा रेलवे स्टेशन सीकर, हवाई अड्डा जयपुर।
उदयपुरवाटी के पास अरावली की घाटी में सकराय गाँव में शाकम्भरी माता का प्राचीन मंदिर है, जिसे सकराय माता भी कहते हैं। गर्भगृह में ब्रह्माणी और रुद्राणी की आठ भुजाओं वाली जुड़वाँ प्रतिमाएँ हैं, जिनमें देवी सिंह पर सवार होकर महिषासुर का वध करती दिखाई गई हैं।
विशेष पर्व
दोनों नवरात्रों में विशेष भीड़ रहती है; भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मेला भरता है।
कब जाएँ
नवरात्र के समय, या अक्टूबर से मार्च।
कैसे पहुँचें
उदयपुरवाटी के पास। नज़दीकी रेलवे स्टेशन सीकर या झुंझुनूं, हवाई अड्डा जयपुर।
मान्यताओं में अंतर: जयपुर ज़िले में सांभर झील के पास शाकम्भरी माता का एक अलग प्राचीन मंदिर है; दोनों अलग स्थान हैं।
सीकर के पास अरावली के हर्ष पर्वत पर भगवान शिव के ‘हर्षनाथ’ रूप का 10वीं सदी का मंदिर है, जिसका शिलालेख 973 ई. का है। पुराना मंदिर अब खंडहर है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का संरक्षित स्मारक है। उसके पास 1718 में बना शिव मंदिर है, जहाँ आज भी पूजा होती है।
विशेष पर्व
पर्वत पर हर्ष भैरव का स्थान भी है, जहाँ भक्त दर्शन करते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च; गर्मियों में पहाड़ी पर धूप बहुत तेज़ होती है।
कैसे पहुँचें
सीकर से लगभग 14 किमी, पहाड़ी की चोटी पर। नज़दीकी रेलवे स्टेशन सीकर, हवाई अड्डा जयपुर।
ध्यान दें: पुराना मंदिर संरक्षित स्मारक है; अवशेषों और मूर्तियों को नुकसान न पहुँचाएँ।
लोहार्गल, उदयपुरवाटी के पास, ज़िला झुंझुनूं, राजस्थान
अरावली की घाटी में बसे लोहार्गल का अर्थ है ‘जहाँ लोहा गल जाए’। कथा है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने यहाँ सूर्य कुंड में स्नान किया और उनके अस्त्र-शस्त्र गल गए। कुंड के सामने प्राचीन सूर्य मंदिर है, और पास की पहाड़ी पर मालकेतु जी का मंदिर है।
विशेष पर्व
भाद्रपद में जन्माष्टमी से अमावस्या तक 24 कोस की मालकेतु परिक्रमा होती है; अमावस्या पर सूर्य कुंड में स्नान।
कब जाएँ
भाद्रपद की परिक्रमा के समय, या अक्टूबर से मार्च। वर्षा में यहाँ झरना बहता है।
कैसे पहुँचें
उदयपुरवाटी से लगभग 10 किमी, नवलगढ़ से लगभग 30 किमी, झुंझुनूं से लगभग 70 किमी। हवाई अड्डा जयपुर।
ध्यान दें: मालकेतु जी के मंदिर तक लगभग 400 सीढ़ियाँ हैं; परिक्रमा पहाड़ी रास्तों पर पैदल होती है।
झुंझुनूं शहर के इस मंदिर में नारायणी देवी की ‘रानी सती दादी’ के नाम से पूजा होती है। मारवाड़ी परिवारों में इनकी विशेष मान्यता है, और अनेक परिवार इन्हें कुलदेवी मानते हैं। सफ़ेद संगमरमर से बने मंदिर में देवी का प्रतीक त्रिशूल पूजा जाता है; परिसर में हनुमान, गणेश, शिव और ठाकुर जी के मंदिर भी हैं।
विशेष पर्व
भाद्रपद अमावस्या को मंदिर में विशेष पूजन होता है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
झुंझुनूं शहर में; नज़दीकी रेलवे स्टेशन झुंझुनूं। हवाई अड्डा जयपुर (झुंझुनूं से लगभग 190 किमी)।
ध्यान दें: भारत में सती प्रथा और उसका महिमामंडन कानून द्वारा प्रतिबंधित है।
दौसा ज़िले की पहाड़ियों के बीच बसा यह धाम हनुमान जी के बाल रूप ‘बालाजी’ को समर्पित है। यहाँ बालाजी के साथ प्रेतराज सरकार और कोतवाल भैरव की भी पूजा होती है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन और पूजा से संकट और ऊपरी बाधाएँ दूर होती हैं।
विशेष पर्व
मंगलवार और शनिवार विशेष दिन माने जाते हैं; इन दिनों सबसे अधिक भक्त आते हैं।
कब जाएँ
मंदिर साल भर खुला रहता है; अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन बांदीकुई (लगभग 35 किमी), दौसा (लगभग 45 किमी)। हवाई अड्डा जयपुर (लगभग 110 किमी)।
ध्यान दें: आस्था के साथ-साथ, किसी भी बीमारी में डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
जयपुर में अरावली की लक्ष्मण डूंगरी पहाड़ी पर यह हनुमान मंदिर है। 1960 के दशक में पंडित राधेलाल चौबे को यहाँ हनुमान जी की विशाल प्रतिमा मिली और उन्होंने पूजा शुरू की। कहा जाता है कि यहाँ पहाड़ों से बरसात का पानी बहकर आता था, इसी ‘खोले’ से मंदिर का नाम पड़ा।
विशेष पर्व
हनुमान जयंती और अन्नकूट (गोवर्धन पूजा) पर विशेष आयोजन होते हैं; अन्नकूट पर मेला भरता है।
कब जाएँ
साल भर; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
जयपुर शहर में दिल्ली बाईपास पर। नज़दीकी रेलवे स्टेशन जयपुर जंक्शन, हवाई अड्डा जयपुर।
जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में राधा-कृष्ण ‘गोविंद देव जी’ के रूप में विराजते हैं। मान्यता है कि यह विग्रह वृंदावन में रूप गोस्वामी को मिला था, और बाद में सवाई जयसिंह द्वितीय इसे जयपुर लाए। यह मंदिर गौड़ीय वैष्णव परंपरा से जुड़ा है।
विशेष पर्व
जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली, शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष उत्सव होते हैं।
कब जाएँ
साल भर; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
जयपुर शहर के बीच, सिटी पैलेस में। नज़दीकी रेलवे स्टेशन जयपुर जंक्शन, हवाई अड्डा जयपुर।
जयपुर में मोती डूंगरी महल की तलहटी में बना यह गणेश मंदिर 1761 में सेठ जयराम पालीवाल ने बनवाया। कथा है कि मेवाड़ के एक राजा बैलगाड़ी में गणेश प्रतिमा ला रहे थे, और तय था कि गाड़ी जहाँ पहली बार रुकेगी, वहीं प्रतिमा स्थापित होगी।
विशेष पर्व
गणेश चतुर्थी सबसे बड़ा उत्सव है; हर बुधवार मंदिर में मेले जैसा माहौल रहता है।
कब जाएँ
साल भर; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
जयपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी। हवाई अड्डा जयपुर।
जयपुर से लगभग 10 किमी पूर्व में अरावली की संकरी घाटी में गलताजी मंदिरों और पवित्र कुंडों का समूह है। पहाड़ से आने वाले प्राकृतिक झरने का पानी इन कुंडों में भरता है। परंपरा के अनुसार यहाँ गालव ऋषि ने तप किया था; यह सदियों से रामानंदी संप्रदाय के संतों का प्रमुख स्थान है।
विशेष पर्व
मकर संक्रांति पर कुंडों में स्नान के लिए हज़ारों श्रद्धालु आते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च; मकर संक्रांति पर विशेष स्नान।
कैसे पहुँचें
जयपुर से लगभग 10 किमी। नज़दीकी रेलवे स्टेशन जयपुर जंक्शन, हवाई अड्डा जयपुर।
ध्यान दें: परिसर में बंदर बहुत हैं; खाने-पीने का सामान संभालकर रखें।
आमेर महल परिसर में शिला देवी का मंदिर है, जहाँ देवी दुर्गा के रूप की पूजा होती है। शिला देवी को आमेर-जयपुर राजपरिवार की आराध्य देवी माना जाता है। प्रचलित मान्यता है कि यह प्रतिमा राजा मान सिंह प्रथम बंगाल से लाए थे।
विशेष पर्व
चैत्र और आश्विन नवरात्र में विशेष पूजा होती है और भक्तों की भीड़ रहती है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च; नवरात्र में विशेष दर्शन।
कैसे पहुँचें
जयपुर शहर के केंद्र से लगभग 11 किमी, आमेर में। नज़दीकी रेलवे स्टेशन जयपुर जंक्शन, हवाई अड्डा जयपुर।
ध्यान दें: मंदिर आमेर महल के भीतर ऊँचाई पर है; बुज़ुर्गों के लिए चढ़ाई थकाने वाली हो सकती है।
कैलादेवी गाँव, कालीसिल नदी के किनारे, ज़िला करौली, राजस्थान
करौली से लगभग 23 किमी दूर अरावली की पहाड़ियों में कालीसिल नदी के किनारे कैला देवी का मंदिर है। यहाँ कैला देवी और चामुंडा देवी की प्रतिमाएँ हैं; कैला देवी को महालक्ष्मी और योगमाया का रूप माना जाता है। वर्तमान मंदिर 18वीं सदी में करौली के महाराजा गोपाल सिंह ने बनवाया।
विशेष पर्व
चैत्र मास में लगभग पंद्रह दिन का वार्षिक मेला भरता है।
कब जाएँ
चैत्र मेले के समय, या अक्टूबर से मार्च।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन गंगापुर सिटी (लगभग 34 किमी), हिंडौन सिटी (लगभग 58 किमी)। हवाई अड्डा जयपुर (लगभग 170 किमी)।
सवाई माधोपुर के पास रणथंभौर दुर्ग में त्रिनेत्र (तीन नेत्रों वाले) गणेश जी का प्रसिद्ध मंदिर है। दुर्ग के गणेश, शिव और रामलला मंदिर 12वीं-13वीं सदी में करौली के लाल पत्थर से बने बताए जाते हैं। यह दुर्ग यूनेस्को विश्व धरोहर ‘राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग’ में शामिल है और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के भीतर है।
विशेष पर्व
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) पर तीन दिन का बड़ा मेला; हर बुधवार हज़ारों भक्त आते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है; गणेश चतुर्थी मेले में भारी भीड़।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर। हवाई अड्डा जयपुर (सवाई माधोपुर से लगभग 132 किमी)।
ध्यान दें: मंदिर रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के भीतर है; रास्ते में वन क्षेत्र के नियमों का पालन करें।
पुष्कर, पुष्कर सरोवर के पास, ज़िला अजमेर, राजस्थान
अजमेर से लगभग 14 किमी दूर पुष्कर तीर्थ में पवित्र पुष्कर सरोवर और ब्रह्मा जी का मंदिर है, जो भारत में ब्रह्मा जी के गिने-चुने मंदिरों में से एक है। सरोवर के पास की पहाड़ी पर ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री माता का मंदिर है, जहाँ से सरोवर का सुंदर दृश्य दिखता है।
विशेष पर्व
कार्तिक मास में पुष्कर मेला भरता है; कार्तिक पूर्णिमा पर सरोवर में स्नान का विशेष महत्व है।
कब जाएँ
अक्टूबर से फ़रवरी का मौसम अच्छा रहता है; कार्तिक मेले में भारी भीड़ रहती है।
कैसे पहुँचें
अजमेर से लगभग 14 किमी; नज़दीकी बड़ा रेलवे स्टेशन अजमेर जंक्शन। हवाई अड्डा किशनगढ़ या जयपुर।
ध्यान दें: सावित्री माता मंदिर पहाड़ी पर है; पैदल लगभग एक घंटे की चढ़ाई है, रोपवे भी है।
नाथद्वारा, बनास नदी के किनारे, ज़िला राजसमंद, राजस्थान
नाथद्वारा में गोवर्धन पर्वत उठाए हुए श्रीकृष्ण ‘श्रीनाथजी’ के रूप में पूजे जाते हैं; यह पुष्टिमार्ग (वल्लभ संप्रदाय) का प्रमुख तीर्थ है। यह विग्रह 1672 में ब्रज के गोवर्धन से मेवाड़ लाया गया। कथा है कि सिहाड़ गाँव में बैलगाड़ी का पहिया कीचड़ में धँस गया, तो वहीं मंदिर बनाया गया।
विशेष पर्व
जन्माष्टमी, दीपावली और होली के उत्सव प्रसिद्ध हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
उदयपुर से लगभग 48 किमी उत्तर-पूर्व। नज़दीकी हवाई अड्डा और बड़ा रेलवे स्टेशन उदयपुर में।
ध्यान दें: दर्शन दिन में तय झाँकियों (मंगला, श्रृंगार, राजभोग आदि) में ही होते हैं; बीच में पट बंद रहते हैं।
गढ़बोर गाँव में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप ‘चारभुजा नाथ’ का प्राचीन मंदिर है, जो लगभग 1444 ई. में बना बताया जाता है। प्रतिमा के चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म हैं। मान्यता है कि इस प्रतिमा की पूजा पांडवों ने की थी।
विशेष पर्व
जलझूलनी एकादशी (अगस्त-सितंबर) का मेला प्रसिद्ध है; फागोत्सव, जन्माष्टमी और अन्नकूट भी मनाए जाते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
उदयपुर से लगभग 112 किमी, कुंभलगढ़ से लगभग 32 किमी। नज़दीकी हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन उदयपुर।
कैलाशपुरी में भगवान शिव ‘एकलिंगजी’ के रूप में पूजे जाते हैं, जिन्हें मेवाड़ का कुलदेवता माना जाता है; मेवाड़ के महाराणा स्वयं को उनका दीवान मानते आए हैं। परंपरा के अनुसार पहला मंदिर 8वीं सदी में बप्पा रावल ने बनवाया, और बाद में महाराणा कुंभा और रायमल ने इसका पुनर्निर्माण कराया।
विशेष पर्व
महाशिवरात्रि और एकलिंगजी पाटोत्सव पर विशेष उत्सव होते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
उदयपुर के पास (गिर्वा तहसील)। नज़दीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा उदयपुर।
मंडफिया में श्रीकृष्ण ‘सांवलिया सेठ’ के रूप में पूजे जाते हैं। कथा है कि 1840 में भोलाराम नाम के ग्वाले को स्वप्न में संकेत मिला, और खुदाई में श्रीकृष्ण की तीन प्रतिमाएँ निकलीं। ये मंडफिया, भादसोड़ा और छापर (प्राकट्य स्थल) में विराजित हैं; तीनों मंदिर पास-पास हैं।
विशेष पर्व
देवझूलनी (जलझूलनी) एकादशी पर तीन दिन का बड़ा मेला; जन्माष्टमी और होली भी धूम से मनती हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन चित्तौड़गढ़ (लगभग 40 किमी)। हवाई अड्डा उदयपुर, डबोक (लगभग 60 किमी)।
बीकानेर से लगभग 30 किमी दूर देशनोक में करणी माता का मंदिर है; करणी माता 14वीं सदी की संत थीं, जिन्हें माँ दुर्गा का अवतार माना जाता है। मंदिर में हज़ारों चूहे रहते हैं, जिन्हें ‘काबा’ कहकर पवित्र माना जाता है। वर्तमान मंदिर बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने बनवाया था।
विशेष पर्व
चैत्र और आश्विन नवरात्र में मेले भरते हैं; सफ़ेद चूहे का दिखना बहुत शुभ माना जाता है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है; गर्मियों में बहुत तेज़ गर्मी पड़ती है।
कैसे पहुँचें
बीकानेर से लगभग 30 किमी; देशनोक में रेलवे स्टेशन है। नज़दीकी बड़ा शहर बीकानेर।
ध्यान दें: मंदिर में जूते-चप्पल बाहर उतारने होते हैं; चूहे खुले घूमते हैं, इसलिए ध्यान से चलें।
तनोट, भारत-पाकिस्तान सीमा के पास, ज़िला जैसलमेर, राजस्थान
जैसलमेर से लगभग 120 किमी दूर, भारत-पाकिस्तान सीमा के पास तनोट माता का मंदिर है; इन्हें देवी दुर्गा का स्थानीय रूप माना जाता है। मान्यता है कि 1965 और 1971 के युद्धों में मंदिर के आसपास गिरे बम नहीं फटे। ऐसे बम मंदिर के संग्रहालय में रखे गए हैं।
विशेष पर्व
नवरात्र में मंदिर दीपों से सजाया जाता है और विशेष पूजा होती है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च; गर्मियों में तापमान बहुत अधिक रहता है।
कैसे पहुँचें
जैसलमेर से लगभग 120 किमी। नज़दीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा जैसलमेर; जोधपुर हवाई अड्डा भी विकल्प है।
ध्यान दें: तनोट से आगे सीमा क्षेत्र देखने के लिए पहले से अधिकारियों की अनुमति ज़रूरी है।
रामदेवरा (रुणीचा), पोकरण के पास, ज़िला जैसलमेर, राजस्थान
पोकरण के पास रामदेवरा में लोक देवता बाबा रामदेव जी की समाधि और मंदिर है। बाबा रामदेव जी को सभी धर्मों के लोग मानते हैं; हिंदू और मुसलमान दोनों इन पर श्रद्धा रखते हैं। यहाँ की परंपरा 600 वर्ष से अधिक पुरानी मानी जाती है।
विशेष पर्व
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में विशाल रामदेवरा मेला भरता है; दूर-दूर से पदयात्री आते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च; भाद्रपद मेले में भारी भीड़ रहती है।
कैसे पहुँचें
पोकरण के पास; रामदेवरा में रेलवे स्टेशन है। हवाई अड्डा जैसलमेर या जोधपुर।
नागौर ज़िले का खरनाल गाँव लोक देवता वीर तेजाजी की जन्मभूमि माना जाता है, जहाँ उनका मंदिर है। तेजाजी को वचन निभाने वाले और गायों की रक्षा करने वाले वीर के रूप में याद किया जाता है। लोक आस्था में उन्हें साँप के काटने से रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है।
विशेष पर्व
भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) पर मेला और विशेष पूजा होती है।
कब जाएँ
तेजा दशमी के समय, या अक्टूबर से मार्च।
कैसे पहुँचें
नागौर शहर के पास; नज़दीकी रेलवे स्टेशन नागौर।
ध्यान दें: साँप के काटने पर तुरंत अस्पताल जाएँ; आस्था इलाज की जगह नहीं लेती।
हनुमानगढ़ ज़िले के गोगामेड़ी में लोक देवता गोगाजी (जाहरवीर) की समाधि पर मंदिर है। गोगाजी को हिंदू और मुसलमान दोनों मानते हैं; कई लोग इन्हें गोगा पीर कहते हैं। लोक आस्था में इन्हें साँपों से रक्षा करने वाले देवता माना जाता है।
विशेष पर्व
भाद्रपद कृष्ण नवमी (गोगा नवमी) के आसपास बड़ा मेला भरता है।
कब जाएँ
भाद्रपद मेले के समय, या अक्टूबर से मार्च।
कैसे पहुँचें
गोगामेड़ी में ही रेलवे स्टेशन है; तहसील नगर नोहर है, और ज़िला मुख्यालय हनुमानगढ़ लगभग 120 किमी दूर है।
ध्यान दें: साँप के काटने पर तुरंत अस्पताल जाएँ; आस्था इलाज की जगह नहीं लेती।
कोलू गाँव लोक देवता पाबूजी से जुड़ा धाम है, जहाँ उनका मंदिर है। पाबूजी 14वीं सदी के वीर थे, जिन्हें गायों, ऊँटों और कमज़ोरों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। लोक गायक ‘पाबूजी की फड़’ गाकर उनकी कथा सुनाते हैं।
विशेष पर्व
पाबूजी की फड़ (कपड़े पर चित्रित कथा) का रात में दीपक की रोशनी में गायन प्रसिद्ध लोक परंपरा है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
फलोदी क्षेत्र में; नज़दीकी बड़ा शहर फलोदी। हवाई अड्डा जोधपुर।