॥ तीर्थ दर्शन ॥

हनुमान जी के धाम

सालासर और मेहंदीपुर से लेकर अयोध्या की हनुमानगढ़ी और काशी के संकटमोचन तक, हनुमान जी के प्रसिद्ध धाम।

राजस्थान में

श्री सालासर बालाजी धाम

सालासर, सुजानगढ़ के पास, ज़िला चूरू, राजस्थान

जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर बसे सालासर में हनुमान जी ‘सालासर बालाजी’ के रूप में विराजते हैं, जहाँ उनके दर्शन दाढ़ी-मूँछ वाले रूप में होते हैं। कथा है कि प्रतिमा असोटा गाँव में खेत जोतते समय निकली और भक्त मोहनदास जी को मिले स्वप्न-संकेत के बाद सालासर लाई गई।

विशेष पर्व
चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती) और आश्विन पूर्णिमा पर बड़े मेले भरते हैं; मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है; गर्मियों में दोपहर की धूप बहुत तेज़ होती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन सुजानगढ़ (लगभग 27 किमी), लक्ष्मणगढ़ (लगभग 31 किमी)। नज़दीकी हवाई अड्डा जयपुर (लगभग 180 किमी)।
जानकारी के स्रोत

श्री मेहंदीपुर बालाजी धाम

मेहंदीपुर, ज़िला दौसा, राजस्थान

दौसा ज़िले की पहाड़ियों के बीच बसा यह धाम हनुमान जी के बाल रूप ‘बालाजी’ को समर्पित है। यहाँ बालाजी के साथ प्रेतराज सरकार और कोतवाल भैरव की भी पूजा होती है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन और पूजा से संकट और ऊपरी बाधाएँ दूर होती हैं।

विशेष पर्व
मंगलवार और शनिवार विशेष दिन माने जाते हैं; इन दिनों सबसे अधिक भक्त आते हैं।
कब जाएँ
मंदिर साल भर खुला रहता है; अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन बांदीकुई (लगभग 35 किमी), दौसा (लगभग 45 किमी)। हवाई अड्डा जयपुर (लगभग 110 किमी)।

ध्यान दें: आस्था के साथ-साथ, किसी भी बीमारी में डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

जानकारी के स्रोत

श्री खोले के हनुमान जी मंदिर

लक्ष्मण डूंगरी, दिल्ली बाईपास, जयपुर, राजस्थान

जयपुर में अरावली की लक्ष्मण डूंगरी पहाड़ी पर यह हनुमान मंदिर है। 1960 के दशक में पंडित राधेलाल चौबे को यहाँ हनुमान जी की विशाल प्रतिमा मिली और उन्होंने पूजा शुरू की। कहा जाता है कि यहाँ पहाड़ों से बरसात का पानी बहकर आता था, इसी ‘खोले’ से मंदिर का नाम पड़ा।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती और अन्नकूट (गोवर्धन पूजा) पर विशेष आयोजन होते हैं; अन्नकूट पर मेला भरता है।
कब जाएँ
साल भर; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
जयपुर शहर में दिल्ली बाईपास पर। नज़दीकी रेलवे स्टेशन जयपुर जंक्शन, हवाई अड्डा जयपुर।
जानकारी के स्रोत

अन्य प्रसिद्ध धाम

श्री हनुमानगढ़ी, अयोध्या

अयोध्या, उत्तर प्रदेश

अयोध्या का यह प्रसिद्ध हनुमान मंदिर किले जैसा चौकोर भवन है, जिसके चारों कोनों पर गोल बुर्ज हैं। मंदिर तक लगभग 76 सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं। मान्यता है कि हनुमान जी यहाँ गुफा में रहकर राम जन्मभूमि (रामकोट) की रक्षा करते थे।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती और राम नवमी प्रमुख पर्व; मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना।
कैसे पहुँचें
अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन; महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अयोध्या धाम।

ध्यान दें: मंदिर तक लगभग 76 सीढ़ियाँ हैं; वरिष्ठ यात्री धीरे चढ़ें।

जानकारी के स्रोत

श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर, वाराणसी

अस्सी नदी के पास, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

मान्यता है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस मंदिर की स्थापना उसी स्थान पर की जहाँ उन्हें हनुमान जी के दर्शन हुए थे। माना जाता है कि संकटमोचन हनुमानाष्टक की रचना भी इसी अवसर पर हुई। वर्तमान मंदिर 20वीं सदी के आरंभ में पंडित मदन मोहन मालवीय जी के प्रयास से बना।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती मुख्य पर्व; इसी समय (अप्रैल) होने वाला संकट मोचन संगीत समारोह प्रसिद्ध है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी स्टेशन वाराणसी जंक्शन (कैंट) और बनारस; हवाई अड्डा लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय (बाबतपुर)।
जानकारी के स्रोत

श्री बड़े हनुमान जी (लेटे हनुमान) मंदिर, प्रयागराज

संगम के पास, किले के निकट, ज़िला प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

संगम क्षेत्र में स्थित इस मंदिर में हनुमान जी की विशाल लेटी हुई मूर्ति है, इसलिए इसे लेटे हनुमान या बड़े हनुमान जी का मंदिर कहते हैं। मान्यता है कि बाढ़ के समय गंगा जी हनुमान जी को स्नान कराने आती हैं। संगम स्नान के बाद यहाँ दर्शन की परंपरा है।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती; माघ मेला और कुंभ के समय भारी भीड़ रहती है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च; माघ मास (जनवरी-फरवरी) में माघ मेले के साथ दर्शन।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी स्टेशन प्रयागराज जंक्शन; हवाई अड्डा प्रयागराज (बमरौली)।
जानकारी के स्रोत

श्री हनुमान धारा, चित्रकूट

चित्रकूट, वन के बीच पहाड़ी पर, ज़िला सतना, मध्य प्रदेश

चित्रकूट में वन के बीच पहाड़ी पर हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर है, जहाँ चट्टान से जलधारा बहती है। कथा है कि लंका दहन के बाद हनुमान जी की जलन शांत करने के लिए श्रीराम ने यह धारा प्रकट की। चित्रकूट यात्रा में यहाँ दर्शन का विशेष महत्व है।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती; चित्रकूट में दीपावली और अमावस्या के मेलों के समय भारी भीड़।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; गर्मियों में चढ़ाई कठिन।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन चित्रकूट धाम (कर्वी); रामघाट से सड़क द्वारा पहाड़ी के नीचे तक, फिर सीढ़ियाँ।

ध्यान दें: ऊपर तक सीढ़ियों की चढ़ाई है; वरिष्ठ यात्री आराम से चढ़ें और पानी साथ रखें।

जानकारी के स्रोत

श्री जाखू हनुमान मंदिर, शिमला

जाखू पहाड़ी, शिमला, हिमाचल प्रदेश

शिमला के सबसे ऊँचे स्थान जाखू पहाड़ी पर हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है, जहाँ 108 फुट ऊँची हनुमान प्रतिमा दूर से दिखाई देती है। कथा है कि संजीवनी बूटी लेने जाते समय हनुमान जी ने यहाँ विश्राम किया था।

विशेष पर्व
दशहरा और हनुमान जयंती पर विशेष उत्सव।
कब जाएँ
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर सुहावने; सर्दियों में बर्फ़ गिर सकती है।
कैसे पहुँचें
शिमला रेलवे स्टेशन (कालका से छोटी लाइन); हवाई अड्डा शिमला (जुब्बड़हट्टी)। रिज मैदान से ऊपर चढ़ाई।

ध्यान दें: यहाँ बंदर बहुत हैं; चश्मा, थैले और खाने का सामान सँभालकर रखें।

जानकारी के स्रोत

श्री कष्टभंजन हनुमान जी मंदिर, सारंगपुर (सालंगपुर)

सारंगपुर (सालंगपुर), ज़िला बोटाद, गुजरात

स्वामीनारायण संप्रदाय का यह प्रसिद्ध हनुमान मंदिर कष्टभंजन देव के नाम से जाना जाता है; इसकी स्थापना सद्गुरु गोपालानंद स्वामी ने की थी। मान्यता है कि यहाँ दर्शन से संकट और बाधाएँ दूर होती हैं। परिसर में हनुमान जी की 54 फुट ऊँची प्रतिमा भी है।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती और काली चौदस पर विशेष पूजा; शनिवार को भारी भीड़।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन बोटाद; हवाई अड्डा अहमदाबाद या भावनगर।
जानकारी के स्रोत

श्री हनुमान दांडी मंदिर, बेट द्वारका

बेट द्वारका द्वीप, ज़िला देवभूमि द्वारका, गुजरात

बेट द्वारका द्वीप पर स्थित इस मंदिर की विशेषता है कि यहाँ हनुमान जी के साथ उनके पुत्र मकरध्वज की भी पूजा होती है। बेट द्वारका ओखा के तट से लगभग 2 किमी दूर द्वीप है, जहाँ द्वारकाधीश और श्री केशवराय जी के प्रमुख कृष्ण मंदिर भी हैं।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती; द्वारका यात्रा के साथ बेट द्वारका दर्शन की परंपरा।
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी का मौसम सबसे अच्छा।
कैसे पहुँचें
द्वारका से लगभग 25 किमी उत्तर; ओखा से सुदर्शन सेतु पुल द्वारा सड़क मार्ग; नज़दीकी स्टेशन ओखा और द्वारका।
जानकारी के स्रोत

अंजनेरी पर्वत (हनुमान जन्मस्थली), नासिक

अंजनेरी, नासिक-त्र्यंबकेश्वर मार्ग, महाराष्ट्र

नासिक से त्र्यंबकेश्वर मार्ग पर स्थित अंजनेरी पर्वत का नाम हनुमान जी की माता अंजनी के नाम पर है। मान्यता है कि यहीं हनुमान जी का जन्म हुआ था। पर्वत पर पैदल चढ़ाई का मार्ग है और वर्षा ऋतु में यह स्थान बहुत लोकप्रिय रहता है।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती पर विशेष पूजा और भीड़।
कब जाएँ
जुलाई से फरवरी; वर्षा ऋतु में हरियाली रहती है, पर रास्ता फिसलन भरा हो सकता है।
कैसे पहुँचें
नासिक से त्र्यंबक रोड पर लगभग 20 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन नासिक रोड; हवाई अड्डा ओझर (नासिक)।

ध्यान दें: ऊपर तक पैदल चढ़ाई है; वरिष्ठ यात्री अपनी क्षमता के अनुसार ही जाएँ।

मान्यताओं में अंतर: हनुमान जी की जन्मभूमि के रूप में कर्नाटक में हम्पी के पास अंजनाद्रि पहाड़ी और आंध्र प्रदेश में तिरुमला की अंजनाद्रि पहाड़ी के भी दावे हैं; ये सभी स्थानीय मान्यताएँ हैं।

जानकारी के स्रोत

अंजनाद्रि पर्वत (आंजनेय मंदिर), हम्पी

हम्पी के पास, गंगावती तालुका, ज़िला कोप्पल, कर्नाटक

हम्पी के आसपास का क्षेत्र रामायण के किष्किंधा से जोड़ा जाता है, जहाँ श्रीराम और लक्ष्मण की भेंट हनुमान जी और सुग्रीव से हुई। स्थानीय मान्यता है कि अंजनाद्रि पहाड़ी हनुमान जी की जन्मभूमि है। पहाड़ी की चोटी पर आंजनेय मंदिर है, जहाँ सैकड़ों सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचते हैं।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती पर विशेष पूजा और भीड़।
कब जाएँ
अक्टूबर से फरवरी का मौसम सुहावना; गर्मियों में चढ़ाई कठिन।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी शहर और रेलवे स्टेशन होसपेटे, जो हम्पी से लगभग 13 किमी है; हम्पी से तुंगभद्रा पार करके सड़क मार्ग।

ध्यान दें: चोटी तक लंबी सीढ़ियाँ हैं; सुबह या शाम को चढ़ें और पानी साथ रखें।

मान्यताओं में अंतर: हनुमान जी की जन्मभूमि के रूप में महाराष्ट्र में नासिक के पास अंजनेरी और आंध्र प्रदेश में तिरुमला की अंजनाद्रि पहाड़ी के भी दावे हैं; ये सभी स्थानीय मान्यताएँ हैं।

जानकारी के स्रोत

प्राचीन श्री हनुमान मंदिर, कनॉट प्लेस

बाबा खड़क सिंह मार्ग, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली, दिल्ली

कनॉट प्लेस के पास स्थित यह प्राचीन मंदिर दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में है, जहाँ हनुमान जी बाल रूप में विराजते हैं। माना जाता है कि आमेर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने इसे 18वीं सदी में बनवाया; बाद में इसका जीर्णोद्धार हुआ। यहाँ 1964 से श्री राम जय राम जय जय राम का अखंड जाप चल रहा है।

विशेष पर्व
हनुमान जयंती; मंगलवार और शनिवार को भारी भीड़।
कब जाएँ
पूरे वर्ष दर्शन; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी मेट्रो स्टेशन राजीव चौक; नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पास है; हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय।
जानकारी के स्रोत