॥ तीर्थ दर्शन ॥

गणेश जी के धाम

अष्टविनायक और गणेश जी के प्रसिद्ध मंदिर, मुंबई के सिद्धिविनायक से रणथंभौर के त्रिनेत्र गणेश तक।

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अष्टविनायक

श्री मयूरेश्वर (मोरेश्वर) गणपति, मोरगांव

मोरगांव, बारामती तालुका, ज़िला पुणे, महाराष्ट्र

अष्टविनायक यात्रा यहीं से शुरू होती है और अंत में फिर यहीं के दर्शन से पूरी मानी जाती है। कथा है कि गणेश जी ने मोर पर सवार होकर सिंधु नामक असुर का वध किया, इसलिए वे मयूरेश्वर कहलाए। मान्यता है कि सिंदूर से ढकी यह मूर्ति स्वयंभू है।

विशेष पर्व
भाद्रपद गणेश चतुर्थी, माघ शुक्ल चतुर्थी (गणेश जयंती), विजयादशमी और सोमवती अमावस्या पर मेला
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन जेजुरी (लगभग 17 किमी); हवाई अड्डा पुणे। पुणे से सड़क मार्ग से लगभग 65 किमी।
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श्री सिद्धिविनायक, सिद्धटेक

सिद्धटेक, कर्जत तालुका (भीमा नदी के किनारे), ज़िला अहिल्यानगर (पहले अहमदनगर), महाराष्ट्र

पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने यहाँ गणेश जी की उपासना से सिद्धि पाकर मधु और कैटभ असुरों का वध किया। अष्टविनायकों में केवल यहीं की मूर्ति की सूंड दाईं ओर मुड़ी है। वर्तमान मंदिर 18वीं सदी में अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया।

विशेष पर्व
भाद्रपद गणेश चतुर्थी, माघी गणेश जयंती; विजयादशमी और सोमवती अमावस्या पर मेला
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन दौंड (लगभग 19 किमी); हवाई अड्डा पुणे। पुणे से सड़क मार्ग से लगभग 100 किमी।

ध्यान दें: भक्त पहाड़ी की सात परिक्रमा करते हैं; परिक्रमा मार्ग कच्चा है और उसमें कांटेदार झाड़ियाँ हैं।

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श्री बल्लालेश्वर, पाली

पाली, सुधागढ़ तालुका (सरसगढ़ किले और अंबा नदी के बीच), ज़िला रायगड, महाराष्ट्र

अष्टविनायकों में यह अकेला मंदिर है जो एक भक्त के नाम से जाना जाता है। कथा है कि बालक बल्लाल की भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी यहाँ प्रकट हुए और उसी के नाम से बल्लालेश्वर कहलाए। पास ही धुंडी विनायक की स्वयंभू मूर्ति है, जिसकी पूजा बल्लालेश्वर से पहले होती है।

विशेष पर्व
भाद्रपद गणेश चतुर्थी; ज्येष्ठ प्रतिपदा से पंचमी तक धुंडी विनायक जन्मोत्सव
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; जून से सितंबर कोंकण में भारी वर्षा होती है, अक्टूबर से फरवरी सुखद।
कैसे पहुँचें
रेलवे स्टेशन रोहा (लगभग 28 किमी); हवाई अड्डा मुंबई या पुणे। पुणे से खोपोली होकर लगभग 111 किमी।
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श्री वरदविनायक, महड

महड गाँव, खालापुर तालुका (खोपोली के पास), ज़िला रायगड, महाराष्ट्र

मान्यता है कि यहाँ की स्वयंभू मूर्ति 1690 में पास की झील में मिली थी। 1725 में पेशवा के सेनापति रामजी महादेव बिवलकर ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। यहाँ भक्त गर्भगृह में जाकर स्वयं दर्शन करते हैं, और कहा जाता है कि मंदिर का दीपक 1892 से लगातार जल रहा है।

विशेष पर्व
माघ शुक्ल चतुर्थी (माघी उत्सव) पर बहुत बड़ी संख्या में भक्त आते हैं; भाद्रपद गणेश चतुर्थी
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; जून से सितंबर कोंकण में भारी वर्षा होती है, अक्टूबर से फरवरी सुखद।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन खोपोली (लगभग 7 किमी), कर्जत भी पास है; हवाई अड्डा मुंबई या पुणे।

ध्यान दें: ध्यान दें: यह खोपोली के पास का महड गाँव है; रायगड ज़िले का महाड नगर अलग स्थान है।

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श्री चिंतामणि, थेऊर

थेऊर, हवेली तालुका (मुला-मुठा और भीमा नदी के संगम के पास), ज़िला पुणे, महाराष्ट्र

मुद्गल पुराण की कथा है कि गणेश जी ने लोभी राजा गण से चिंतामणि रत्न छुड़ाकर कपिल मुनि को लौटाया और यहीं रहकर चिंतामणि कहलाए। मान्यता है कि यहाँ दर्शन से मन की चिंता दूर होती है। पेशवा माधवराव प्रथम ने यहाँ लकड़ी का सभामंडप बनवाया और अपने अंतिम दिन यहीं बिताए।

विशेष पर्व
भाद्रपद में गणेश प्रकटोत्सव, माघ में माघोत्सव (गणेश जयंती), कार्तिक में रमा-माधव पुण्योत्सव
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
पुणे से लगभग 25 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे।
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श्री गिरिजात्मज, लेण्याद्री

लेण्याद्री पहाड़ी, जुन्नर से लगभग 5 किमी उत्तर, ज़िला पुणे, महाराष्ट्र

यह मंदिर पहाड़ी पर बने बौद्ध गुफा-समूह की एक गुफा में है; ये गुफाएँ पहली से तीसरी सदी की मानी जाती हैं। कथा है कि माता पार्वती ने यहाँ पुत्र के लिए 12 वर्ष तप किया, इसलिए गणेश जी गिरिजात्मज (गिरिजा के पुत्र) कहलाए। मूर्ति गुफा की दीवार पर ही उभरी हुई है।

विशेष पर्व
गणेश चतुर्थी और गणेश जयंती पर विशेष उत्सव
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; वर्षा में सीढ़ियाँ फिसलन भरी हो सकती हैं, अक्टूबर से फरवरी अच्छा समय है।
कैसे पहुँचें
जुन्नर से लगभग 5 किमी; बड़ा रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे।

ध्यान दें: मंदिर तक लगभग 300 पत्थर की सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं; गुफाएँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन हैं।

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श्री विघ्नेश्वर (विघ्नहर), ओझर

ओझर, जुन्नर तालुका (कुकडी नदी के किनारे), ज़िला पुणे, महाराष्ट्र

कथा है कि राजा अभिनंदन के यज्ञ में बाधा डालने वाले विघ्नासुर को गणेश जी ने यहाँ पराजित किया, और असुर की विनती पर वे विघ्नेश्वर कहलाए। मंदिर का शिखर सोने की परत से ढका है। कहा जाता है कि वसई की जीत के बाद चिमाजी अप्पा ने इसका जीर्णोद्धार कराया।

विशेष पर्व
कार्तिक पूर्णिमा से पाँच दिन का दीपमाला उत्सव; गणेश चतुर्थी और गणेश जयंती
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
पुणे से लगभग 85 किमी, नारायणगांव से लगभग 9 किमी; बड़ा रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे।

ध्यान दें: ध्यान दें: नासिक ज़िले का ओझर (हवाई अड्डे वाला) अलग स्थान है।

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श्री महागणपति, रांजणगांव

रांजणगांव, शिरूर तालुका (पुणे-अहिल्यानगर राजमार्ग पर), महाराष्ट्र

मान्यता है कि भगवान शिव ने त्रिपुरासुर से युद्ध से पहले यहाँ गणेश जी की पूजा की, और गणेश जी ने उन्हें विजय में सहायता दी। अष्टविनायक यात्रा में यह अंतिम मंदिर है; इसके बाद भक्त फिर मोरगांव जाकर यात्रा पूरी करते हैं।

विशेष पर्व
भाद्रपद गणेश चतुर्थी पर विशेष उत्सव
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
पुणे से लगभग 50 किमी, पुणे-अहिल्यानगर राजमार्ग पर; बड़ा रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे।
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राजस्थान में

श्री मोती डूंगरी गणेश मंदिर

मोती डूंगरी, जयपुर, राजस्थान

जयपुर में मोती डूंगरी महल की तलहटी में बना यह गणेश मंदिर 1761 में सेठ जयराम पालीवाल ने बनवाया। कथा है कि मेवाड़ के एक राजा बैलगाड़ी में गणेश प्रतिमा ला रहे थे, और तय था कि गाड़ी जहाँ पहली बार रुकेगी, वहीं प्रतिमा स्थापित होगी।

विशेष पर्व
गणेश चतुर्थी सबसे बड़ा उत्सव है; हर बुधवार मंदिर में मेले जैसा माहौल रहता है।
कब जाएँ
साल भर; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
जयपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी। हवाई अड्डा जयपुर।
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श्री त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथंभौर

रणथंभौर दुर्ग, ज़िला सवाई माधोपुर, राजस्थान

सवाई माधोपुर के पास रणथंभौर दुर्ग में त्रिनेत्र (तीन नेत्रों वाले) गणेश जी का प्रसिद्ध मंदिर है। दुर्ग के गणेश, शिव और रामलला मंदिर 12वीं-13वीं सदी में करौली के लाल पत्थर से बने बताए जाते हैं। यह दुर्ग यूनेस्को विश्व धरोहर ‘राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग’ में शामिल है और रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के भीतर है।

विशेष पर्व
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) पर तीन दिन का बड़ा मेला; हर बुधवार हज़ारों भक्त आते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है; गणेश चतुर्थी मेले में भारी भीड़।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर। हवाई अड्डा जयपुर (सवाई माधोपुर से लगभग 132 किमी)।

ध्यान दें: मंदिर रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के भीतर है; रास्ते में वन क्षेत्र के नियमों का पालन करें।

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अन्य प्रसिद्ध धाम

श्री सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई

प्रभादेवी, मुंबई, महाराष्ट्र

मंदिर 19 नवंबर 1801 को प्रतिष्ठित हुआ; इसे लक्ष्मण विठु पाटिल और देउबाई पाटिल से जोड़ा जाता है। काले पत्थर की चतुर्भुज मूर्ति की सूंड दाईं ओर मुड़ी है, साथ में रिद्धि और सिद्धि हैं और माथे पर तीसरा नेत्र अंकित है। आज इसका प्रबंधन श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट करता है।

विशेष पर्व
मंगलवार, अंगारकी चतुर्थी और माघी गणेश जयंती पर विशेष भीड़; भाद्रपद गणेश चतुर्थी
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; जून से सितंबर मुंबई में भारी वर्षा होती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी बड़ा रेलवे स्टेशन दादर; हवाई अड्डा मुंबई (छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय)।
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श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति, पुणे

बुधवार पेठ, पुणे, महाराष्ट्र

पुणे के मिठाई व्यापारी दगडूशेठ हलवाई और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने प्लेग महामारी में संतान खोने के बाद गणपति की स्थापना की। लोकमान्य तिलक के सार्वजनिक गणेशोत्सव (1893) से यह गणपति आरंभ से जुड़े रहे। वर्तमान मूर्ति 1968 में प्रतिष्ठित हुई।

विशेष पर्व
भाद्रपद में दस दिन का गणेशोत्सव सबसे बड़ा पर्व; संकष्टी चतुर्थी पर महाभिषेक
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; भाद्रपद के दस दिन के गणेशोत्सव में मंदिर की विशेष सजावट होती है।
कैसे पहुँचें
पुणे रेलवे स्टेशन लगभग 4 किमी; पुणे हवाई अड्डा लगभग 11 किमी।
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श्री खजराना गणेश मंदिर, इंदौर

खजराना, इंदौर, मध्य प्रदेश

इंदौर के खजराना क्षेत्र का यह गणेश मंदिर शहर के प्रसिद्ध मंदिरों में है। कथा है कि औरंगज़ेब के समय मूर्ति को बचाने के लिए कुएँ में छिपाया गया था; एक पंडित को स्वप्न में संकेत मिलने पर अहिल्याबाई होलकर ने इसे निकलवाकर मंदिर बनवाया। मन्नत माँगते समय भक्त उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं और पूरी होने पर सीधा।

विशेष पर्व
गणेश चतुर्थी के दस दिन; माघी तिल चतुर्थी पर तीन दिन का मेला; बुधवार को विशेष पूजा
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
इंदौर रेलवे स्टेशन लगभग 5 किमी; हवाई अड्डा इंदौर (देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय)।
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श्री चिंतामन गणेश मंदिर, उज्जैन

चिंतामन गणेश, शिप्रा नदी के पार, उज्जैन, मध्य प्रदेश

उज्जैन के पास शिप्रा नदी के पार बना यह गणेश जी का प्राचीन मंदिर है। गर्भगृह में चिंतामन, इच्छामन और सिद्धिविनायक की तीन मूर्तियाँ हैं; मुख्य मूर्ति स्वयंभू मानी जाती है। कथा है कि वनवास के समय राम, लक्ष्मण और सीता ने यहाँ इनकी पूजा की। सभामंडप के नक्काशीदार खंभे परमार काल के माने जाते हैं।

विशेष पर्व
गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक उत्सव; हर बुधवार विशेष दर्शन के लिए भीड़
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
उज्जैन शहर से लगभग 6-7 किमी; नज़दीकी बड़ा रेलवे स्टेशन उज्जैन जंक्शन; हवाई अड्डा इंदौर।
जानकारी के स्रोत

श्री वरसिद्धि विनायक मंदिर, काणिपाकम

काणिपाकम, इराला मंडल, ज़िला चित्तूर, आंध्र प्रदेश

यहाँ गणेश जी की मूर्ति जल से भरे कुएँ में है, जिसे स्वयंभू माना जाता है। कथा है कि कुआँ खोदते तीन भाइयों (गूंगे, बहरे, अंधे) को मूर्ति मिली और वे ठीक हुए; मान्यता है कि मूर्ति का आकार बढ़ रहा है। विवादों में यहाँ सत्य की शपथ (सत्य प्रमाणम) की परंपरा है। मंदिर चोल काल का माना जाता है।

विशेष पर्व
विनायक चतुर्थी से शुरू होकर 21 दिन चलने वाला वार्षिक ब्रह्मोत्सव, जिसमें रोज़ अलग वाहन पर शोभायात्रा निकलती है
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; नवंबर से फरवरी का मौसम सुहावना रहता है, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी पड़ती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन चित्तूर (लगभग 11 किमी); तिरुपति से सड़क मार्ग से लगभग 68 किमी; हवाई अड्डा तिरुपति।
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श्री उच्ची पिल्लैयार मंदिर, रॉकफोर्ट, तिरुचिरापल्ली

रॉकफोर्ट (मलैकोट्टै) की चोटी, तिरुचिरापल्ली (त्रिची), तमिलनाडु

त्रिची के बीच लगभग 83 मीटर ऊँची चट्टान की चोटी पर गणेश जी का यह मंदिर है। नीचे माणिक्क विनायगर और चट्टान पर ही शिव का तायुमानवर मंदिर है। कथा है कि लंका ले जाई जा रही रंगनाथ जी की मूर्ति को गणेश जी ने बालक रूप में श्रीरंगम में रख दिया और भागकर इस चट्टान पर चढ़ गए।

विशेष पर्व
विनायक चतुर्थी मुख्य पर्व है; इस दिन उच्ची पिल्लैयार और माणिक्क विनायगर को विशाल कोझुकट्टै (मोदक) का भोग लगता है
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; दिसंबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है।
कैसे पहुँचें
तिरुचिरापल्ली जंक्शन रेलवे स्टेशन लगभग 3 किमी; तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लगभग 12 किमी।

ध्यान दें: चोटी तक चट्टान में कटी 300 से अधिक खड़ी सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं।

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