महाराष्ट्र में पुणे के आसपास स्थित गणेश जी के आठ प्राचीन मंदिर, जिनकी मूर्तियाँ स्वयंभू (अपने आप प्रकट) मानी जाती हैं। इनमें पाँच पुणे ज़िले में, दो रायगड ज़िले में और एक अहिल्यानगर ज़िले में है। परंपरा के अनुसार यात्रा मोरगांव से शुरू होती है और रांजणगांव के बाद फिर मोरगांव के दर्शन से पूरी होती है; इनसे जुड़ी कथाएँ गणेश पुराण और मुद्गल पुराण में मिलती हैं।
अष्टविनायक यात्रा यहीं से शुरू होती है और अंत में फिर यहीं के दर्शन से पूरी मानी जाती है। कथा है कि गणेश जी ने मोर पर सवार होकर सिंधु नामक असुर का वध किया, इसलिए वे मयूरेश्वर कहलाए। मान्यता है कि सिंदूर से ढकी यह मूर्ति स्वयंभू है।
विशेष पर्व
भाद्रपद गणेश चतुर्थी, माघ शुक्ल चतुर्थी (गणेश जयंती), विजयादशमी और सोमवती अमावस्या पर मेला
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन जेजुरी (लगभग 17 किमी); हवाई अड्डा पुणे। पुणे से सड़क मार्ग से लगभग 65 किमी।
सिद्धटेक, कर्जत तालुका (भीमा नदी के किनारे), ज़िला अहिल्यानगर (पहले अहमदनगर), महाराष्ट्र
पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने यहाँ गणेश जी की उपासना से सिद्धि पाकर मधु और कैटभ असुरों का वध किया। अष्टविनायकों में केवल यहीं की मूर्ति की सूंड दाईं ओर मुड़ी है। वर्तमान मंदिर 18वीं सदी में अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया।
विशेष पर्व
भाद्रपद गणेश चतुर्थी, माघी गणेश जयंती; विजयादशमी और सोमवती अमावस्या पर मेला
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन दौंड (लगभग 19 किमी); हवाई अड्डा पुणे। पुणे से सड़क मार्ग से लगभग 100 किमी।
ध्यान दें: भक्त पहाड़ी की सात परिक्रमा करते हैं; परिक्रमा मार्ग कच्चा है और उसमें कांटेदार झाड़ियाँ हैं।
पाली, सुधागढ़ तालुका (सरसगढ़ किले और अंबा नदी के बीच), ज़िला रायगड, महाराष्ट्र
अष्टविनायकों में यह अकेला मंदिर है जो एक भक्त के नाम से जाना जाता है। कथा है कि बालक बल्लाल की भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी यहाँ प्रकट हुए और उसी के नाम से बल्लालेश्वर कहलाए। पास ही धुंडी विनायक की स्वयंभू मूर्ति है, जिसकी पूजा बल्लालेश्वर से पहले होती है।
विशेष पर्व
भाद्रपद गणेश चतुर्थी; ज्येष्ठ प्रतिपदा से पंचमी तक धुंडी विनायक जन्मोत्सव
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; जून से सितंबर कोंकण में भारी वर्षा होती है, अक्टूबर से फरवरी सुखद।
कैसे पहुँचें
रेलवे स्टेशन रोहा (लगभग 28 किमी); हवाई अड्डा मुंबई या पुणे। पुणे से खोपोली होकर लगभग 111 किमी।
महड गाँव, खालापुर तालुका (खोपोली के पास), ज़िला रायगड, महाराष्ट्र
मान्यता है कि यहाँ की स्वयंभू मूर्ति 1690 में पास की झील में मिली थी। 1725 में पेशवा के सेनापति रामजी महादेव बिवलकर ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। यहाँ भक्त गर्भगृह में जाकर स्वयं दर्शन करते हैं, और कहा जाता है कि मंदिर का दीपक 1892 से लगातार जल रहा है।
विशेष पर्व
माघ शुक्ल चतुर्थी (माघी उत्सव) पर बहुत बड़ी संख्या में भक्त आते हैं; भाद्रपद गणेश चतुर्थी
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; जून से सितंबर कोंकण में भारी वर्षा होती है, अक्टूबर से फरवरी सुखद।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन खोपोली (लगभग 7 किमी), कर्जत भी पास है; हवाई अड्डा मुंबई या पुणे।
ध्यान दें: ध्यान दें: यह खोपोली के पास का महड गाँव है; रायगड ज़िले का महाड नगर अलग स्थान है।
थेऊर, हवेली तालुका (मुला-मुठा और भीमा नदी के संगम के पास), ज़िला पुणे, महाराष्ट्र
मुद्गल पुराण की कथा है कि गणेश जी ने लोभी राजा गण से चिंतामणि रत्न छुड़ाकर कपिल मुनि को लौटाया और यहीं रहकर चिंतामणि कहलाए। मान्यता है कि यहाँ दर्शन से मन की चिंता दूर होती है। पेशवा माधवराव प्रथम ने यहाँ लकड़ी का सभामंडप बनवाया और अपने अंतिम दिन यहीं बिताए।
विशेष पर्व
भाद्रपद में गणेश प्रकटोत्सव, माघ में माघोत्सव (गणेश जयंती), कार्तिक में रमा-माधव पुण्योत्सव
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
पुणे से लगभग 25 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे।
लेण्याद्री पहाड़ी, जुन्नर से लगभग 5 किमी उत्तर, ज़िला पुणे, महाराष्ट्र
यह मंदिर पहाड़ी पर बने बौद्ध गुफा-समूह की एक गुफा में है; ये गुफाएँ पहली से तीसरी सदी की मानी जाती हैं। कथा है कि माता पार्वती ने यहाँ पुत्र के लिए 12 वर्ष तप किया, इसलिए गणेश जी गिरिजात्मज (गिरिजा के पुत्र) कहलाए। मूर्ति गुफा की दीवार पर ही उभरी हुई है।
विशेष पर्व
गणेश चतुर्थी और गणेश जयंती पर विशेष उत्सव
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; वर्षा में सीढ़ियाँ फिसलन भरी हो सकती हैं, अक्टूबर से फरवरी अच्छा समय है।
कैसे पहुँचें
जुन्नर से लगभग 5 किमी; बड़ा रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे।
ध्यान दें: मंदिर तक लगभग 300 पत्थर की सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं; गुफाएँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन हैं।
ओझर, जुन्नर तालुका (कुकडी नदी के किनारे), ज़िला पुणे, महाराष्ट्र
कथा है कि राजा अभिनंदन के यज्ञ में बाधा डालने वाले विघ्नासुर को गणेश जी ने यहाँ पराजित किया, और असुर की विनती पर वे विघ्नेश्वर कहलाए। मंदिर का शिखर सोने की परत से ढका है। कहा जाता है कि वसई की जीत के बाद चिमाजी अप्पा ने इसका जीर्णोद्धार कराया।
विशेष पर्व
कार्तिक पूर्णिमा से पाँच दिन का दीपमाला उत्सव; गणेश चतुर्थी और गणेश जयंती
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
पुणे से लगभग 85 किमी, नारायणगांव से लगभग 9 किमी; बड़ा रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे।
ध्यान दें: ध्यान दें: नासिक ज़िले का ओझर (हवाई अड्डे वाला) अलग स्थान है।
रांजणगांव, शिरूर तालुका (पुणे-अहिल्यानगर राजमार्ग पर), महाराष्ट्र
मान्यता है कि भगवान शिव ने त्रिपुरासुर से युद्ध से पहले यहाँ गणेश जी की पूजा की, और गणेश जी ने उन्हें विजय में सहायता दी। अष्टविनायक यात्रा में यह अंतिम मंदिर है; इसके बाद भक्त फिर मोरगांव जाकर यात्रा पूरी करते हैं।
विशेष पर्व
भाद्रपद गणेश चतुर्थी पर विशेष उत्सव
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम यात्रा के लिए सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
पुणे से लगभग 50 किमी, पुणे-अहिल्यानगर राजमार्ग पर; बड़ा रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा पुणे।