मान्यता है कि यहीं कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, और गर्भगृह मंदिर उसी कारागार कक्ष के स्थान पर माना जाता है। परिसर में केशवदेव मंदिर (1958) और राधा-कृष्ण का भागवत भवन (1982) भी हैं। आधुनिक परिसर 20वीं सदी में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रयासों से बना।
विशेष पर्व
जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का जन्मोत्सव सबसे बड़ा पर्व; राधाष्टमी, होली और दीपावली भी।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; जन्माष्टमी और होली पर विशेष उत्सव।
कैसे पहुँचें
मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन (दिल्ली-मुंबई मुख्य मार्ग); हवाई अड्डा आगरा (लगभग 60 किमी) या दिल्ली (लगभग 160 किमी)।
कथा है कि स्वामी हरिदास जी की भक्ति से निधिवन में ठाकुर बांके बिहारी जी प्रकट हुए, जिन्हें राधा-कृष्ण का संयुक्त रूप माना जाता है। वर्तमान मंदिर 1862 में बना। यहाँ दर्शन के समय बार-बार पर्दा डाला जाता है और मंदिर में घंटियाँ नहीं लगाई जातीं।
विशेष पर्व
अक्षय तृतीया पर चरण दर्शन, हरियाली तीज पर हिंडोला, शरद पूर्णिमा पर मुरली धारण, जन्माष्टमी।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; होली (फूलों की होली) और जन्माष्टमी पर भारी भीड़।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी बड़ा स्टेशन मथुरा जंक्शन, जो लगभग 10-15 किमी दूर है; हवाई अड्डा आगरा (लगभग 70 किमी) या दिल्ली (लगभग 150 किमी)।
बरसाना, भानुगढ़ पहाड़ी पर, ज़िला मथुरा, उत्तर प्रदेश
मान्यता है कि बरसाना राजा वृषभानु की पुत्री राधा रानी की जन्मभूमि है। भानुगढ़ पहाड़ी पर बना यह मंदिर श्रीजी मंदिर कहलाता है, जहाँ 200 से अधिक सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचते हैं। यहाँ राधा जी की पूजा श्रीकृष्ण के साथ लाडली लाल रूप में होती है।
विशेष पर्व
राधाष्टमी और फरवरी-मार्च की लट्ठमार होली सबसे प्रसिद्ध; जन्माष्टमी और शरद पूर्णिमा भी।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; राधाष्टमी और लट्ठमार होली पर भारी भीड़।
कैसे पहुँचें
मथुरा से लगभग 40 किमी; नज़दीकी बड़ा स्टेशन मथुरा जंक्शन; हवाई अड्डा आगरा या दिल्ली।
ध्यान दें: मुख्य मंदिर तक 200 से अधिक सीढ़ियाँ हैं; वरिष्ठ यात्री धीरे-धीरे चढ़ें।
पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने इंद्र की वर्षा से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था, इसलिए भक्त इसे गिरिराज जी के रूप में पूजते हैं। पर्वत की लगभग 21 किमी परिक्रमा का बड़ा महत्व है। मार्ग में मानसी गंगा, दानघाटी, राधा कुंड और कुसुम सरोवर जैसे स्थल आते हैं।
विशेष पर्व
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा (अन्नकूट); आषाढ़ पूर्णिमा पर मुड़िया पूनो (गुरु पूर्णिमा) मेला।
कब जाएँ
पूरे वर्ष परिक्रमा होती है; मुड़िया पूनो और गोवर्धन पूजा पर लाखों भक्त आते हैं।
कैसे पहुँचें
मथुरा से लगभग 23 किमी; नज़दीकी बड़ा स्टेशन मथुरा जंक्शन; हवाई अड्डा आगरा या दिल्ली (लगभग 150 किमी)।
ध्यान दें: पूरी परिक्रमा लगभग 21 किमी पैदल है; वरिष्ठ यात्री अपनी क्षमता के अनुसार योजना बनाएँ।
भागवत पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण ने अपनी अधिकांश बाल लीलाएँ गोकुल में कीं, जहाँ नंद बाबा और यशोदा मैया ने उन्हें पाला। कथा है कि जन्म की रात वसुदेव जी उन्हें यमुना पार कराकर यहाँ लाए थे। बाद में वल्लभाचार्य के पुत्र विट्ठलनाथ जी ने यहाँ निवास कर गोकुल को पुष्टिमार्ग का केंद्र बनाया।
विशेष पर्व
जन्माष्टमी और उसके अगले दिन का नंदोत्सव मुख्य उत्सव हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; जन्माष्टमी के समय विशेष उत्सव।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन मथुरा; हवाई अड्डा आगरा (लगभग 54 किमी)। मथुरा से सड़क मार्ग।
खाटू में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की ‘श्याम’ रूप में पूजा होती है। कथा है कि बर्बरीक ने श्रीकृष्ण के माँगने पर अपना शीश दान किया, और कृष्ण ने उन्हें कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। मान्यता है कि उनका शीश श्याम कुंड से प्रकट हुआ।
विशेष पर्व
फाल्गुन मास में विशाल लक्खी मेला भरता है; बहुत से भक्त रींगस से निशान लेकर पैदल आते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है; फाल्गुन मेले में बहुत भारी भीड़ होती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन रींगस जंक्शन (लगभग 17 किमी)। हवाई अड्डा जयपुर (लगभग 90 किमी)।
ध्यान दें: फाल्गुन मेले में लंबी कतारें लगती हैं और काफ़ी पैदल चलना पड़ता है।
जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में राधा-कृष्ण ‘गोविंद देव जी’ के रूप में विराजते हैं। मान्यता है कि यह विग्रह वृंदावन में रूप गोस्वामी को मिला था, और बाद में सवाई जयसिंह द्वितीय इसे जयपुर लाए। यह मंदिर गौड़ीय वैष्णव परंपरा से जुड़ा है।
विशेष पर्व
जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली, शरद पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष उत्सव होते हैं।
कब जाएँ
साल भर; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
जयपुर शहर के बीच, सिटी पैलेस में। नज़दीकी रेलवे स्टेशन जयपुर जंक्शन, हवाई अड्डा जयपुर।
नाथद्वारा, बनास नदी के किनारे, ज़िला राजसमंद, राजस्थान
नाथद्वारा में गोवर्धन पर्वत उठाए हुए श्रीकृष्ण ‘श्रीनाथजी’ के रूप में पूजे जाते हैं; यह पुष्टिमार्ग (वल्लभ संप्रदाय) का प्रमुख तीर्थ है। यह विग्रह 1672 में ब्रज के गोवर्धन से मेवाड़ लाया गया। कथा है कि सिहाड़ गाँव में बैलगाड़ी का पहिया कीचड़ में धँस गया, तो वहीं मंदिर बनाया गया।
विशेष पर्व
जन्माष्टमी, दीपावली और होली के उत्सव प्रसिद्ध हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
उदयपुर से लगभग 48 किमी उत्तर-पूर्व। नज़दीकी हवाई अड्डा और बड़ा रेलवे स्टेशन उदयपुर में।
ध्यान दें: दर्शन दिन में तय झाँकियों (मंगला, श्रृंगार, राजभोग आदि) में ही होते हैं; बीच में पट बंद रहते हैं।
मंडफिया में श्रीकृष्ण ‘सांवलिया सेठ’ के रूप में पूजे जाते हैं। कथा है कि 1840 में भोलाराम नाम के ग्वाले को स्वप्न में संकेत मिला, और खुदाई में श्रीकृष्ण की तीन प्रतिमाएँ निकलीं। ये मंडफिया, भादसोड़ा और छापर (प्राकट्य स्थल) में विराजित हैं; तीनों मंदिर पास-पास हैं।
विशेष पर्व
देवझूलनी (जलझूलनी) एकादशी पर तीन दिन का बड़ा मेला; जन्माष्टमी और होली भी धूम से मनती हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन चित्तौड़गढ़ (लगभग 40 किमी)। हवाई अड्डा उदयपुर, डबोक (लगभग 60 किमी)।
द्वारका, गोमती के तट पर, ज़िला देवभूमि द्वारका, गुजरात
द्वारका के राजा के रूप में श्रीकृष्ण का यह मंदिर जगत मंदिर कहलाता है और चार धाम तथा सप्तपुरी दोनों में गिना जाता है। पाँच तलों वाला मंदिर 72 स्तंभों पर खड़ा है और शिखर की ध्वजा दिन में कई बार बदली जाती है। मान्यता है कि इसकी पहली स्थापना श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने की थी।
विशेष पर्व
जन्माष्टमी मुख्य उत्सव; नवरात्रि और दीपावली भी धूमधाम से मनाए जाते हैं।
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी का मौसम सबसे अच्छा; जन्माष्टमी पर विशेष उत्सव।
कैसे पहुँचें
द्वारका रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 2 किमी; नज़दीकी हवाई अड्डे पोरबंदर (लगभग 95 किमी) और जामनगर।
यहाँ भगवान गुरुवायूरप्पन की पूजा होती है, जो विष्णु का चतुर्भुज रूप हैं और श्रीकृष्ण माने जाते हैं। कथा है कि देवगुरु बृहस्पति और वायु देव ने यह मूर्ति यहाँ स्थापित की, इसी से नाम गुरुवायूर पड़ा। इसे दक्षिण की द्वारका भी कहा जाता है।
विशेष पर्व
कुंभम मास का 10 दिन का उत्सवम, वृश्चिकम मास की गुरुवायूर एकादशी, अष्टमी रोहिणी (जन्माष्टमी) और विषु।
कब जाएँ
नवंबर से फरवरी का मौसम अधिक सुहावना; अप्रैल-मई बहुत गर्म।
कैसे पहुँचें
गुरुवायूर रेलवे स्टेशन (त्रिशूर से शाखा लाइन); बड़ा स्टेशन त्रिशूर लगभग 26 किमी; कोच्चि हवाई अड्डा लगभग 72 किमी।
13वीं सदी में द्वैत वेदांत के आचार्य माध्वाचार्य ने यहाँ बालकृष्ण की मूर्ति स्थापित की। भक्त नौ छेदों वाली चाँदी मढ़ी खिड़की (नवग्रह किंडी) से दर्शन करते हैं। कथा है कि भक्त कनकदास के लिए भगवान पश्चिम की ओर मुड़े, उस खिड़की को कनकन किंडी कहते हैं।
विशेष पर्व
हर दो वर्ष में पर्याय उत्सव (आठ मठों में सेवा की बारी बदलना), कृष्ण जन्माष्टमी और मकर संक्रांति।
कब जाएँ
पूरे वर्ष दर्शन; जन्माष्टमी और पर्याय उत्सव के समय विशेष आयोजन होते हैं।
कैसे पहुँचें
उडुपी रेलवे स्टेशन (कोंकण रेलवे) सिटी बस स्टैंड से लगभग 4 किमी; मंगलुरु हवाई अड्डा लगभग 60 किमी।
पंढरपुर, चंद्रभागा (भीमा) नदी के तट पर, ज़िला सोलापुर, महाराष्ट्र
भगवान विट्ठल (विठोबा), जिन्हें विष्णु और श्रीकृष्ण का रूप माना जाता है, यहाँ रुक्मिणी (रखुमाई) के साथ विराजते हैं। कथा है कि भक्त पुंडलिक की माता-पिता सेवा से प्रसन्न होकर भगवान ईंट पर खड़े हो गए। यह मंदिर वारकरी संप्रदाय का मुख्य केंद्र है।
विशेष पर्व
आषाढ़ी एकादशी पर विशाल वारी (पालकी यात्रा); कार्तिकी, माघी और चैत्री एकादशी भी प्रमुख।
कब जाएँ
आषाढ़ी (जून-जुलाई) और कार्तिकी (अक्टूबर-नवंबर) एकादशी सबसे बड़े यात्रा अवसर हैं।
कैसे पहुँचें
पंढरपुर रेलवे स्टेशन (मिरज-कुर्डुवाडी लाइन); सोलापुर से सड़क द्वारा लगभग 72 किमी; पुणे हवाई अड्डा लगभग 210 किमी।
यहाँ श्रीकृष्ण रणछोड़राय रूप में विराजते हैं; मुख्य मूर्ति काले कसौटी पत्थर की है। कथा है कि भक्त बोडाणा की भक्ति से भगवान द्वारका से डाकोर पधारे। वर्तमान मंदिर 1772 में पेशवा दरबार से जुड़े गोपाल जगन्नाथ आंबेकर ने बनवाया।
विशेष पर्व
शरद पूर्णिमा मुख्य पर्व, मान्यता है कि इसी दिन भगवान डाकोर पधारे; हर पूर्णिमा पर पदयात्री आते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; शरद पूर्णिमा पर विशेष उत्सव।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी बड़े रेलवे स्टेशन आनंद और नडियाद; हवाई अड्डा वडोदरा (लगभग 78 किमी) या अहमदाबाद (लगभग 90 किमी)।