ब्रज यमुना के दोनों ओर फैला वह क्षेत्र है जो श्रीकृष्ण और राधा जी की लीलाओं से जुड़ा है; इसका केंद्र मथुरा और वृंदावन है। ब्रज की चौरासी कोस परिक्रमा लगभग 300 किमी लंबी है, जिसके मार्ग और नियम 16वीं सदी के वैष्णव संतों ने तय किए। इसमें मथुरा, वृंदावन, गोकुल, गोवर्धन, बरसाना और नंदगाँव जैसे स्थल आते हैं, और यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के साथ राजस्थान और हरियाणा के कुछ भागों तक फैला है।
मान्यता है कि यहीं कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, और गर्भगृह मंदिर उसी कारागार कक्ष के स्थान पर माना जाता है। परिसर में केशवदेव मंदिर (1958) और राधा-कृष्ण का भागवत भवन (1982) भी हैं। आधुनिक परिसर 20वीं सदी में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रयासों से बना।
विशेष पर्व
जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का जन्मोत्सव सबसे बड़ा पर्व; राधाष्टमी, होली और दीपावली भी।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; जन्माष्टमी और होली पर विशेष उत्सव।
कैसे पहुँचें
मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन (दिल्ली-मुंबई मुख्य मार्ग); हवाई अड्डा आगरा (लगभग 60 किमी) या दिल्ली (लगभग 160 किमी)।
कथा है कि स्वामी हरिदास जी की भक्ति से निधिवन में ठाकुर बांके बिहारी जी प्रकट हुए, जिन्हें राधा-कृष्ण का संयुक्त रूप माना जाता है। वर्तमान मंदिर 1862 में बना। यहाँ दर्शन के समय बार-बार पर्दा डाला जाता है और मंदिर में घंटियाँ नहीं लगाई जातीं।
विशेष पर्व
अक्षय तृतीया पर चरण दर्शन, हरियाली तीज पर हिंडोला, शरद पूर्णिमा पर मुरली धारण, जन्माष्टमी।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; होली (फूलों की होली) और जन्माष्टमी पर भारी भीड़।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी बड़ा स्टेशन मथुरा जंक्शन, जो लगभग 10-15 किमी दूर है; हवाई अड्डा आगरा (लगभग 70 किमी) या दिल्ली (लगभग 150 किमी)।
बरसाना, भानुगढ़ पहाड़ी पर, ज़िला मथुरा, उत्तर प्रदेश
मान्यता है कि बरसाना राजा वृषभानु की पुत्री राधा रानी की जन्मभूमि है। भानुगढ़ पहाड़ी पर बना यह मंदिर श्रीजी मंदिर कहलाता है, जहाँ 200 से अधिक सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचते हैं। यहाँ राधा जी की पूजा श्रीकृष्ण के साथ लाडली लाल रूप में होती है।
विशेष पर्व
राधाष्टमी और फरवरी-मार्च की लट्ठमार होली सबसे प्रसिद्ध; जन्माष्टमी और शरद पूर्णिमा भी।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; राधाष्टमी और लट्ठमार होली पर भारी भीड़।
कैसे पहुँचें
मथुरा से लगभग 40 किमी; नज़दीकी बड़ा स्टेशन मथुरा जंक्शन; हवाई अड्डा आगरा या दिल्ली।
ध्यान दें: मुख्य मंदिर तक 200 से अधिक सीढ़ियाँ हैं; वरिष्ठ यात्री धीरे-धीरे चढ़ें।
पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने इंद्र की वर्षा से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था, इसलिए भक्त इसे गिरिराज जी के रूप में पूजते हैं। पर्वत की लगभग 21 किमी परिक्रमा का बड़ा महत्व है। मार्ग में मानसी गंगा, दानघाटी, राधा कुंड और कुसुम सरोवर जैसे स्थल आते हैं।
विशेष पर्व
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा (अन्नकूट); आषाढ़ पूर्णिमा पर मुड़िया पूनो (गुरु पूर्णिमा) मेला।
कब जाएँ
पूरे वर्ष परिक्रमा होती है; मुड़िया पूनो और गोवर्धन पूजा पर लाखों भक्त आते हैं।
कैसे पहुँचें
मथुरा से लगभग 23 किमी; नज़दीकी बड़ा स्टेशन मथुरा जंक्शन; हवाई अड्डा आगरा या दिल्ली (लगभग 150 किमी)।
ध्यान दें: पूरी परिक्रमा लगभग 21 किमी पैदल है; वरिष्ठ यात्री अपनी क्षमता के अनुसार योजना बनाएँ।
भागवत पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण ने अपनी अधिकांश बाल लीलाएँ गोकुल में कीं, जहाँ नंद बाबा और यशोदा मैया ने उन्हें पाला। कथा है कि जन्म की रात वसुदेव जी उन्हें यमुना पार कराकर यहाँ लाए थे। बाद में वल्लभाचार्य के पुत्र विट्ठलनाथ जी ने यहाँ निवास कर गोकुल को पुष्टिमार्ग का केंद्र बनाया।
विशेष पर्व
जन्माष्टमी और उसके अगले दिन का नंदोत्सव मुख्य उत्सव हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना; जन्माष्टमी के समय विशेष उत्सव।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन मथुरा; हवाई अड्डा आगरा (लगभग 54 किमी)। मथुरा से सड़क मार्ग।