॥ तीर्थ दर्शन ॥

राजस्थान के लोक देवता

बाबा रामदेव जी, वीर तेजाजी, गोगाजी और पाबूजी के धाम, जिनकी मान्यता राजस्थान के गाँव-गाँव में है।

बाबा रामदेव जी समाधि, रामदेवरा

रामदेवरा (रुणीचा), पोकरण के पास, ज़िला जैसलमेर, राजस्थान

पोकरण के पास रामदेवरा में लोक देवता बाबा रामदेव जी की समाधि और मंदिर है। बाबा रामदेव जी को सभी धर्मों के लोग मानते हैं; हिंदू और मुसलमान दोनों इन पर श्रद्धा रखते हैं। यहाँ की परंपरा 600 वर्ष से अधिक पुरानी मानी जाती है।

विशेष पर्व
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में विशाल रामदेवरा मेला भरता है; दूर-दूर से पदयात्री आते हैं।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च; भाद्रपद मेले में भारी भीड़ रहती है।
कैसे पहुँचें
पोकरण के पास; रामदेवरा में रेलवे स्टेशन है। हवाई अड्डा जैसलमेर या जोधपुर।
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वीर तेजाजी मंदिर, खरनाल

खरनाल, ज़िला नागौर, राजस्थान

नागौर ज़िले का खरनाल गाँव लोक देवता वीर तेजाजी की जन्मभूमि माना जाता है, जहाँ उनका मंदिर है। तेजाजी को वचन निभाने वाले और गायों की रक्षा करने वाले वीर के रूप में याद किया जाता है। लोक आस्था में उन्हें साँप के काटने से रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है।

विशेष पर्व
भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) पर मेला और विशेष पूजा होती है।
कब जाएँ
तेजा दशमी के समय, या अक्टूबर से मार्च।
कैसे पहुँचें
नागौर शहर के पास; नज़दीकी रेलवे स्टेशन नागौर।

ध्यान दें: साँप के काटने पर तुरंत अस्पताल जाएँ; आस्था इलाज की जगह नहीं लेती।

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गोगाजी धाम, गोगामेड़ी

गोगामेड़ी, नोहर तहसील, ज़िला हनुमानगढ़, राजस्थान

हनुमानगढ़ ज़िले के गोगामेड़ी में लोक देवता गोगाजी (जाहरवीर) की समाधि पर मंदिर है। गोगाजी को हिंदू और मुसलमान दोनों मानते हैं; कई लोग इन्हें गोगा पीर कहते हैं। लोक आस्था में इन्हें साँपों से रक्षा करने वाले देवता माना जाता है।

विशेष पर्व
भाद्रपद कृष्ण नवमी (गोगा नवमी) के आसपास बड़ा मेला भरता है।
कब जाएँ
भाद्रपद मेले के समय, या अक्टूबर से मार्च।
कैसे पहुँचें
गोगामेड़ी में ही रेलवे स्टेशन है; तहसील नगर नोहर है, और ज़िला मुख्यालय हनुमानगढ़ लगभग 120 किमी दूर है।

ध्यान दें: साँप के काटने पर तुरंत अस्पताल जाएँ; आस्था इलाज की जगह नहीं लेती।

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पाबूजी धाम, कोलू

कोलू (कोलूमंड), ज़िला फलोदी, राजस्थान

कोलू गाँव लोक देवता पाबूजी से जुड़ा धाम है, जहाँ उनका मंदिर है। पाबूजी 14वीं सदी के वीर थे, जिन्हें गायों, ऊँटों और कमज़ोरों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। लोक गायक ‘पाबूजी की फड़’ गाकर उनकी कथा सुनाते हैं।

विशेष पर्व
पाबूजी की फड़ (कपड़े पर चित्रित कथा) का रात में दीपक की रोशनी में गायन प्रसिद्ध लोक परंपरा है।
कब जाएँ
अक्टूबर से मार्च का मौसम अच्छा रहता है।
कैसे पहुँचें
फलोदी क्षेत्र में; नज़दीकी बड़ा शहर फलोदी। हवाई अड्डा जोधपुर।
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