उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित भगवान शिव के पाँच मंदिर। कथा है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव शिव से क्षमा माँगने आए, तब शिव बैल रूप में धरती में समा गए। उनके अंग पाँच स्थानों पर प्रकट हुए: केदारनाथ में पीठ का कूबड़, मध्यमहेश्वर में नाभि, तुंगनाथ में भुजाएँ, रुद्रनाथ में मुख और कल्पेश्वर में जटा। कल्पेश्वर को छोड़कर बाकी चारों मंदिर सर्दियों में बंद रहते हैं।
केदारनाथ, मंदाकिनी नदी के पास, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
मंदाकिनी नदी के पास लगभग 3,583 मीटर ऊँचाई पर स्थित केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में एक और पंच केदार में प्रथम है। यह उत्तराखंड की छोटा चार धाम यात्रा का भी भाग है। मान्यता है कि मंदिर का निर्माण पांडवों से जुड़ा है।
विशेष पर्व
कपाट खुलने और भाई दूज पर कपाट बंद होने के अवसर; सर्दियों में पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में।
कब जाएँ
कपाट अप्रैल/मई में खुलते हैं और भाई दूज (अक्टूबर/नवंबर) पर बंद होते हैं।
कैसे पहुँचें
ऋषिकेश से लगभग 223 किमी; सड़क गौरीकुंड तक, फिर लगभग 16 किमी पैदल। नज़दीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून)।
ध्यान दें: लगभग 3,583 मीटर ऊँचाई, ठंड और कठिन चढ़ाई। उत्तराखंड चार धाम यात्रा के लिए सरकारी पंजीकरण अनिवार्य है।
गौंडार गाँव के ऊपर, रांसी से पैदल मार्ग, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
रुद्रप्रयाग जिले में गौंडार गाँव के ऊपर लगभग 3,497 मीटर ऊँचाई पर स्थित द्वितीय केदार, जिसे मदमहेश्वर भी कहते हैं। कथा है कि यहाँ शिव की नाभि (मध्य भाग) प्रकट हुई, इसलिए नाम मध्यमहेश्वर पड़ा।
विशेष पर्व
कपाट खुलने पर ऊखीमठ से डोली यात्रा।
कब जाएँ
कपाट प्रायः मई में खुलते हैं और अक्टूबर/नवंबर में बंद होते हैं।
कैसे पहुँचें
रांसी से लगभग 16-18 किमी पैदल। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन लगभग 227 किमी; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा लगभग 244 किमी।
ध्यान दें: लंबी पैदल चढ़ाई। सर्दियों में पूजा ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में होती है।
चोपता के ऊपर, चंद्रशिला चोटी के नीचे, ज़िला रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
लगभग 3,680 मीटर ऊँचाई पर स्थित तुंगनाथ विश्व के सबसे ऊँचे शिव मंदिरों में गिना जाता है और पंच केदार में सबसे ऊँचा है। कथा है कि यहाँ शिव की भुजाएँ प्रकट हुईं। मंदिर से लगभग 2 किमी ऊपर चंद्रशिला चोटी है।
विशेष पर्व
कपाट खुलने और बंद होने के समय डोली यात्रा।
कब जाएँ
कपाट प्रायः अप्रैल/मई में खुलते हैं और अक्टूबर/नवंबर में बंद होते हैं।
कैसे पहुँचें
चोपता से लगभग 5 किमी पैदल। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन लगभग 240 किमी; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (देहरादून)।
ध्यान दें: अधिक ऊँचाई पर ठंड रहती है। सर्दियों में कपाट बंद रहते हैं और पूजा मक्कूमठ में होती है।
गोपेश्वर के पास, सगर गाँव से पैदल मार्ग, ज़िला चमोली, उत्तराखंड
चमोली जिले में लगभग 3,600 मीटर ऊँचाई पर स्थित चतुर्थ केदार। कथा है कि यहाँ शिव का मुख प्रकट हुआ, इसलिए उनके एकानन (मुख) रूप की पूजा होती है। मंदिर के सामने से नंदा देवी और त्रिशूल पर्वत दिखते हैं।
विशेष पर्व
श्रावण पूर्णिमा (प्रायः रक्षाबंधन) पर वार्षिक मेला।
कब जाएँ
कपाट प्रायः मई में खुलते हैं और अक्टूबर के मध्य में बंद होते हैं।
कैसे पहुँचें
सगर गाँव से लगभग 20 किमी पैदल। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से गोपेश्वर लगभग 241 किमी; जॉली ग्रांट हवाई अड्डा लगभग 258 किमी।
ध्यान दें: पंच केदार की सबसे कठिन चढ़ाइयों में गिनी जाती है। सर्दियों में पूजा गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में होती है।
चमोली जिले की उर्गम घाटी में लगभग 2,200 मीटर ऊँचाई पर स्थित पंचम केदार। कथा है कि यहाँ शिव की जटा प्रकट हुई; गुफा जैसे मार्ग के भीतर जटा रूप की पूजा होती है। मान्यता है कि ऋषि दुर्वासा ने यहाँ तप किया था।
विशेष पर्व
पंच केदार में अकेला मंदिर जो पूरे वर्ष खुला रहता है।
कब जाएँ
पूरे वर्ष खुला; बरसात में सड़क बाधित हो सकती है।
कैसे पहुँचें
बद्रीनाथ मार्ग पर हेलंग से उर्गम घाटी; अब सड़क देवग्राम तक, आगे थोड़ा पैदल। ऋषिकेश स्टेशन लगभग 255 किमी।