सूर्यनार कोविल, आडुतुरै के पास, ज़िला तंजावुर, तमिलनाडु
नवग्रह मंदिरों में यह सूर्य का स्थान है, और नौ में यही अकेला मंदिर है जहाँ ग्रह स्वयं मुख्य देवता हैं। सूर्यदेव यहाँ पत्नियों उषा और प्रत्युषा के साथ विराजते हैं, और शेष आठ ग्रहों के अलग मंदिर इसी परिसर में हैं। यह चोल राजा कुलोत्तुंग प्रथम (1060-1118 ई.) के समय बना।
विशेष पर्व
थै मास (जनवरी-फरवरी) में दस दिन का रथ सप्तमी उत्सव; हर तमिल मास के पहले दिन महाअभिषेक
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
आडुतुरै से लगभग 2 किमी, कुंभकोणम से लगभग 15 किमी; दोनों जगह रेलवे स्टेशन; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
तिंगलूर, तिरुवैयारु के पास, ज़िला तंजावुर, तमिलनाडु
नवग्रह मंदिरों में यह चंद्र का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (कैलासनाथर) हैं और परिसर में चंद्रदेव का अलग मंदिर है। कथा है कि संत अप्पर ने यहाँ भक्त अप्पूदि अडिगल के पुत्र को, जिसे साँप ने डस लिया था, फिर से जीवित किया। मान्यता है कि पुरट्टासि और पंगुनि मास में चाँदनी सीधे शिवलिंग पर पड़ती है।
विशेष पर्व
महाशिवरात्रि, कार्तिगै दीपम, पंगुनि उत्तिरम (मार्च-अप्रैल) और मार्गझी तिरुवादिरै (दिसंबर-जनवरी)
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
तिरुवैयारु से लगभग 4 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन तंजावुर (लगभग 18 किमी); हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
वैदीश्वरन कोविल, सीरकाझी से लगभग 7 किमी, ज़िला मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु
नवग्रह मंदिरों में यह मंगल (अंगारक) का स्थान है। यहाँ भगवान शिव वैद्यनाथ (रोग हरने वाले वैद्य) रूप में माता तैयलनायकी के साथ पूजे जाते हैं, और मान्यता है कि उन्होंने अंगारक का रोग दूर किया था। भक्त सिद्धामृत कुंड में स्नान करते हैं; यह स्थान नाड़ी ज्योतिष के लिए भी जाना जाता है।
विशेष पर्व
पंगुनि (मार्च-अप्रैल) में 28 दिन का ब्रह्मोत्सव; थै मास में मुरुगन उत्सव; मंगलवार मंगल-पूजा के लिए विशेष
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वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन वैदीश्वरन कोविल और मयिलाडुतुरै (लगभग 15 किमी); हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
तिरुवेंकाडु, सीरकाझी-पूम्पुहार मार्ग पर, ज़िला मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु
नवग्रह मंदिरों में यह बुध का स्थान है। मुख्य देवता भगवान शिव (श्वेतारण्येश्वर) और माता ब्रह्मविद्या नायकी हैं, और परिसर में बुध का अलग मंदिर है। कथा है कि शिव ने यहाँ अघोरमूर्ति रूप में मरुत्वासुर का वध किया; यहाँ अग्नि, सूर्य और चंद्र नाम के तीन तीर्थ कुंड हैं।
विशेष पर्व
मासि मास (फरवरी-मार्च) में दस दिन का उत्सव; रविवार रात अघोरमूर्ति की विशेष पूजा
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वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
सीरकाझी से लगभग 12 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन सीरकाझी और मयिलाडुतुरै; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
आलंगुडी, वलंगैमान तालुका (कुंभकोणम-वलंगैमान मार्ग पर), ज़िला तिरुवारूर, तमिलनाडु
नवग्रह मंदिरों में यह गुरु (बृहस्पति) का स्थान है। मुख्य देवता भगवान शिव (आपत्सहायेश्वर, अर्थात संकट में सहायक) और माता एलवारकुझली हैं; गुरु के रूप में यहाँ दक्षिणामूर्ति की विशेष पूजा होती है। कथा है कि शिव ने विष पीकर संसार की रक्षा की थी, और इसी से इस स्थान और देवता का नाम जुड़ा है।
विशेष पर्व
गुरु पेयर्चि (गुरु का राशि परिवर्तन); चित्तिरै (अप्रैल-मई) में ब्रह्मोत्सव; मासि मास के गुरुवार विशेष
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वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
कुंभकोणम से लगभग 16 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन कुंभकोणम; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
ध्यान दें: ध्यान दें: पुदुक्कोट्टई ज़िले का आलंगुडी नगर अलग स्थान है।
कंजनूर, तिरुविडैमरुदूर तालुका (कुंभकोणम-आडुतुरै मार्ग पर), ज़िला तंजावुर, तमिलनाडु
नवग्रह मंदिरों में यह शुक्र का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (अग्नीश्वर) और माता करपगांबिका हैं। मान्यता है कि यहाँ शिव स्वयं शुक्र रूप में पूजे जाते हैं। कथा है कि अग्निदेव ने यहाँ शिव की आराधना कर रोग से मुक्ति पाई।
विशेष पर्व
शुक्रवार शुक्र-पूजा के लिए विशेष माना जाता है
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वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
कुंभकोणम से लगभग 18 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन आडुतुरै और कुंभकोणम; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
तिरुनल्लार, कराईकल नगर से लगभग 5 किमी पश्चिम, पुदुच्चेरी (केंद्र शासित प्रदेश)
नवग्रह मंदिरों में यह शनि का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (दर्भारण्येश्वर) हैं और प्रवेश के पास शनिदेव (शनीश्वर) का मंदिर है। कथा है कि राजा नल यहाँ आराधना करके शनि की पीड़ा से मुक्त हुए। नौ में यही मंदिर तमिलनाडु में नहीं, पुदुच्चेरी के कराईकल ज़िले में है।
विशेष पर्व
लगभग ढाई वर्ष में होने वाला शनि पेयर्चि (शनि का राशि परिवर्तन) सबसे बड़ा पर्व; ब्रह्मोत्सव
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वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन कराईकल (लगभग 5 किमी); हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली (लगभग 160 किमी) और पुदुच्चेरी (लगभग 135 किमी)।
ध्यान दें: परंपरा है कि भक्त नल तीर्थ में स्नान कर पहले शनिदेव, फिर शिव के दर्शन करते हैं।
तिरुनागेश्वरम, कुंभकोणम से लगभग 6 किमी पूर्व, ज़िला तंजावुर, तमिलनाडु
नवग्रह मंदिरों में यह राहु का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (नागनाथर) और माता गिरिगुजांबिका हैं। कथा है कि आदिशेष, तक्षक और कर्कोटक नागों ने यहाँ शिव की पूजा की। यहाँ राहु मानव रूप में हैं, और भक्तों की मान्यता है कि राहुकाल में उनके अभिषेक का दूध नीला हो जाता है।
विशेष पर्व
राहु पेयर्चि (राहु का राशि परिवर्तन, लगभग डेढ़ वर्ष में); महाशिवरात्रि, कार्तिगै दीपम
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वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
कुंभकोणम से लगभग 6 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन कुंभकोणम; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
कीझपेरुम्पल्लम, पूम्पुहार से लगभग 2 किमी, ज़िला मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु
नवग्रह मंदिरों में यह केतु का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (नागनाथर) और माता सौंदर्यनायकी हैं। कथा है कि समुद्र-मंथन के बाद वासुकि नाग ने यहाँ शिव की आराधना की। केतु का विग्रह सर्प के सिर और मानव शरीर वाला है, जो हाथ जोड़कर शिव की पूजा करता दिखता है।
विशेष पर्व
पंगुनि (मार्च-अप्रैल) में वासुकि उत्सव; महाशिवरात्रि; राहु-केतु पेयर्चि पर विशेष होम
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वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन मयिलाडुतुरै; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
ध्यान दें: गाँव छोटा है; मयिलाडुतुरै या सीरकाझी से टैक्सी लेना सुविधाजनक रहता है।
कोणार्क, बंगाल की खाड़ी के तट के पास, ज़िला पुरी, ओडिशा
लगभग 1250 ई. में पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने इसे सूर्यदेव के विशाल रथ के रूप में बनवाया, जिसमें 24 पत्थर के पहिए और 7 घोड़े हैं। मुख्य शिखर 19वीं सदी में गिर गया था। यह यूनेस्को विश्व धरोहर (1984) है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है।
विशेष पर्व
माघ मास (लगभग फरवरी) में चंद्रभागा मेला; हर वर्ष कोणार्क नृत्य महोत्सव
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अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है; गर्मियों में तटीय उमस अधिक होती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन पुरी (लगभग 35 किमी); हवाई अड्डा भुवनेश्वर (लगभग 65 किमी)।
ध्यान दें: मुख्य मंदिर में आज नियमित पूजा नहीं होती; यह पुरातात्विक स्मारक के रूप में देखा जाता है।
सोलंकी (चालुक्य) वंश के राजा भीमदेव प्रथम के समय 1026-27 ई. में बना सूर्य मंदिर। यह अपनी बारीक नक्काशी और सामने बने सीढ़ीदार सूर्य कुंड के लिए प्रसिद्ध है। आक्रमणों में क्षतिग्रस्त यह मंदिर आज संरक्षित स्मारक है।
विशेष पर्व
हर वर्ष जनवरी में मोढेरा नृत्य महोत्सव (उत्तरार्ध महोत्सव)
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अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा समय; अप्रैल से जून में बहुत गर्मी पड़ती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन मेहसाणा; हवाई अड्डा अहमदाबाद।
ध्यान दें: मुख्य मंदिर में आज नियमित पूजा नहीं होती; यह पुरातात्विक स्मारक है।
बिहार का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर, जिसका मुख अधिकतर सूर्य मंदिरों से अलग पश्चिम, अर्थात अस्त होते सूर्य की ओर है। लोक-मान्यता है कि इसे विश्वकर्मा ने एक ही रात में बनाया। इसके निर्माण-काल पर विद्वानों में मतभेद है; प्रायः इसे 7वीं-8वीं सदी से जोड़ा जाता है।
विशेष पर्व
कार्तिक और चैत्र के छठ पर्व पर लाखों श्रद्धालु सूर्य कुंड में स्नान कर अर्घ्य देते हैं; छठ मेला
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छठ के समय सबसे बड़ा मेला लगता है; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुखद रहता है।
कैसे पहुँचें
औरंगाबाद (बिहार) से सड़क मार्ग; नज़दीकी रेलवे स्टेशन अनुग्रह नारायण रोड; हवाई अड्डा गया।
ध्यान दें: ध्यान दें: यह बिहार का औरंगाबाद है; महाराष्ट्र का औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) अलग है।
शिंगणापुर गाँव, नेवासा तालुका, ज़िला अहिल्यानगर (पहले अहमदनगर), महाराष्ट्र
यहाँ शनिदेव लगभग साढ़े पाँच फुट ऊँची काली शिला के रूप में बिना छत वाले खुले चबूतरे पर विराजते हैं। कथा है कि चरवाहों को स्वयंभू शिला मिली और शनिदेव ने स्वप्न में कहा कि पूरा आकाश उनकी छत है। मान्यता है कि शनिदेव गाँव की चोरी से रक्षा करते हैं, इसलिए परंपरा से घरों में दरवाज़े-ताले नहीं लगाए जाते।
विशेष पर्व
शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या (शनि अमावस्या) पर मेला; शनि जयंती पर विशेष उत्सव
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वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से फरवरी का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
अहिल्यानगर से लगभग 35 किमी, शिर्डी से लगभग 74 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन राहुरी, बड़ा स्टेशन अहिल्यानगर; हवाई अड्डा शिर्डी।
कोकिलावन, नंदगांव के पास, कोसी कलां, ज़िला मथुरा, उत्तर प्रदेश
नंदगांव के पास कोकिलावन ब्रज का प्रसिद्ध शनि धाम है। कथा है कि बालक कृष्ण के दर्शन से रोके जाने पर शनिदेव ने इस वन में तप किया और कृष्ण ने उन्हें कोयल रूप में दर्शन दिए; इसी से नाम कोकिलावन पड़ा। भक्त सूर्य कुंड में स्नान कर शनिदेव को तेल चढ़ाते हैं और सवा कोस की परिक्रमा करते हैं।
विशेष पर्व
शनिवार शनिदेव का विशेष दिन है; इस दिन हज़ारों भक्त दर्शन और परिक्रमा के लिए आते हैं
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन होते हैं; अक्टूबर से मार्च का मौसम सुहावना रहता है।
कैसे पहुँचें
मथुरा-दिल्ली राजमार्ग पर बसे कोसी कलां से लगभग 6 किमी; बड़ा रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन; हवाई अड्डे दिल्ली और नोएडा (जेवर)।