॥ तीर्थ-समूह ॥

नवग्रह मंदिर

तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा में कुंभकोणम के आसपास नौ मंदिरों का समूह, जिनमें हर मंदिर एक ग्रह से जुड़ा है। सूर्यनार कोविल में सूर्यदेव स्वयं मुख्य देवता हैं; शेष आठ मुख्य रूप से शिव मंदिर हैं, जिनमें संबंधित ग्रह का अलग मंदिर या विशेष पूजा होती है। कथा है कि श्राप से पीड़ित नवग्रहों से शिव ने कहा कि वे जिन स्थानों पर रहे, वहीं से भक्तों को आशीर्वाद दें। अधिकतर मंदिर चोल काल से जुड़े हैं; शनि का तिरुनल्लार मंदिर पुदुच्चेरी के कराईकल ज़िले में है।

सूर्यनार कोविल (सूर्य मंदिर)

सूर्यनार कोविल, आडुतुरै के पास, ज़िला तंजावुर, तमिलनाडु

नवग्रह मंदिरों में यह सूर्य का स्थान है, और नौ में यही अकेला मंदिर है जहाँ ग्रह स्वयं मुख्य देवता हैं। सूर्यदेव यहाँ पत्नियों उषा और प्रत्युषा के साथ विराजते हैं, और शेष आठ ग्रहों के अलग मंदिर इसी परिसर में हैं। यह चोल राजा कुलोत्तुंग प्रथम (1060-1118 ई.) के समय बना।

विशेष पर्व
थै मास (जनवरी-फरवरी) में दस दिन का रथ सप्तमी उत्सव; हर तमिल मास के पहले दिन महाअभिषेक
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
आडुतुरै से लगभग 2 किमी, कुंभकोणम से लगभग 15 किमी; दोनों जगह रेलवे स्टेशन; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
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श्री कैलासनाथर मंदिर, तिंगलूर (चंद्र)

तिंगलूर, तिरुवैयारु के पास, ज़िला तंजावुर, तमिलनाडु

नवग्रह मंदिरों में यह चंद्र का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (कैलासनाथर) हैं और परिसर में चंद्रदेव का अलग मंदिर है। कथा है कि संत अप्पर ने यहाँ भक्त अप्पूदि अडिगल के पुत्र को, जिसे साँप ने डस लिया था, फिर से जीवित किया। मान्यता है कि पुरट्टासि और पंगुनि मास में चाँदनी सीधे शिवलिंग पर पड़ती है।

विशेष पर्व
महाशिवरात्रि, कार्तिगै दीपम, पंगुनि उत्तिरम (मार्च-अप्रैल) और मार्गझी तिरुवादिरै (दिसंबर-जनवरी)
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
तिरुवैयारु से लगभग 4 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन तंजावुर (लगभग 18 किमी); हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
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श्री वैद्यनाथस्वामी मंदिर, वैदीश्वरन कोविल (मंगल)

वैदीश्वरन कोविल, सीरकाझी से लगभग 7 किमी, ज़िला मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु

नवग्रह मंदिरों में यह मंगल (अंगारक) का स्थान है। यहाँ भगवान शिव वैद्यनाथ (रोग हरने वाले वैद्य) रूप में माता तैयलनायकी के साथ पूजे जाते हैं, और मान्यता है कि उन्होंने अंगारक का रोग दूर किया था। भक्त सिद्धामृत कुंड में स्नान करते हैं; यह स्थान नाड़ी ज्योतिष के लिए भी जाना जाता है।

विशेष पर्व
पंगुनि (मार्च-अप्रैल) में 28 दिन का ब्रह्मोत्सव; थै मास में मुरुगन उत्सव; मंगलवार मंगल-पूजा के लिए विशेष
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन वैदीश्वरन कोविल और मयिलाडुतुरै (लगभग 15 किमी); हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
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श्री श्वेतारण्येश्वर मंदिर, तिरुवेंकाडु (बुध)

तिरुवेंकाडु, सीरकाझी-पूम्पुहार मार्ग पर, ज़िला मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु

नवग्रह मंदिरों में यह बुध का स्थान है। मुख्य देवता भगवान शिव (श्वेतारण्येश्वर) और माता ब्रह्मविद्या नायकी हैं, और परिसर में बुध का अलग मंदिर है। कथा है कि शिव ने यहाँ अघोरमूर्ति रूप में मरुत्वासुर का वध किया; यहाँ अग्नि, सूर्य और चंद्र नाम के तीन तीर्थ कुंड हैं।

विशेष पर्व
मासि मास (फरवरी-मार्च) में दस दिन का उत्सव; रविवार रात अघोरमूर्ति की विशेष पूजा
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
सीरकाझी से लगभग 12 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन सीरकाझी और मयिलाडुतुरै; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
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श्री आपत्सहायेश्वर मंदिर, आलंगुडी (गुरु)

आलंगुडी, वलंगैमान तालुका (कुंभकोणम-वलंगैमान मार्ग पर), ज़िला तिरुवारूर, तमिलनाडु

नवग्रह मंदिरों में यह गुरु (बृहस्पति) का स्थान है। मुख्य देवता भगवान शिव (आपत्सहायेश्वर, अर्थात संकट में सहायक) और माता एलवारकुझली हैं; गुरु के रूप में यहाँ दक्षिणामूर्ति की विशेष पूजा होती है। कथा है कि शिव ने विष पीकर संसार की रक्षा की थी, और इसी से इस स्थान और देवता का नाम जुड़ा है।

विशेष पर्व
गुरु पेयर्चि (गुरु का राशि परिवर्तन); चित्तिरै (अप्रैल-मई) में ब्रह्मोत्सव; मासि मास के गुरुवार विशेष
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
कुंभकोणम से लगभग 16 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन कुंभकोणम; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।

ध्यान दें: ध्यान दें: पुदुक्कोट्टई ज़िले का आलंगुडी नगर अलग स्थान है।

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श्री अग्नीश्वर मंदिर, कंजनूर (शुक्र)

कंजनूर, तिरुविडैमरुदूर तालुका (कुंभकोणम-आडुतुरै मार्ग पर), ज़िला तंजावुर, तमिलनाडु

नवग्रह मंदिरों में यह शुक्र का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (अग्नीश्वर) और माता करपगांबिका हैं। मान्यता है कि यहाँ शिव स्वयं शुक्र रूप में पूजे जाते हैं। कथा है कि अग्निदेव ने यहाँ शिव की आराधना कर रोग से मुक्ति पाई।

विशेष पर्व
शुक्रवार शुक्र-पूजा के लिए विशेष माना जाता है
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
कुंभकोणम से लगभग 18 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन आडुतुरै और कुंभकोणम; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
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श्री दर्भारण्येश्वर मंदिर, तिरुनल्लार (शनि)

तिरुनल्लार, कराईकल नगर से लगभग 5 किमी पश्चिम, पुदुच्चेरी (केंद्र शासित प्रदेश)

नवग्रह मंदिरों में यह शनि का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (दर्भारण्येश्वर) हैं और प्रवेश के पास शनिदेव (शनीश्वर) का मंदिर है। कथा है कि राजा नल यहाँ आराधना करके शनि की पीड़ा से मुक्त हुए। नौ में यही मंदिर तमिलनाडु में नहीं, पुदुच्चेरी के कराईकल ज़िले में है।

विशेष पर्व
लगभग ढाई वर्ष में होने वाला शनि पेयर्चि (शनि का राशि परिवर्तन) सबसे बड़ा पर्व; ब्रह्मोत्सव
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन कराईकल (लगभग 5 किमी); हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली (लगभग 160 किमी) और पुदुच्चेरी (लगभग 135 किमी)।

ध्यान दें: परंपरा है कि भक्त नल तीर्थ में स्नान कर पहले शनिदेव, फिर शिव के दर्शन करते हैं।

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श्री नागनाथस्वामी मंदिर, तिरुनागेश्वरम (राहु)

तिरुनागेश्वरम, कुंभकोणम से लगभग 6 किमी पूर्व, ज़िला तंजावुर, तमिलनाडु

नवग्रह मंदिरों में यह राहु का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (नागनाथर) और माता गिरिगुजांबिका हैं। कथा है कि आदिशेष, तक्षक और कर्कोटक नागों ने यहाँ शिव की पूजा की। यहाँ राहु मानव रूप में हैं, और भक्तों की मान्यता है कि राहुकाल में उनके अभिषेक का दूध नीला हो जाता है।

विशेष पर्व
राहु पेयर्चि (राहु का राशि परिवर्तन, लगभग डेढ़ वर्ष में); महाशिवरात्रि, कार्तिगै दीपम
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
कुंभकोणम से लगभग 6 किमी; नज़दीकी रेलवे स्टेशन कुंभकोणम; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।
जानकारी के स्रोत

श्री नागनाथस्वामी मंदिर, कीझपेरुम्पल्लम (केतु)

कीझपेरुम्पल्लम, पूम्पुहार से लगभग 2 किमी, ज़िला मयिलाडुतुरै, तमिलनाडु

नवग्रह मंदिरों में यह केतु का स्थान है; मुख्य देवता भगवान शिव (नागनाथर) और माता सौंदर्यनायकी हैं। कथा है कि समुद्र-मंथन के बाद वासुकि नाग ने यहाँ शिव की आराधना की। केतु का विग्रह सर्प के सिर और मानव शरीर वाला है, जो हाथ जोड़कर शिव की पूजा करता दिखता है।

विशेष पर्व
पंगुनि (मार्च-अप्रैल) में वासुकि उत्सव; महाशिवरात्रि; राहु-केतु पेयर्चि पर विशेष होम
कब जाएँ
वर्षभर दर्शन; दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे सुहावना, अप्रैल से जून में बहुत गर्मी रहती है।
कैसे पहुँचें
नज़दीकी रेलवे स्टेशन मयिलाडुतुरै; हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली।

ध्यान दें: गाँव छोटा है; मयिलाडुतुरै या सीरकाझी से टैक्सी लेना सुविधाजनक रहता है।

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