- प्रदोष काल
- वृषभ काल (स्थिर लग्न)
- अमावस्या तिथि
- निशीथ काल
- सिंह लग्न (मध्यरात्रि)
- सूर्यास्त
गणना इसी पेज पर, आपके चुने शहर के लिए होती है (लाहिरी अयनांश)। सामान्यतः एक-दो मिनट का अंतर संभव है। दुकान, फ़ैक्टरी या घर के अनुसार मुहूर्त में विशेष बात हो तो पंडित जी से पूछ लें।
उस दिन का पूरा पंचांग और चौघड़ियापाँच दिन का दीपोत्सव
- 6नवंबर धनतेरसशुक्रवार
- 8नवंबर दीपावली (लक्ष्मी पूजा)रविवार
- 9नवंबर कार्तिक अमावस्यासोमवार · दीपावली 8 नवंबर को
- 10नवंबर गोवर्धन पूजा, अन्नकूटमंगलवार
- 11नवंबर भाई दूजबुधवार
तिथियाँ: द्रिक पंचांग (नई दिल्ली)। नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) सामान्यतः दीपावली से एक दिन पहले, सूर्योदय से पहले के अभ्यंग स्नान के साथ मनाई जाती है।
लक्ष्मी पूजा की सामग्री
घर पर लक्ष्मी-गणेश पूजन की सरल विधि
- दिन में घर और आँगन की सफ़ाई करें; मुख्य द्वार पर रंगोली और तोरण लगाएँ।
- मुहूर्त से पहले स्नान कर साफ़ वस्त्र पहनें। पूजा-स्थान पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
- चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पास में जल भरा कलश रखें, उस पर आम के पत्ते और नारियल।
- जल छिड़ककर स्वयं को, आसन को और सामग्री को पवित्र करें, और घी का दीपक जलाएँ।
- हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें: अपना नाम, गोत्र, स्थान और पूजा का उद्देश्य बोलें।
- सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें: रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और मिठाई अर्पित करें, और “ॐ गं गणपतये नमः” बोलें।
- फिर लक्ष्मी जी की पूजा करें: जल या पंचामृत से स्नान, वस्त्र या कलावा, रोली-कुमकुम, अक्षत, फूल-माला, कमलगट्टे, खील-बताशे, मिठाई और फल अर्पित करें। “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” का जप करें।
- व्यापारी कुबेर जी, तिजोरी और नए बही-खाते की पूजा करें: रोली से स्वास्तिक बनाएँ और “शुभ-लाभ” लिखें।
- पूजा के दीपक से और दीपक जलाकर घर के हर कोने, द्वार, तुलसी और पानी के स्थान पर रखें।
- पहले गणेश जी की, फिर लक्ष्मी जी की आरती करें, शंख और घंटी के साथ।
- भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें, प्रसाद बाँटें। परंपरा अनुसार रात भर एक दीपक जलाए रखें।
यह सरल गृहस्थ विधि है। परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार क्रम में अंतर हो सकता है। संकल्प के शब्द अपने नाम-गोत्र के साथ देखने हों, तो संकल्प-पत्र पेज पर बना सकते हैं।
मंत्र और आरती
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
परंपरागत बीज मंत्र
अर्थ:मैं माँ महालक्ष्मी को नमन करता हूँ। ‘श्रीं’ लक्ष्मी जी का बीज अक्षर है।
जप: पूजा में कम से कम 108 बार
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये। धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
परंपरागत कुबेर मंत्र
अर्थ:हे यक्षों के राजा, विश्रवा के पुत्र, धन-धान्य के स्वामी कुबेर! मुझे धन-धान्य की समृद्धि दीजिए, दिलवाइए।
जप: तिजोरी और बही-खाते की पूजा के समय
यह जानकारी शास्त्र और परंपरा पर आधारित है; ग्रंथ का नाम हर मंत्र के साथ लिखा है। कहीं कोई त्रुटि दिखे तो WhatsApp पर बताइए।